Prashant Bose : रांची से एक अहम खबर सामने आई है। प्रतिबंधित माओवादी संगठन के वरिष्ठ नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा (Prashant Bose alias Kishan Da) का एक गोपनीय पत्र सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगा है। यह पत्र उन्होंने अपनी मौत से पहले रांची जेल से अपने साथियों को लिखा था।
मिली जानकारी के अनुसार इस पत्र में किशन दा ने संगठन की मौजूदा स्थिति को बेहद गंभीर और जटिल बताया है। उन्होंने लिखा है कि वर्तमान परिस्थितियों में सशस्त्र संघर्ष जारी रखना लगभग असंभव होता जा रहा है।
साथियों को दिए संकेत
20 मार्च 2026 को लिखे इस पत्र में उन्होंने ‘कॉमरेड सागर’ यानी मिसिर बेसरा को संबोधित किया है। पत्र में उन्होंने इशारों-इशारों में साथियों से हालात को समझने और आगे की रणनीति पर सोचने की बात कही है। साथ ही यह भी संकेत दिया है कि बिना हालात का सही आकलन किए आगे बढ़ना संगठन को और नुकसान पहुंचा सकता है।
रणनीति बदलने की सलाह
किशन दा ने अपने पत्र में संगठन को भारी नुकसान होने का जिक्र किया है और कहा है कि हाल के सुरक्षा अभियानों के कारण स्थिति कमजोर हुई है। ऐसे में उन्होंने नेतृत्व से सशस्त्र संघर्ष (Armed Conflict) की नीति पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
एजेंसियां कर रहीं जांच
सुरक्षा एजेंसियां इस पत्र का गहराई से विश्लेषण कर रही हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि यह पत्र जेल से बाहर कैसे पहुंचा। माना जा रहा है कि यह पत्र सारंडा क्षेत्र तक पहुंचाया गया था।
31 मार्च को हुई थी मौत
गौरतलब है कि प्रशांत बोस की 31 मार्च 2026 को रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई थी। वह साल 2021 से जेल में बंद थे।
लंबा रहा आपराधिक इतिहास
प्रशांत बोस माओवादी संगठन (Maoist Organization) के शीर्ष नेताओं में शामिल रहे हैं। उन पर झारखंड समेत कई राज्यों में दर्जनों मामले दर्ज थे। पुलिस के अनुसार, कई बड़े नक्सली हमलों और घटनाओं में उनकी भूमिका रही थी।
