34th National Games Scam Case: 34वें राष्ट्रीय खेल घोटाला मामले में बुधवार को रांची स्थित CBI के विशेष न्यायालय में सुनवाई हुई। यह सुनवाई विशेष जज योगेश कुमार की अदालत में हुई।
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपी पंकज यादव के वकील को अंतिम अवसर देते हुए Affidavit के माध्यम से अपना पक्ष रखने को कहा था।
साथ ही कोर्ट यह भी जानना चाहती थी कि इस मामले में किन-किन आरोपियों पर आरोप तय किए जा रहे हैं।
जांच में गंभीर लापरवाही का आरोप
इस सुनवाई में शिकायतकर्ता की ओर से CBI द्वारा दाखिल Closure Report को चुनौती दी गई। एफिडेविट में कहा गया कि CBI ने दोबारा जांच में भी गंभीर लापरवाही बरती है।
आरोप है कि पहले वाले जांच अधिकारी को ही फिर से जांच सौंप दी गई। इसके अलावा, Sports Mega Complex बनाने वाली उस कंपनी से कोई पूछताछ नहीं की गई, जिसका अब कोई अस्तित्व ही नहीं है।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वाले तत्कालीन मंत्री सुदेश महतो, उनके साथ विदेश यात्रा पर गए तत्कालीन आप्त सचिव गोपाल जी तिवारी और अन्य संबंधित अधिकारियों से भी पूछताछ नहीं हुई।
इतना ही नहीं, पांच गुना ज्यादा दाम पर सामान खरीदने के आरोप वाले पूर्व डीजीपी से भी कोई सवाल नहीं किया गया।
CBI की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
पंकज यादव ने कोर्ट में कहा कि मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण से लेकर खेल आयोजन के लिए खरीदे गए उपकरणों तक में भारी अनियमितता हुई। जहां 240 करोड़ रुपये के खेल आयोजन को बढ़ाकर 434 करोड़ रुपये में कराया गया।
टेंडर प्रक्रिया, खरीद और बाद में मेंटेनेंस तक हर स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि Jharkhand Vigilance ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, लेकिन CBI को जांच में कुछ भी न मिलना बेहद चौंकाने वाला है। अब कोर्ट इस मामले में आगे के कदम पर विचार कर रही है।

