Ranchi : केंद्रीय सरना संघर्ष समिति और हेसल सरना समिति के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को हेसल में जदुरा जतरा का भव्य आयोजन किया गया। इस पारंपरिक आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। जतरा के दौरान आदिवासी रीति-रिवाज और परंपराओं का पूरे विधि-विधान के साथ पालन किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र उत्सवमय माहौल में डूबा रहा।
ईष्ट देव की पूजा और गांव की खुशहाली की कामना
जतरा के अवसर पर सोमरा पाहन, योगेन्द्र पाहन और पाईनभोरा सोहाराई मुंड़ा ने ईष्ट देव की पूजा-अर्चना की। पूजा के दौरान रंगवा मुर्गा, माला मुर्गा और सफेद मुर्गा की बलि दी गई। ईष्ट देव से यह प्रार्थना की गई कि गांवों में सुख-समृद्धि बनी रहे, आपसी भाईचारा कायम रहे और खेत-खलिहान हरे-भरे रहें। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई।
मुख्य अतिथियों ने संस्कृति बचाने पर दिया जोर
इस जतरा में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व शिक्षा मंत्री बंधू तिर्की और विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद महुआ माजी मौजूद रहीं। बंधू तिर्की ने अपने संबोधन में कहा कि यदि झारखंड को सुरक्षित रखना है तो यहां की सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं को बचाना बेहद जरूरी है। संस्कृति का संरक्षण होगा, तभी समाज और पहचान सुरक्षित रह पाएगी।
एकजुटता से ही बचेगी परंपरा
महुआ माजी ने कहा कि जतरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भाईचारा और खुशियां बांटने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग रहकर परंपरा और संस्कृति को बचाया नहीं जा सकता, इसके लिए समाज को एकजुट रहना होगा।
युवाओं और शिक्षा पर दिया गया संदेश
- ए.सी. सदस्य नारायण उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी पीछे है। समाज को आगे बढ़ाने के लिए बच्चों की शिक्षा और युवाओं की भागीदारी जरूरी है। वहीं, केंद्रीय सरना संघर्ष समिति के अध्यक्ष शिवा कच्छप ने कहा कि जिस तरह आदिवासी समाज अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता है, उसी तरह अपनी संस्कृति और पहचान की रक्षा भी करनी चाहिए।
इन लोगों का रहा विशेष योगदान
जतरा को सफल बनाने में जितू तिर्की, बिक्की तिर्की, बाबू टोप्पो, गौतम कुजूर, गीता कुजूर, अंजीत लकड़ा, राजू लकड़ा, बिष्णु तिर्की, सती तिर्की, अनिता उरांव, सागर टोप्पो, अपना कुजूर, सुमन उरांव, सोनी तिर्की, नेहा तिर्की, गुड्डी कच्छप, जोसेफीन कच्छप सहित कई लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

