Bokaro : एक तरफ जहां सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को अक्सर पूरी दवाइयां नहीं मिल पातीं, वहीं दूसरी ओर बोकारो में सरकारी दवाइयां जलाने का मामला सामने आया है। यह घटना सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में हुई, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया। मामले की जानकारी मिलते ही बोकारो के डीसी अजय नाथ झा ने इसे गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
आयरन की गोलियों और प्रचार सामग्री को जलाया गया
मिली जानकारी के अनुसार सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में आयरन की गोलियों के साथ-साथ कई पुराने प्रचार-प्रसार से जुड़ी सामग्रियों को भी जलाया गया। जब यह मामला सामने आया तो स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल मच गई। लोगों के बीच भी इस बात को लेकर सवाल उठने लगे कि जब अस्पतालों में दवाइयों की कमी की शिकायत रहती है, तो फिर दवाइयों को जलाने की नौबत क्यों आई।
2011 से कमरे में रखी थीं दवाइयां और कागजात
जानकारी के मुताबिक सिविल सर्जन कार्यालय से सटे दो कमरों में वर्ष 2011 से आयरन की गोलियां और पुराने कागजात रखे हुए थे। ये कमरे लंबे समय से बंद पड़े थे और काफी दिनों से खोले भी नहीं गए थे। सिविल सर्जन डॉ. अभय भूषण प्रसाद ने हाल ही में इन कमरों की सफाई कराने का निर्देश दिया था। योजना यह थी कि सफाई के बाद कमरों को ठीक करके आगे किसी काम में लिया जाएगा।
सफाई के दौरान निकाली गईं पुरानी दवाइयां
सफाई के दौरान कमरे से बड़ी मात्रा में पुरानी दवाइयां और कागजात बाहर निकाले गए। इसके बाद इन्हें एक जगह इकट्ठा कर आग लगा दी गई। आग लगाने के बाद ही यह मामला सामने आया और धीरे-धीरे चर्चा का विषय बन गया। हालांकि बाद में मौके से जली हुई दवाइयों और कागजात को हटा दिया गया है।
दोषियों पर होगी कार्रवाई
सिविल सर्जन डॉ. अभय भूषण प्रसाद ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि अगर जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उधर डीसी अजय नाथ झा के स्तर से भी मामले की जांच के लिए मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट डीसी को सौंपी जाएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

