New Labour Code News: नौकरीपेशा लोगों के लिए 1 अप्रैल 2026 से कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खासकर नए लेबर कोड को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। देश की कई बड़ी कंपनियां अप्रैल से नए श्रम कानून लागू करने की तैयारी में हैं। नए नियम लागू होने के बाद कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आएगा। पीएफ का योगदान बढ़ सकता है, जिससे टेक-होम सैलरी कम हो सकती है। इसके अलावा काम के घंटे, ग्रेच्युटी और अन्य सुविधाओं से जुड़े नियम भी बदलेंगे।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पहले के 29 श्रम कानूनों को खत्म कर 4 नए लेबर कोड बनाए हैं।
नवंबर में नोटिफाई हुए थे नए नियम
सरकार ने 21 नवंबर 2025 को नए लेबर कोड नोटिफाई किए थे। इनके तहत चार नए कानून लागू किए गए हैं।
- Code on Wages, 2019
- Industrial Relations Code, 2020
- Code on Social Security, 2020
- Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020
ये नए नियम सैलरी, पीएफ, पेंशन, सोशल सिक्योरिटी और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े कई प्रावधानों को बदल देंगे। कई कंपनियां इसे लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और कर्मचारियों को ईमेल के जरिए जानकारी भी दी जा रही है।
बढ़ेगा PF, घट सकती है इन-हैंड सैलरी
नए लेबर कोड के तहत बेसिक सैलरी कुल CTC का 50 फीसदी तक तय की जा सकती है। अभी कई कंपनियां टैक्स बचाने के लिए बेसिक सैलरी कम और भत्ते ज्यादा रखती हैं, लेकिन अब ऐसा करना मुश्किल होगा। इस बदलाव से बेसिक सैलरी बढ़ेगी और उसी के साथ पीएफ योगदान भी बढ़ जाएगा। पीएफ बढ़ने का असर टेक-होम सैलरी पर पड़ेगा और कर्मचारियों को हाथ में मिलने वाली सैलरी कम हो सकती है।
नियुक्ति पत्र और समय पर वेतन अनिवार्य
नए नियमों के तहत हर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। साथ ही समय पर वेतन देना भी कानूनन जरूरी होगा। इसके अलावा देशभर में न्यूनतम वेतन लागू किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों को बहुत कम सैलरी न मिले और जीवन यापन आसान हो सके।
1 साल की नौकरी में मिलेगी ग्रेच्युटी
अब तक ग्रेच्युटी के लिए 5 साल नौकरी करना जरूरी होता था। नए लेबर कोड के तहत सिर्फ 1 साल की नौकरी के बाद भी ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकता है। यह सुविधा फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को भी मिलेगी। उन्हें स्थायी कर्मचारियों के बराबर छुट्टी, चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।
महिलाओं के लिए भी नए नियम
नए लेबर कोड में कामकाजी महिलाओं के लिए भी कई बदलाव किए गए हैं। महिलाओं को अब रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति होगी। हालांकि इसके लिए उनकी सहमति और कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था जरूरी होगी। इसके अलावा महिलाओं को समान वेतन और सम्मान की गारंटी भी दी गई है। ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को भी बराबरी का अधिकार मिलेगा।
काम के घंटे और ओवरटाइम का नियम
नए नियमों के तहत सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम तय किया गया है। वेतन की गणना 8 घंटे के कार्य दिवस के आधार पर होगी। नाइट शिफ्ट के लिए सैलरी कैलकुलेशन अलग तरीके से होगा। ओवरटाइम कराने पर कर्मचारियों को दोगुना वेतन देने का प्रावधान भी किया गया है।
गिग वर्कर्स को भी मिलेगा फायदा
नए लेबर कोड में पहली बार गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी पहचान मिलेगी। उन्हें पीएफ, बीमा और पेंशन जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकेंगे। इसके तहत एग्रीगेटर कंपनियों को अपने टर्नओवर का 1 से 2 फीसदी योगदान देना होगा, जो अधिकतम 5 फीसदी तक हो सकता है। नए लेबर कोड लागू होने के बाद नौकरीपेशा लोगों की सैलरी, काम के घंटे और सुविधाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

