क्या आपको भी अचानक कुछ खास खाने का क्यों करता है मन? जानें फूड क्रेविंग सिर्फ भूख नहीं होती

Food craving: अक्सर हमें लगता है कि अगर किसी खास चीज को खाने का मन कर रहा है तो इसका मतलब भूख लगी है। लेकिन मनोविज्ञान के मुताबिक ऐसा हमेशा नहीं होता। कई बार अचानक किसी खास खाने की इच्छा हमारे दिमाग, भावनाओं और मानसिक स्थिति से जुड़ी होती है। तनाव, अकेलापन, पुरानी आदतें और यादें भी तय करती हैं कि हमें क्या खाने का मन करेगा।

दिमाग देता है ये संकेत

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि फूड क्रेविंग दरअसल दिमाग का एक तरह का सिग्नल होता है। जब हम तनाव, उदासी या भावनात्मक दबाव महसूस करते हैं, तो दिमाग ऐसे खाने की ओर खींचता है जो तुरंत सुकून या संतुष्टि दे सके।

कुरकुरी चीजें खाने का मन क्यों करता है

अगर आपको बार-बार चिप्स, नमकीन या दूसरी कुरकुरी चीजें खाने की इच्छा होती है, तो यह दबे हुए तनाव या गुस्से का संकेत हो सकता है। कुरकुरी चीजों को चबाने से शरीर में जमा तनाव थोड़ा कम महसूस हो सकता है।

तीखा खाने वाले लोग कैसे होते हैं

जो लोग बहुत ज्यादा मसालेदार या तीखा खाना पसंद करते हैं, वे अक्सर नई चीजें अनुभव करने वाले और रोमांच पसंद होते हैं। मनोविज्ञान के अनुसार तीखा खाना दिमाग में उत्साह और उत्तेजना का एहसास बढ़ाता है।

गर्म खाना देता है सुकून

जब कोई व्यक्ति उदास या अकेला महसूस करता है तो उसे सूप, चाय या घर का गर्म खाना खाने का मन करता है। ऐसा इसलिए क्योंकि गर्म खाना हमारे दिमाग में सुरक्षा, देखभाल और आराम की भावना से जुड़ा होता है।

मोबाइल देखते हुए खाना क्यों बढ़ा देता है भूख

अगर आप टीवी देखते हुए या मोबाइल चलाते हुए खाना खाते हैं, तो दिमाग उस खाने को ठीक से याद नहीं रख पाता। इसकी वजह से थोड़ी देर बाद फिर से भूख जैसा महसूस होने लगता है।

उदासी में मीठा क्यों अच्छा लगता है

जब व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर या उदास महसूस करता है, तो मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है। चीनी शरीर में सेरोटोनिन नाम का ‘फील-गुड’ हार्मोन थोड़े समय के लिए बढ़ा देती है, जिससे मन हल्का महसूस होता है।

प्लेट का खाना खत्म करने की आदत कहां से आती है

कई लोग पेट भर जाने के बाद भी प्लेट का सारा खाना खत्म करते हैं। यह आदत अक्सर बचपन की सीख से जुड़ी होती है, जैसे ‘खाना बर्बाद नहीं करना चाहिए’ या कभी भोजन की कमी का अनुभव।

नाश्ता छोड़ने से बढ़ सकती है ओवरईटिंग

जो लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं, उनमें दिन के बाद के समय में ज्यादा अस्वस्थ खाने की आदत देखने को मिलती है। इससे ओवरईटिंग यानी जरूरत से ज्यादा खाने का खतरा भी बढ़ जाता है।

कम्फर्ट फूड का रिश्ता यादों से

कई बार हमारी पसंदीदा ‘कम्फर्ट फूड’ का स्वाद से ज्यादा संबंध हमारी यादों से होता है। बचपन में खाया गया कोई खास खाना हमें खुशी और सुरक्षा की पुरानी याद दिलाता है।

बार-बार एक ही चीज खाने की आदत

कुछ लोग लंबे समय तक एक ही तरह का खाना बार-बार खाते रहते हैं। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि तनाव भरे समय में यह आदत व्यक्ति को नियंत्रण और स्थिरता का एहसास देती है।

धीरे-धीरे खाना खाने के फायदे

जो लोग धीरे-धीरे खाना खाते हैं, वे अक्सर अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर पाते हैं। इससे चिंता कम होती है और शरीर को समय पर पेट भरने का संकेत भी मिल जाता है।

हर समय कुछ खाने का मन क्यों करता है

अगर किसी व्यक्ति को लगातार कुछ न कुछ खाने का मन करता रहता है, तो यह हमेशा भूख नहीं होती। कई बार यह मानसिक थकान, तनाव या भावनात्मक खालीपन का संकेत भी हो सकता है।

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