Protest in Front of Lok Bhavan: पलामू जिले के 251 चतुर्थ कर्मचारी अपनी नौकरी से जुड़ी मांगों को लेकर रांची के लोक भवन (Lok Bhavan) के सामने लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
ये सभी कर्मचारी दूर-दराज से पैदल यात्रा कर राजधानी पहुंचे हैं और सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे है।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कई वर्षों तक ईमानदारी से सेवा दी, लेकिन अब अचानक नौकरी से हटाए जाने के कारण उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
2010 से शुरू हुई नियुक्ति प्रक्रिया, 2025 में अचानक बर्खास्तगी
धरना दे रहे कर्मचारियों ने बताया कि चतुर्थ कर्मचारी पद के लिए वर्ष 2010 में विज्ञापन (Advertisement) जारी किया गया था। इसके बाद 2017 में लिखित परीक्षा ली गई। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्ष 2018 में सभी 251 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया गया।
नियुक्ति मिलने के बाद इन कर्मचारियों ने अलग-अलग सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दीं। करीब आठ साल तक लगातार काम करने के बावजूद 1 मार्च 2025 को बिना किसी पूर्व सूचना के सभी कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया।
जीवन यापन में हो रही परेशानी, उम्र निकल जाने की चिंता
कर्मचारियों का कहना है कि नौकरी जाने के बाद उनका जीवन बहुत मुश्किल हो गया है। परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि नौकरी करते-करते उनकी उम्र भी निकल गई है, ऐसे में अब नई नौकरी मिलना भी आसान नहीं है। इसी वजह से वे सरकार से समायोजन की मांग कर रहे हैं।
180 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे रांची
धरना में शामिल लोगों ने बताया कि रांची से पलामू की दूरी करीब 180 किलोमीटर है। इसके बावजूद वे अपनी मांगों को लेकर पैदल यात्रा करते हुए Lok Bhavan पहुंचे हैं।
इस आंदोलन में हृदय नारायण पासवान, विवेक शुक्ला, राकेश ठाकुर, कृष्णा पासवान, सुधाकर दुबे, नरेश भारती, राजेश पासवान सहित कई अन्य कर्मचारी शामिल हैं। सभी का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

