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मनरेगा में बदलाव के खिलाफ कांग्रेस का 45 दिन का आंदोलन शुरू

Congress Begins 45-day Agitation Against Changes in MNREGA : मनरेगा योजना में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किए गए बदलावों के विरोध में कांग्रेस ने शनिवार से 45 दिनों तक चलने वाला देशव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया है।

इस आंदोलन को गैर-BJP शासित राज्यों का भी समर्थन मिल रहा है। कर्नाटक, तेलंगाना और पंजाब पहले ही नए जी राम जी कानून के खिलाफ अपने-अपने विधानसभा (Assembly) में प्रस्ताव पारित कर चुके हैं।

वहीं तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल ने भी खुलकर इस फैसले का विरोध किया है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह बदलाव राज्यों और ग्रामीण मजदूरों दोनों के हितों के खिलाफ है।

गैर-भाजपा शासित राज्यों की आपत्तियां

इन राज्यों का मुख्य विरोध इस बात को लेकर है कि मनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम क्यों हटाया गया। विपक्ष का कहना है कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि योजना की मूल भावना से भी छेड़छाड़ है।

उनका आरोप है कि नई योजना को मांग आधारित की जगह आपूर्ति आधारित ढांचे में लागू किया जा रहा है, जिससे गरीब ग्रामीणों के रोजगार अधिकार कमजोर होंगे।

राज्यों का यह भी कहना है कि नए कानून से उन पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और केंद्र सरकार का पूरा नियंत्रण हो जाएगा।

विपक्षी दलों के अनुसार, यह कदम राज्यों की स्वायत्तता पर सीधा हमला है। कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि अगर कर्नाटक में जी राम जी कानून लागू होता है, तो अगले पांच सालों में राज्य सरकार को करीब 20,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) इस कानून को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने योजना का नाम बदलने को बंगाल और बंगालियों की अस्मिता का अपमान बताया है।

पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने और योजना को केंद्र के नियंत्रण में देने से राज्य के खजाने पर भारी दबाव पड़ेगा।

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अब योजनाओं का खर्च राज्यों पर डाल रही है और नाम बदलकर पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले रही है।

वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने भी जी राम जी बिल का विरोध करते हुए इसे महात्मा गांधी का अपमान बताया और कहा कि इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

SBI  रिसर्च का अलग दावा

इस बीच SBI रिसर्च ने एक अलग रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर वीबी जी राम जी एक्ट लागू होता है तो राज्यों को करीब 17,000 करोड़ रुपये का फायदा हो सकता है। यह अनुमान पिछले सात वर्षों के मनरेगा आवंटन की तुलना के आधार पर लगाया गया है।

रिसर्च में कहा गया है कि नए ढांचे में केंद्र और राज्यों के बीच धन का बंटवारा मानक आकलन के आधार पर होगा, जिससे समानता और कार्यक्षमता बढ़ेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक यह मॉडल राज्यों को वित्तीय सहायता देने के साथ-साथ रोजगार की गारंटी को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

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