455-Day Delay Proves Costly : झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने राज्य सरकार द्वारा दायर रिव्यू याचिका को खारिज कर दिया है।
कोर्ट ने इसे गैर-जरूरी बताते हुए कहा कि यह याचिका सिर्फ अदालती कार्रवाई से बचने के लिए दाखिल की गई थी।
इस मामले में बोकारो के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (DLAO) पर ₹1 लाख का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया गया है, जिसे उन्हें अपनी जेब से चुकाना होगा।
455 दिन बाद दाखिल हुई याचिका पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने 455 दिनों की लंबी देरी के बाद यह रिव्यू याचिका दाखिल की।
यह याचिका तब दायर की गई, जब जमीन मालिक की ओर से पुराने आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी। अदालत ने साफ कहा कि यह कदम केवल अवमानना से बचने के लिए उठाया गया।
जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर पुराना विवाद
यह मामला बोकारो जिले के मौजा राधानगर की लगभग 2 एकड़ जमीन से जुड़ा है। यह जमीन वर्ष 1988-89 में सरकार की एक योजना के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थी लखी बाउरी को दी गई थी।
बाद में इस जमीन को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) को रेलवे साइडिंग और डिपो बनाने के लिए दे दिया गया, लेकिन जमीन मालिक को मुआवजा नहीं मिला।
BPCL की राशि को लेकर सरकार की दलील खारिज
राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि BPCL द्वारा जमा की गई ₹91.13 लाख की रकम मुआवजा नहीं, बल्कि सलामी और लगान थी, क्योंकि जमीन गैर मजरुआ थी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि जब मुआवजे के बराबर राशि जमा हो चुकी है, तो उसे सही मालिक को देना सरकार की जिम्मेदारी है।
समय पर भुगतान नहीं हुआ तो बढ़ सकती है मुश्किल
कोर्ट ने आदेश दिया है कि बोकारो के DLAO को दो सप्ताह के भीतर ₹1 लाख का जुर्माना लखी बाउरी को देना होगा।
यदि तय समय पर भुगतान नहीं किया गया, तो इस मामले की रिपोर्ट संबंधित खंडपीठ को भेजी जाएगी, जिससे अधिकारी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

