ट्रंप ने खारिज की ईरान की 10 मांगें, व्हाइट हाउस बोला- प्रस्ताव कूड़ेदान में फेंक दिया गया

USA and Iran War: अमेरिका की ओर से शांति का संदेश आने के कुछ ही घंटों बाद हालात फिर तनावपूर्ण हो गए। लेबनान पर इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने पहले होर्मुज स्ट्रेट खोलने का संकेत दिया, लेकिन कुछ घंटों बाद ही इसे फिर बंद करने का ऐलान कर दिया।

ईरान ने साफ कर दिया कि अमेरिका को तय करना होगा कि वह सीजफायर चाहता है या इजरायल के जरिए जंग जारी रखना चाहता है। इस बीच अमेरिका में भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना तेज हो गई है।

अमेरिकी सीनेटर ने ट्रंप को बताया ‘अनफिट’

अमेरिका में डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने राष्ट्रपति ट्रंप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्रंप को राष्ट्रपति पद के लिए मानसिक रूप से अनफिट तक बता दिया।

सीनेटर ने यह भी कहा कि ट्रंप को पद से हटाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाने चाहिए। ट्रंप की आलोचना का केंद्र ईरान की ओर से भेजा गया 10 सूत्रीय प्रस्ताव बना हुआ है।

क्रिस मर्फी ने एक दिन पहले इस प्रस्ताव को ट्रंप का ‘सरेंडर’ बताया था। इसी विवाद के बाद अब व्हाइट हाउस की ओर से सफाई सामने आई है।

व्हाइट हाउस बोला- ट्रंप ने प्रस्ताव खारिज कर दिया

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की 10 मांगों वाली सूची को खारिज कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि ईरान की शुरुआती 10 बिंदुओं की योजना गंभीर और स्वीकार्य नहीं थी। इस वजह से इसे पूरी तरह खारिज कर दिया गया।

कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी नेगोसिएशन टीम ने इस प्रस्ताव को सचमुच कूड़ेदान में फेंक दिया था। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि तथ्यों से अलग किसी भी जानकारी को आगे न बढ़ाया जाए।

‘ईरान की शर्तों पर कोई समझौता नहीं’

व्हाइट हाउस ने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान की शर्तों पर कोई समझौता नहीं करेंगे। कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप वही समझौता करेंगे जो अमेरिकी जनता के हित में होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की ओर से जो नया प्रस्ताव आया है, उसे बातचीत के लिए एक शुरुआती आधार के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन अंतिम फैसला अमेरिका के हितों को ध्यान में रखकर ही होगा।

होर्मुज स्ट्रेट पर भी जारी तनाव

इस पूरे घटनाक्रम के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।

ईरान के रुख में बदलाव और अमेरिका-इजरायल की रणनीति को लेकर दुनिया की नजर अब आगे की बातचीत पर टिकी हुई है

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