असम चुनाव में उतरेंगे हेमंत सोरेन, प्रमुख नेताओं के साथ करेंगे कैंप, JMM अकेले लड़ेगी विधानसभा चुनाव

JMM News: हेमंत सोरेन अब असम विधानसभा चुनाव को लेकर मैदान में उतरने जा रहे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) अध्यक्ष हेमंत सोरेन 28 मार्च से असम में चुनावी अभियान की कमान संभालेंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कुछ दिनों तक असम में ही कैंप करेंगे और अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। पार्टी ने चुनाव को गंभीरता से लेते हुए अपने सभी स्टार प्रचारकों को 27 मार्च तक असम पहुंचने का निर्देश दिया है।

आदिवासी अस्मिता और स्थानीय मुद्दों पर फोकस

हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो स्थानीय मुद्दों, आदिवासी अस्मिता और क्षेत्रीय अधिकारों को मुख्य चुनावी एजेंडा बनाने की तैयारी कर रही है।
पार्टी का मानना है कि पूर्वोत्तर के आदिवासी बहुल इलाकों में इन मुद्दों का बड़ा प्रभाव हो सकता है। इसी रणनीति के तहत झारखंड मॉडल को भी असम में प्रचारित किया जाएगा, जिसमें

  • स्थानीय संसाधनों पर अधिकार
  • भूमि संरक्षण
  • सामाजिक न्याय
    जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जाएगी

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मजबूत करने की कोशिश

असम में झामुमो की सक्रियता को केवल चुनावी भागीदारी नहीं बल्कि पार्टी के विस्तार की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी अब झारखंड से बाहर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है, खासकर पूर्वोत्तर राज्यों में।

चुनावी रणनीति तैयार, महासचिव पहले से मौजूद

पार्टी के महासचिव विनोद पांडेय पहले से ही असम में डेरा डाले हुए हैं। वे स्थानीय संगठन को सक्रिय करने, बूथ स्तर तक नेटवर्क तैयार करने और उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं।

20 स्टार प्रचारकों की सूची जारी

झामुमो ने भारत निर्वाचन आयोग को 20 स्टार प्रचारकों की सूची सौंप दी है। इसमें शामिल हैं:

  • हेमंत सोरेन
  • डॉ. सरफराज अहमद
  • विनोद पांडेय
  • सुप्रियो भट्टाचार्य
  • जोबा मांझी
  • अभिषेक प्रसाद
  • पंकज मिश्रा
  • सुदिव्य कुमार
  • दीपक बिरुवा
  • चमरा लिंडा
  • योगेंद्र प्रसाद
  • विजय हांसदा
  • कल्पना मुर्मू सोरेन
  • डॉ. महुआ माजी
  • हफीजुल हसन
  • भूषण तिर्की
  • विकास मुंडा
  • एमटी राजा
  • आलोक सोरेन
  • डॉ. लुईस मरांडी

झारखंड से बाहर विस्तार की तैयारी

असम में झामुमो की बढ़ती सक्रियता इस बात का संकेत है कि पार्टी अब झारखंड तक सीमित नहीं रहना चाहती। हेमंत सोरेन का सीधा नेतृत्व इस अभियान को और गंभीर बना रहा है।अब देखने वाली बात होगी कि असम चुनाव में झामुमो का यह दांव कितना सफल होता है और क्या यह पार्टी के लिए नए राजनीतिक रास्ते खोल पाता है।

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