‘जाओ बेटा’ से शुरू हुई सियासी तकरार, विजयन-रेवंत में तेज हुई जुबानी जंग

Kerala Election 2026: केरल विधानसभा चुनाव से पहले पिनाराई विजयन और रेवंत रेड्डी के बीच विकास को लेकर शुरू हुआ विवाद अब व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गया है। दोनों नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस जारी है। अब रेवंत रेड्डी ने पिनाराई विजयन को पत्र लिखकर केरल के विकास मॉडल पर सवाल उठाए हैं और खुली बहस की चुनौती दी है।

विकास मॉडल को लेकर शुरू हुआ विवाद

दरअसल, रेवंत रेड्डी ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को तेलंगाना आने की चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि विजयन तेलंगाना आकर देखें कि उनकी सरकार ने चुनावी वादों को कैसे पूरा किया है।

इसके जवाब में पिनाराई विजयन ने भी केरल सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों का हवाला देते हुए अपनी सरकार के कामकाज का बचाव किया था।

रेवंत रेड्डी का पलटवार, आंकड़ों को बताया पुराना

अब रेवंत रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पत्र साझा किया। इसमें उन्होंने पिनाराई विजयन द्वारा बताए गए आंकड़ों को पुराना बताया। रेवंत रेड्डी ने लिखा कि पिनाराई विजयन 120 महीनों से सत्ता में हैं, जबकि तेलंगाना सरकार ने सिर्फ 28 महीनों में बड़े बदलाव किए हैं।

उन्होंने केरल से युवाओं के पलायन को लेकर ‘ब्रेन ड्रेन’ का आरोप भी लगाया। रेवंत रेड्डी ने पिनाराई विजयन को 7 अप्रैल को तिरुवनंतपुरम में खुली चर्चा के लिए भी न्योता दिया।

फिल्मी डायलॉग से किया हमला

रेवंत रेड्डी ने अपने पत्र के आखिर में मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल की फिल्म आराम्पम का मशहूर डायलॉग इस्तेमाल किया।

उन्होंने लिखा, “नी पो, मोने विजयन।”
इसका मतलब है, “जाओ बेटे विजयन।”

पिनाराई विजयन का भी करारा जवाब

पिनाराई विजयन ने भी उसी अंदाज में जवाब देते हुए लिखा, “डैश मोने रेवंत, जवाब आ रहा है।” बताया जाता है कि “डैश मोने” बोलचाल की भाषा में अपमानजनक शब्द के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

व्यक्तिगत टिप्पणियों पर विजयन की नाराजगी

पिनाराई विजयन ने कई पोस्ट कर अपनी नाराजगी जाहिर की। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा,
“राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन व्यक्तिगत रूप से अपमानजनक टिप्पणियां स्वीकार नहीं हैं। एलडीएफ सरकार की जवाबदेही लगातार रहती है, सिर्फ चुनाव के समय नहीं। हमारी प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। आपकी बातों में सच की कमी है।”

चुनाव से पहले तेज हुई सियासी जंग

केरल चुनाव से पहले दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच यह जुबानी जंग तेज हो गई है। विकास के मुद्दे से शुरू हुआ विवाद अब व्यक्तिगत हमलों तक पहुंच गया है।

अब देखना होगा कि यह सियासी टकराव आगे और कितना बढ़ता है और चुनावी माहौल पर इसका क्या असर पड़ता है।

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