Iran and USA War: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच अहम त्रिपक्षीय वार्ता शुरू हो गई है। इस बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह वार्ता पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। उन्होंने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की रचनात्मक बातचीत की प्रतिबद्धता की सराहना भी की।
लेबनान में हमलों का मुद्दा उठा, युद्धविराम की मांग
तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक वार्ता से पहले ईरान ने लेबनान में जारी इजरायली हमलों का मुद्दा उठाया। ईरान ने बेरुत और दक्षिणी लेबनान में हमले रोकने की मांग की है। इन हमलों को रोकना क्षेत्र में युद्धविराम लागू करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
शहबाज शरीफ ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सराहना की
ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने वार्ता में ईरान की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि पाकिस्तान क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है। पाकिस्तान ने कहा कि बातचीत के जरिए विवादों का समाधान निकालने और शांति का ठोस उदाहरण पेश करने की कोशिश की जा रही है।
ईरान ने रखीं चार बड़ी शर्तें
ईरान ने इस वार्ता के लिए चार बुनियादी शर्तें रखी हैं और साफ किया है कि इन पर समझौता नहीं होगा।
ईरान की शर्तें इस प्रकार हैं।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की पूर्ण संप्रभुता सुनिश्चित करना।
- हमलावर देश द्वारा युद्ध के नुकसान का पूरा हर्जाना देना।
- ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को बिना शर्त जारी करना।
- पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थायी युद्धविराम लागू करना।
पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका
इस वार्ता में पाकिस्तान मेजबान और मध्यस्थ दोनों की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इसहाक डार, आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आसिम मलिक कर रहे हैं।
अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल में कौन शामिल
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर और यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर शामिल हैं। वहीं ईरानी प्रतिनिधिमंडल में 71 सदस्य शामिल हैं। दल की अगुवाई ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ कर रहे हैं। इसमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली अकबर अहमदियान और सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दुलनसर हेम्मती भी शामिल हैं।
इस्लामाबाद के सेरेना होटल में हो रही बातचीत
दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद के सेरेना होटल में ठहरे हुए हैं और बातचीत भी यहीं हो रही है। हालांकि दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर बातचीत नहीं करेंगे। अधिकारियों के अनुसार दोनों टीमों को अलग-अलग कमरों में बैठाया गया है और पाकिस्तानी अधिकारी उनके बीच संदेश पहुंचा रहे हैं। कूटनीतिक भाषा में इसे प्रॉक्सिमिटी टॉक्स कहा जाता है।
परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट पर मतभेद
सूत्रों के मुताबिक ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है और यूरेनियम संवर्धन छोड़ने को तैयार नहीं है। वहीं अमेरिका का कहना है कि समझौते का सबसे अहम हिस्सा यह होना चाहिए कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों।
‘करो या मरो’ वाला पल बताया गया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस वार्ता को करो या मरो वाला पल बताया है। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब क्षेत्र में हालात अभी भी अस्थिर बने हुए हैं। तकनीकी तौर पर सीजफायर लागू है, लेकिन लेबनान में इजरायली ऑपरेशन जारी हैं। ऐसे में यह वार्ता क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में बेहद अहम मानी जा रही है।

