Iran-US Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे चली शांति वार्ता बेनतीजा रही। इस बैठक में तीन देशों ने हिस्सा लिया और पाकिस्तान ने इसकी मेजबानी की। बातचीत का मुख्य फोकस पश्चिम एशिया में सीजफायर को मजबूत करना, लेबनान में चल रहे युद्ध को रोकना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था। हालांकि लंबी बातचीत के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। वार्ता फेल होने के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से अमेरिका के लिए रवाना हो गया। इसके बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी इस्लामाबाद से निकल गया।
वेंस बोले — ईरान ने नहीं मानी अमेरिकी शर्तें
बातचीत खत्म होने के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि समझौता न होने की सबसे बड़ी वजह ईरान का अमेरिकी शर्तों को न मानना रहा। उन्होंने कहा, “हमने 21 घंटे तक लगातार बातचीत की। कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन हम किसी समझौते तक नहीं पहुंच सके। हमने अपनी रेड लाइन साफ कर दी थी, लेकिन ईरान ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।” वेंस ने यह भी कहा कि अमेरिका ने बातचीत में लचीलापन दिखाया, लेकिन ईरानी पक्ष आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं हुआ।
ईरान ने अमेरिका पर लगाया आरोप
वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका बातचीत से बाहर निकलने का बहाना ढूंढ रहा था। ईरानी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल तेहरान का अमेरिका के साथ अगले दौर की बातचीत का कोई इरादा नहीं है। सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी जहाजों पर हमले की धमकी दी और अपने फ्रीज एसेट्स खोलने की मांग दोहराई।
ट्रंप का सख्त रुख — होर्मुज खुला रहेगा
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है और वहां जहाजों की आवाजाही को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समुद्री रास्ते को खुला रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
आगे बातचीत जारी रखने के संकेत
हालांकि इस्लामाबाद में बातचीत के दौरान तनाव रहा, लेकिन दोनों पक्षों ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में बातचीत जारी रखी जा सकती है। पाकिस्तान ने भी उम्मीद जताई है कि आगे की बातचीत से स्थायी शांति का रास्ता निकल सकता है।

