लेबनान पर हमलों से भड़का ईरान, कहा — संघर्षविराम में शामिल करना जरूरी

USA and Iran War: मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि लेबनान को किसी भी संघर्षविराम समझौते से अलग नहीं रखा जा सकता। ईरान ने कहा है कि क्षेत्र में स्थायी शांति तभी संभव होगी जब लेबनान को भी समझौते का हिस्सा बनाया जाए।

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबफ ने गुरुवार को दो टूक कहा कि इस मुद्दे पर पीछे हटने या इनकार की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि लेबनान और पूरा ‘रेजिस्टेंस एक्सिस’ ईरान के रणनीतिक सहयोगी हैं और उन्हें संघर्षविराम से बाहर रखना संभव नहीं है।

‘रेजिस्टेंस एक्सिस’ को बाहर रखना असंभव

गालिबफ ने बताया कि ‘रेजिस्टेंस एक्सिस’ ईरान के नेतृत्व वाला एक सैन्य गठबंधन है, जो पश्चिम एशिया में सक्रिय है। उन्होंने यह भी कहा कि शहबाज शरीफ ने अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान लेबनान का मुद्दा साफ तौर पर उठाया था।

गालिबफ के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने दो सप्ताह के अस्थायी संघर्षविराम को लेकर किए गए अपने एक्स पोस्ट में भी लेबनान का जिक्र किया था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संघर्षविराम का उल्लंघन हुआ तो ईरान की ओर से कड़ा और प्रभावी जवाब दिया जाएगा।

सीजफायर के बावजूद इजरायल के हमले

यह बयान ऐसे समय आया है जब इजरायल ने संघर्षविराम लागू होने के बावजूद लेबनान में हमले किए हैं। इजरायल का दावा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के संघर्षविराम में लेबनान शामिल नहीं है।

वहीं अमेरिका ने भी इजरायल के रुख का समर्थन करते हुए कहा है कि ईरान ने समझौते की शर्तों को गलत तरीके से समझा है। दूसरी ओर कई यूरोपीय देशों का मानना है कि लेबनान को इस समझौते में शामिल किया जाना चाहिए था। इससे विवाद और गहरा गया है।

पाकिस्तान के हस्तक्षेप से टला बड़ा टकराव

इस बीच ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने खुलासा किया कि बीती रात हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे और ईरान जवाबी कार्रवाई के करीब पहुंच गया था।

हालांकि, पाकिस्तान के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को संभाला गया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने ईरान तक अमेरिका का संदेश पहुंचाया, जिसमें इजरायल को रोकने के प्रयासों की जानकारी दी गई।

इस्लामाबाद में हो सकती है अहम शांति वार्ता

सूत्रों के मुताबिक, ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद रवाना होगा। यहां अमेरिका के साथ संघर्षविराम की शर्तों और स्थायी शांति पर चर्चा की जाएगी।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इस वार्ता को बेहद अहम माना जा रहा है और दुनिया की नजर अब आने वाले घटनाक्रम पर टिकी है।

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