Surrendered Naxalites Get Major Relief: झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति (Surrender and Rehabilitation Policy) का असर साफ दिखाई दे रहा है।
इसी नीति से प्रेरित होकर और पुलिस के लगातार दबाव के कारण लातेहार जिले में कुल 11 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। अब इन सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को झारखंड सरकार की ओर से कुल 22.86 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।
इस संबंध में गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग (Disaster Management Department) ने आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया है।
पुनर्वास के लिए दी गई आर्थिक सहायता
जानकारी के अनुसार, ये सभी नक्सली लातेहार पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुके हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में कुख्यात नक्सली लवलेश गंझू का नाम भी शामिल है।
लवलेश गंझू को सबसे अधिक 6 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। सरकार की ओर से दी गई यह राशि पुनर्वास अनुदान, पहले से घोषित इनाम, हथियार जमा करने के बदले नकद राशि, मकान किराया और बच्चों की शिक्षा से जुड़े खर्चों के लिए दी गई है।
इसका उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वालों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें नई जिंदगी शुरू करने में मदद करना है।
किस नक्सली को कितनी राशि मिली
सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार, अखिलेश यादव को 5.75 लाख रुपये दिए गए हैं। वहीं मोजिंदर गंझु को 2 लाख रुपये, ब्रह्मदेव गंझु को 1.32 लाख रुपये और रघुनाथ सिंह को 1.28 लाख रुपये की सहायता मिली है। अनिल उरांव को भी 1.28 लाख रुपये दिए गए हैं।
इसके अलावा संजय प्रजापति को 1.21 लाख रुपये, बैजनाथ सिंह, दशरथ उरांव, सतेंद्र उरांव और मोहन परहिया को 1-1 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई है।
लातेहार बना आत्मसमर्पण में सबसे आगे
यह भी उल्लेखनीय है कि साल 2025 में पूरे झारखंड में सबसे अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण लातेहार जिले में किया है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में लातेहार (Latehar) में कुल 23 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जो यह दिखाता है कि सरकार की नीति और पुलिस की कार्रवाई असरदार साबित हो रही है।
सरकार का मानना है कि आने वाले समय में और भी नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाएंगे।

