Killing of Leaders Increased Concern: झारखंड में मुंडा समाज से जुड़े नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं (Social Workers) की लगातार हो रही हत्याओं ने पूरे समाज को चिंता में डाल दिया है।
बीते पांच वर्षों में एक के बाद एक हुई इन घटनाओं से लोगों के मन में डर के साथ-साथ गुस्सा भी बढ़ रहा है।
समाज के लोग यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर आदिवासी अधिकार, जल-जंगल-जमीन की बात करने वाले नेता ही क्यों बार-बार निशाने पर आ रहे हैं।
पिछले पांच वर्षों में हुई घटनाओं से गहराया डर
लोगों का कहना है कि जिन नेताओं ने आदिवासी हक और समाज के मुद्दों को मजबूती से उठाया, उन्हीं की हत्या (Murder) कर दी गई।
सभी मामलों में एक ही तरीका अपनाया गया, यानी गोली मारकर हत्या। इससे यह चिंता और बढ़ गई है कि ये घटनाएं किसी गहरी साजिश की ओर इशारा कर रही हैं।
गोली मारकर हत्या का एक जैसा तरीका, साजिश की आशंका
साल 2026 की शुरुआत में ही 7 जनवरी को Khunti district में मुंडा समाज के पड़हा राजा सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
यह घटना समाज के लिए बड़ा झटका साबित हुई। लोगों का कहना है कि साल का पहला महीना भी पूरा नहीं हुआ और इस तरह की वारदात ने माहौल को और भयभीत कर दिया।
इससे पहले 16 फरवरी 2023 को Ramgarh district के पतरातु से सटे भदानीनगर क्षेत्र के लोवाडीह गांव में आजसू नेता मनोज मुंडा की गोली मारकर हत्या (Murder) कर दी गई थी।
यह घटना रामगढ़ विधानसभा चुनाव (Ramgarh Assembly Elections) से ठीक पहले हुई थी, जिससे राजनीतिक साजिश की आशंका और गहरी हो गई थी।
राजनीति और कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल
3 मार्च 2020 को रांची के मोरहाबादी इलाके में भाजपा एसटी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रेमसागर मुंडा की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी।
राजधानी में हुई इस घटना ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद 22 सितंबर 2021 को BJP ST मोर्चा के ग्रामीण जिलाध्यक्ष जीतराम मुंडा की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई।
26 जुलाई 2023 को CPI नेता सुभाष मुंडा की दलादिली चौक स्थित पार्टी कार्यालय में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
सरकार और प्रशासन से सुरक्षा व निष्पक्ष जांच की मांग
इन सभी घटनाओं के बाद मुंडा समाज में यह भावना मजबूत हो गई है कि समाज के नेताओं की सुरक्षा खतरे में है।
लोग सरकार और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि सभी मामलों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को कड़ी सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि समाज में फिर से भरोसा कायम हो सके।

