Middle East War: मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सीजफायर की उम्मीदों के बीच अब ऐसी खबर सामने आई है जिससे जंग का दायरा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE, ईरान के खिलाफ चल रहे तनाव में अमेरिका और उसके सहयोगियों का साथ देने की तैयारी कर रहा है। ‘The Wall Street Journal’ की रिपोर्ट में टॉप अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि UAE, होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा सकता है। अगर ऐसा होता है तो UAE खाड़ी क्षेत्र का पहला ऐसा देश बन जाएगा जो सीधे तौर पर इस संघर्ष में शामिल होगा।
अमेरिका जंग खत्म करना चाहता है, सहयोगी देश बढ़ाना चाहते हैं दबाव
यह खबर ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कथित तौर पर ईरान के खिलाफ जंग को जल्द खत्म करने की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका पहले संघर्ष खत्म करना चाहता है और बाद में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर ध्यान देना चाहता है| वहीं दूसरी तरफ खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देश, खासकर UAE, अमेरिका से जंग जारी रखने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि ईरान पर दबाव बनाए रखना जरूरी है।
कई स्तर पर काम कर रहा UAE
रिपोर्ट के मुताबिक, UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा है, जिससे सैन्य कार्रवाई को आधिकारिक मंजूरी मिल सके। इसके साथ ही UAE ने अमेरिका, यूरोप और एशिया के देशों से मिलकर गठबंधन बनाने की बात भी कही है। होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी देशों के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। यह रास्ता तेल और गैस निर्यात, जहाजरानी और खाद्य आपूर्ति के लिए लाइफलाइन माना जाता है। ऐसे में इस मार्ग का बंद होना खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।
ईरान पर बढ़ती चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, UAE के एक अधिकारी ने कहा कि ईरान खुद को अस्तित्व की लड़ाई लड़ता हुआ मान रहा है और इस वजह से वह इस अहम समुद्री मार्ग को रोकने के लिए तैयार है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। खाड़ी देशों की तेल और गैस सुविधाओं पर लगातार हमलों के बाद क्षेत्रीय देशों में चिंता बढ़ गई है। उनका मानना है कि अब ईरान की आक्रामकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सैन्य भूमिका निभाने पर विचार
रिपोर्ट के अनुसार, UAE इस जलमार्ग को सुरक्षित करने के लिए सैन्य भूमिका निभाने पर विचार कर रहा है। इसमें समुद्र में बिछाई गई माइंस हटाना और अन्य सुरक्षा सेवाएं देना शामिल हो सकता है।
UAE की रणनीति में बड़ा बदलाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कदम UAE की रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लंबे समय तक UAE ने ईरान के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखे थे और जंग से पहले अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश भी की थी।
इन कूटनीतिक कोशिशों में ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी का अबू धाबी दौरा भी शामिल था। हालांकि बाद में वह इजराइली हवाई हमलों में मारे गए थे।
विवादित द्वीपों पर कब्जे का सुझाव
रिपोर्ट के मुताबिक, UAE ने यह सुझाव भी दिया है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के कुछ अहम द्वीपों पर कब्जा कर ले। इनमें अबू मूसा द्वीप भी शामिल है। इस द्वीप पर UAE अपना दावा करता है, लेकिन दशकों से इस पर ईरान का नियंत्रण है|
जंग बढ़ने की आशंका
अगर UAE इस संघर्ष में सक्रिय रूप से शामिल होता है तो मिडिल-ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है। इससे न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक तेल सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका है।

