JMM’s Claim : केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन विधेयक 2023 में संशोधन कर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना बना रही है।
इस प्रस्ताव का झारखंड मुक्ति मोर्चा (झारखंड मुक्ति मोर्चा) ने समर्थन किया है, लेकिन पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इससे किसी भी राज्य में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों को कोई राजनीतिक नुकसान नहीं होना चाहिए।
झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि भाजपा के नेता केवल जुमलेबाज हैं। उन्होंने कहा, “नारी तो इस देश में वंदनीय रही ही हैं, लेकिन भाजपा में महिलाओं के प्रति सम्मान का सवाल हमेशा उठता रहा है। कई नेता महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार नहीं करते।”
मनोज पांडे ने झामुमो द्वारा महिलाओं को राजनीतिक अधिकार दिलाने के प्रयासों का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी ने कल्पना सोरेन जैसी नेताओं को सम्मानजनक राजनीतिक स्थान दिया है, और आज वह राज्य की सबसे तेजतर्रार और लोकप्रिय नेताओं में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए 33% आरक्षण होना चाहिए, लेकिन इसकी आड़ में एससी और एसटी समुदायों की सीटें घटनी नहीं चाहिए। सरकार को 2011 की जनगणना को आधार बनाकर या नया परिसीमन कराकर यह सुनिश्चित करना होगा कि दलित और आदिवासी महिलाओं की पर्याप्त संख्या भी आरक्षित सीटों में शामिल रहे।
मनोज पांडे ने जोर देकर कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के दौरान यह ध्यान रखा जाए कि आरक्षण का लाभ सभी महिलाओं तक पहुंचे, विशेषकर एससी और एसटी समुदाय की महिलाओं तक।
