Middle East War: मिडिल ईस्ट में हालात पल-पल बदल रहे हैं और संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। करीब 30 दिनों से ईरान मजबूती के साथ जंग के मैदान में डटा हुआ है। एक तरफ अमेरिका और इजरायल के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इतना ही नहीं, हिज्बुल्ला के बाद अब यमन के हूती विद्रोही भी इस टकराव में सीधे तौर पर सक्रिय हो गए हैं। इससे इस पूरी जंग का दायरा काफी बढ़ गया है और हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं।
तेहरान यूनिवर्सिटी पर हमले के बाद बढ़ा तनाव
इजरायल की ओर से हमलों की तीव्रता कम नहीं हुई है। पहले सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, फिर ऊर्जा संयंत्रों और न्यूक्लियर साइट्स पर हमले हुए। हाल ही में तेहरान यूनिवर्सिटी पर हुए हमले ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। इस हमले में यूनिवर्सिटी परिसर को भारी नुकसान पहुंचा है और फिलहाल मलबे के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
IRGC की चेतावनी, इजरायल के विश्वविद्यालय निशाने पर
इस घटना के बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। IRGC ने चेतावनी दी है कि इस हमले के जवाब में इजरायल के विश्वविद्यालयों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
इससे पहले भी नतांज के परमाणु ठिकाने पर हमले के 24 घंटे के भीतर ईरान ने इजरायल के डिमोना शहर पर मिसाइलें दागकर अपनी सैन्य रणनीति के संकेत दे दिए थे।
कई मोर्चों पर इजरायल पर बढ़ा दबाव
ईरान अपनी जवाबी रणनीति पर कायम है। यमन से हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई मिसाइलों ने अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। लेबनान से हिज्बुल्ला पहले ही मोर्चे पर तैनात है। ऐसे में अब इजरायल को एक साथ कई दिशाओं से सैन्य दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना संघर्ष का केंद्र
इस पूरे संघर्ष का सबसे अहम केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है। यह दुनिया भर के लिए तेल सप्लाई का प्रमुख रास्ता है। यहां ईरान की मजबूत मौजूदगी ने अमेरिका के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अमेरिका इस रास्ते पर ईरान की नाकेबंदी खत्म करने की कोशिश में जुटा है। लेकिन तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है।
अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य ताकत
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, आधुनिक युद्धपोत USS त्रिपोली ऑपरेशनल जोन में पहुंच चुका है। इस युद्धपोत पर करीब 2500 मरीन कमांडो सवार हैं। इसके अलावा USS बॉक्सर और अन्य युद्धपोतों को भी क्षेत्र में तैनात होने के आदेश दिए गए हैं।
ग्राउंड ऑपरेशन की चर्चा तेज
भारी सैन्य तैयारियों के बीच अब ईरान के खिलाफ ग्राउंड ऑपरेशन यानी जमीनी हमले की चर्चा भी तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वॉशिंगटन में ईरान की घेराबंदी की लंबी योजना पर काम चल रहा है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का दावा है कि यह युद्ध आने वाले कुछ ही हफ्तों में खत्म हो सकता है।
ऑपरेशन “एपिक फ्यूरी” और बढ़ते हमले
अमेरिका ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरान के 11,000 से ज्यादा ठिकानों को नुकसान पहुंचाने का दावा कर रहा है। हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज करते हुए अपने हमलों को और तेज कर रहा है। फिलहाल हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। दोनों तरफ से संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा है। अब आने वाले दिन ही तय करेंगे कि यह जंग किस दिशा में जाएगी।

