Charak Puja Jharkhand : झारखंड के जामताड़ा जिले में ऐतिहासिक चड़क पूजा की शुरुआत नहाय-खाय के साथ हो गई है। इसके साथ ही प्रसिद्ध पांच दिवसीय विश्वा मेला की तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। यह आयोजन Mattoad झिलवा स्थित प्राचीन शिव मंदिर में हर साल पूरे विधि-विधान के साथ किया जाता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर हजारों साल पुराना है और यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू (Shivalinga Swayambhu) माने जाते हैं। मंदिर की खास बात यह है कि यहां एक कतार में 10 शिवलिंग और एक शिवलिंग बीच में स्थित है, जो श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है।
हर साल चैत्र महीने में इस पूजा का आयोजन होता है। पूजा शुरू होने से करीब 15 दिन पहले ही श्रद्धालु वैष्णव नियमों का पालन करना शुरू कर देते हैं। मान्यता है कि इस अनुष्ठान में किसी भी तरह की गलती होने पर दंड मिलता है, इसलिए लोग पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ इसमें शामिल होते हैं।
कमेटी सदस्य दिलीप मंडल ने बताया कि इस पूजा की परंपरा बहुत पुरानी है और आसपास के जिलों जैसे दुमका, देवघर और धनबाद से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
मंदिर के पुजारी पंचू ठाकुर के अनुसार, इस पूजा में ‘भोक्ता’ की विशेष भूमिका होती है। भोक्ता तीन दिनों तक कठोर उपवास रखते हैं और पूजा के बाद केवल एक बार नीम शरबत ग्रहण करते हैं। यह इस अनुष्ठान की सबसे कठिन परंपराओं में से एक मानी जाती है।
पूजा के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर भोक्ता चैताली गीतों पर नृत्य करते हैं, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। शाम के समय महिलाओं द्वारा भव्य संध्या आरती की जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मुख्य पुजारी भागीरथ सिंह ने बताया कि इस साल 400 से अधिक भोक्ता इस अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं। पूजा के अंत में माँ सिंहवाहिनी की आराधना की जाती है और सभी त्रुटियों के लिए क्षमा याचना (Apologies) के साथ अनुष्ठान का समापन होता है।
पांच दिन का कार्यक्रम इस प्रकार है :
10 अप्रैल : नहाय-खाय से शुरुआत
11 अप्रैल : गजन बेड़ा, पट पूजा, नदी स्नान
12 अप्रैल : भोक्ता नृत्य और फलाली
13 अप्रैल : मेला चरम पर, संध्या आरती और विशेष आयोजन
14 अप्रैल : अग्नि खेला और निर्जल वितरण
15 अप्रैल : चड़क पूजा, मुंडन और समापन

