Iran and Israel war : मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब लंबी लड़ाई का रूप लेती नजर आ रही है। शुरुआती दिनों में जहां ईरान की सत्ता जल्द गिरने की संभावना जताई जा रही थी, वहीं नई इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स ने इस धारणा को बदल दिया है।
मोसाद प्रमुख का बड़ा आकलन
Mossad प्रमुख David Barnea ने जंग शुरू होने से पहले ही संकेत दिया था कि ईरान में “रेजीम चेंज” संभव है, लेकिन इसमें लंबा समय लग सकता है। उनका आकलन था कि यह प्रक्रिया कुछ दिनों या हफ्तों में नहीं, बल्कि करीब एक साल तक खिंच सकती है।
शुरुआती दावों से अलग तस्वीर
जंग की शुरुआत में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ईरान में जल्द ही विद्रोह भड़क सकता है और सरकार गिर सकती है। हालांकि तीन हफ्ते बीतने के बाद स्थिति यह है कि ईरान की सत्ता कमजोर जरूर हुई है, लेकिन अब भी नियंत्रण में बनी हुई है।
रणनीति पर उठने लगे सवाल
मौजूदा हालात को देखते हुए अब Israel और United States की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में मोसाद प्रमुख पर भी आरोप लगाए गए, लेकिन कहा गया कि उनका आकलन शर्तों पर आधारित था, न कि कोई निश्चित भविष्यवाणी।
सत्ता परिवर्तन की जटिल प्रक्रिया
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान में सत्ता परिवर्तन आसान नहीं है। इसके लिए शीर्ष नेतृत्व को कमजोर करना, सरकारी संस्थाओं को नुकसान पहुंचाना और जनता के विरोध को बढ़ाना जैसी कई शर्तें पूरी करनी होती हैं।
यह पूरी प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है।
अमेरिका और इजरायल का बयान
अमेरिकी इंटेलिजेंस प्रमुख Tulsi Gabbard ने भी कहा है कि ईरान की सरकार कमजोर जरूर हुई है, लेकिन अभी भी कायम है।
वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने माना कि हालात बदलने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सरकार के गिरने की कोई गारंटी नहीं है।
लंबी जंग का खतरा
पूरे घटनाक्रम ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इजरायल और अमेरिका इतनी लंबी जंग के लिए तैयार हैं।
अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो इसका असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था, राजनीति और आम लोगों की जिंदगी पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा।
धीरे-धीरे ही होगा बदलाव
रिपोर्ट्स से फिलहाल यह साफ है कि ईरान में कोई बड़ा बदलाव अचानक नहीं होगा। यदि बदलाव होता भी है, तो वह धीरे-धीरे और लंबे समय में ही सामने आएगा। यही इस जंग की मौजूदा हकीकत बनती जा रही है।

