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ट्रंप जाएंगे तो सब ठीक हो जाएगा? भारत को इस गलतफहमी से बाहर निकलना होगा!

US relations with India : भारत में कई लोग मानते हैं कि जब तीन साल बाद डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) राष्ट्रपति पद से हटेंगे, तब America का अगला राष्ट्रपति भारत के साथ रिश्ते सुधार लेगा। लेकिन सच ये है कि यह सोच खुद को दिलासा देने जैसी है।

ट्रंप 2.0 के दौरान अमेरिका ने जानबूझकर भारत पर दबाव बनाया, 50 फीसदी तक Tariff लगाया, पाकिस्तान के Army Chief Asim Munir को खुला समर्थन दिया और कई मौकों पर दक्षिण एशिया में भारत को नजरअंदाज कर पाकिस्तान को तरजीह दी गई।

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कुछ लोग इसे ट्रंप का मोलभाव करने का तरीका मानते हैं, कुछ इसे उनका घमंड कहते हैं और कुछ इसे नोबेल प्राइज की चाह से जोड़ते हैं, लेकिन ट्रंप को हल्के में लेना सबसे बड़ी गलती होगी।

ट्रंप सिर्फ सख्त नहीं, सिस्टम तोड़ने वाले नेता हैं

इसमें कोई शक नहीं कि देशों के रिश्तों में नेताओं की सोच और स्वभाव का बड़ा रोल होता है। ट्रंप इसे बार-बार साबित कर चुके हैं।

वो देशों की बराबरी में भरोसा नहीं रखते, बल्कि अपने फायदे के लिए दबाव, धमकी और सौदेबाजी सब कुछ करते हैं।

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अपने देश के अंदर भी उन्होंने सख्त और विवादित फैसले लिए हैं।

अवैध प्रवासियों को हथकड़ी लगाकर भारत भेजना, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन और राज्य के गवर्नर पर जांच बैठाना, ये सब दिखाता है कि Trump सत्ता के संतुलन जैसी चीजों की ज्यादा परवाह नहीं करते, जबकि यही अमेरिकी सिस्टम की बुनियाद मानी जाती है।

क्या ट्रंप ही अमेरिका की असली सोच दिखा रहे हैं?

Kalinga Institute of Indo-Pacific Studies के फाउंडर चिंतामनि महापात्रा ने एक लेख में लिखा है कि ट्रंप की सोच सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है।

दुनिया की सबसे ताकतवर कुर्सी पर बैठकर वो दूसरे देशों को बराबरी का नहीं, बल्कि दबाव में रखने वाला मानते हैं।

उन्होंने Africa को किनारे कर दिया, यूरोप से दूरी बनाई और लैटिन अमेरिका पर फिर से पकड़ मजबूत करने की कोशिश की।

भारत-प्रशांत इलाके में भी वो अपनी शर्तों पर ही रिश्ते रखना चाहते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले के अमेरिकी राष्ट्रपति ये सब पर्दे के पीछे करते थे, ट्रंप इसे खुलेआम कर रहे हैं।

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दुनिया के नेताओं का खुलेआम मजाक और दबाव की राजनीति

पिछले एक साल में Trump ने Ukraine के राष्ट्रपति जेलेंस्की को व्हाइट हाउस में झिड़का, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति का अपमान किया, फ्रांस के राष्ट्रपति का मजाक उड़ाया, ग्रीनलैंड पर दावा ठोक दिया और यहां तक कह दिया कि वेनेजुएला का भविष्य अमेरिका तय करेगा।

ये सब दिखाता है कि America अब भी खुद को दुनिया का मालिक समझने की सोच में फंसा हुआ है, लेकिन फर्क ये है कि अब दुनिया में और भी ताकतें उभर चुकी हैं जो अमेरिका को खुली चुनौती दे रही हैं।

फिर भारत ही क्यों बन रहा है आसान निशाना?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि America भारत के साथ रिश्ते क्यों बिगाड़ रहा है, जबकि दोनों देशों ने पिछले 20–25 साल में काफी नजदीकी बनाई थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं।

पहली वजह ये कि Trump ऐसे नेताओं को पसंद नहीं करते जो अपने इलाके में मजबूत पकड़ रखते हों। उन्हें लगता है कि ऐसे नेता उनके Global Agenda में रुकावट बन सकते हैं।

चीन और रूस के नेताओं को वो कंट्रोल नहीं कर पाए, लेकिन भारत कई मामलों में अब भी अमेरिका पर निर्भर है, इसलिए यहां दबाव बनाना उन्हें आसान लगता है।

इसके अलावा PM मोदी की लोकप्रियता भी ट्रंप को खटकती है, इसलिए भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर बताना, अवैध प्रवासियों को हथकड़ी में भेजना और वीजा नियम सख्त करना जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, जो चीन या रूस के साथ नहीं किए जाते।

ट्रंप के बाद भी नीति बदलेगी, इसकी गारंटी नहीं

दूसरी और शायद सबसे अहम बात ये है कि ट्रंप के बाद जो भी America का राष्ट्रपति बनेगा, वो बहुत हद तक इसी नीति को आगे बढ़ाएगा।

वजह साफ है, अमेरिका किसी भी हाल में ऐसा भारत नहीं देखना चाहता जो रणनीतिक तौर पर बहुत मजबूत और आत्मनिर्भर हो जाए।

इसलिए भारत को यह मानकर चलना होगा कि सिर्फ चेहरे बदलने से नीतियां नहीं बदलेंगी।

भारत को अपनी विदेश नीति और आर्थिक रणनीति इस तरह बनानी होगी कि वह अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा निर्भर न रहे और अपने हित खुद सुरक्षित कर सके।

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