Operation Sindoor : भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत की गई एयर स्ट्राइक ने पाकिस्तान को पूरी तरह हिला दिया था।
अब यह बात दुनिया के सामने आ चुकी है कि इस सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ।
हालात इतने खराब हो गए थे कि पाकिस्तान ने युद्ध रुकवाने के लिए अमेरिका से बार-बार गुहार लगाई। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने डर के मारे करीब 60 बार अमेरिका से संपर्क किया था।
अमेरिकी दस्तावेजों से हुआ बड़ा खुलासा
यह जानकारी Foreign Agents Registration Act (FARA) के तहत सार्वजनिक किए गए अमेरिकी दस्तावेजों से सामने आई है। ये दस्तावेज Donald Trump के कार्यकाल से जुड़े बताए जा रहे हैं।
इनमें खुलासा हुआ है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका में जोरदार लॉबिंग कराई थी। इस लॉबिंग पर लगभग 45 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान इस बात से डरा हुआ था कि ऑपरेशन सिंदूर केवल रोका गया है, खत्म नहीं हुआ। उसे आशंका थी कि भारत कभी भी दोबारा हमला कर सकता है।
इसी डर के कारण Pakistan लगातार अमेरिकी प्रशासन के बड़े अधिकारियों से संपर्क में था और पूरे मामले को “क्राइसिस मैनेजमेंट” की तरह संभालने की कोशिश कर रहा था।
हथियार और आर्थिक मदद की भी लगाई गुहार
अमेरिकी कागजात बताते हैं कि पाकिस्तान ने न सिर्फ भारत का सैन्य अभियान रुकवाने की अपील की, बल्कि अमेरिका से हथियार और आर्थिक मदद भी मांगी।
पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों को यह साफ दिखने लगा था कि भारत की सैन्य ताकत के सामने वे ज्यादा देर टिक नहीं पाएंगे। भारी नुकसान के डर से पाकिस्तानी कमांडरों की तरफ से भारत का ऑपरेशन रोकने की अपील की गई थी।
मोदी के बयान से और बढ़ी पाकिस्तान की चिंता
पाकिस्तान की चिंता इसलिए भी बढ़ गई थी क्योंकि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मई में साफ कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है, केवल रोका गया है। इससे पाकिस्तान को लगा कि भारत भविष्य में फिर से कार्रवाई कर सकता है।
पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
गौरतलब है कि 22 अप्रैल को Jammu and Kashmir के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने मई 2025 के पहले सप्ताह में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।
7 मई को की गई एयर स्ट्राइक में 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे और पाकिस्तान के कई सैन्य एयरबेस तबाह हो गए थे। आखिरकार 10 मई को दोनों देशों के बीच सीजफायर हुआ था।

