New law in Telangana : तेलंगाना विधानसभा ने एक अहम बिल को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य बुज़ुर्ग माता-पिता की देखभाल सुनिश्चित करना है। इस कानून के तहत जो कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करेंगे, उनकी Salary का एक हिस्सा काटकर सीधे माता-पिता के खाते में जमा किया जाएगा।
बिल पेश करते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (Chief Minister Revanth Reddy) ने कहा कि माता-पिता अपनी पूरी जिंदगी बच्चों की परवरिश में लगा देते हैं, लेकिन कई बार बच्चे बड़े होकर उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने कहा कि यह कानून बुज़ुर्गों को सुरक्षा और सहारा देने के लिए लाया गया है।
किन पर लागू होगा कानून
यह कानून सरकारी, सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों पर भी लागू होगा। नियम के अनुसार, कर्मचारी की सैलरी से 15 प्रतिशत या अधिकतम 10,000 रुपये (जो भी कम हो) काटकर माता-पिता को दिए जाएंगे।
कैसे होगी कार्रवाई
अगर माता-पिता को लगता है कि उनके बच्चे उनकी देखभाल नहीं कर रहे हैं, तो वे जिला स्तर के अधिकारी (District Collector) के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अधिकारी जांच करेगा और दोनों पक्षों को सुनने के बाद 60 दिनों के अंदर फैसला लिया जाएगा।
जांच में आरोप सही पाए जाने पर कर्मचारी की सैलरी से तय राशि काटने का आदेश दिया जाएगा।
अपील का प्रावधान
अगर कोई पक्ष फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह राज्य स्तर के बुज़ुर्ग आयोग में 45 दिनों के अंदर अपील कर सकता है। आयोग को भी 60 दिनों के भीतर अंतिम फैसला देना होगा।
विशेष स्थिति में नियम
अगर माता-पिता में से एक की मृत्यु हो जाती है, तो पूरी राशि जीवित माता-पिता को मिलेगी। दोनों की मृत्यु होने पर कर्मचारी आवेदन देकर सैलरी कटौती रुकवा सकता है, जिस पर 30 दिनों में फैसला लिया जाएगा।
नैतिक जिम्मेदारी पर जोर
सरकार का कहना है कि यह कानून सिर्फ सजा देने के लिए नहीं, बल्कि लोगों को उनकी पारिवारिक जिम्मेदारी याद दिलाने के लिए लाया गया है। बदलते समय में बुज़ुर्गों की देखभाल कम होती जा रही है, जिसे सुधारने की कोशिश इस कानून के जरिए की गई है।

