LPG Crisis In India: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध और मिडिल-ईस्ट में तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। ग्लोबल एनर्जी संकट के चलते देश में एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हो गई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई शहरों में लोगों को गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। वहीं होटल और रेस्टोरेंट गैस की कमी से जूझ रहे हैं और कई जगह बंद होने की नौबत आ गई है।
कमर्शियल गैस की सप्लाई रुकी, होटल कारोबार पर असर
तेल कंपनियों ने 7 मार्च को एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाने का ऐलान किया था। इसके बाद अब कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई फिलहाल रोक दी गई है। इसका सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर पड़ रहा है।
होटल एसोसिएशन ‘आहार’ (AHAR) के मुताबिक, गैस सप्लाई की कमी के कारण मुंबई में करीब 20% होटल बंद हो चुके हैं। अगर हालात ऐसे ही रहे तो अगले दो दिनों में लगभग 50% होटल बंद होने की आशंका जताई गई है।
आम लोगों में भी बढ़ी चिंता
एलपीजी की कमी का असर सिर्फ होटल उद्योग तक सीमित नहीं है। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं। लोगों को डर है कि अगर सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो घरेलू गैस की समस्या और बढ़ सकती है।
खाड़ी देशों से आता है 90% एलपीजी
भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। देश की कुल खपत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा विदेशों से आता है। इसमें से करीब 90% एलपीजी खाड़ी देशों से आयात की जाती है।

सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देश भारत को गैस सप्लाई करने वाले प्रमुख देश हैं। मौजूदा युद्ध और क्षेत्रीय तनाव की वजह से इन देशों से आने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे अचानक एलपीजी की कमी बढ़ने लगी है।
अमेरिका से सप्लाई सीमित, पहुंचने में लगता है ज्यादा समय
भारत अमेरिका से भी एलपीजी आयात करता है, लेकिन यह देश की कुल जरूरत का करीब 10% ही पूरा कर पाता है।
इसके अलावा अमेरिका से गैस की खेप भारत पहुंचने में लगभग 45 दिन लगते हैं, जबकि खाड़ी देशों से एलपीजी एक हफ्ते से भी कम समय में पहुंच जाती है। यही वजह है कि भारत के लिए खाड़ी देशों से आयात ज्यादा अहम माना जाता है।
कैसे आती है एलपीजी भारत?
भारत में एलपीजी टैंकरों और जहाजों के जरिए आयात की जाती है। यह गैस मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है। आयात के बाद मशीनों की मदद से इसे गैस के रूप में बदलकर सिलेंडर या पाइपलाइन के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाता है।
संकट से निपटने के लिए सरकार के कदम
एलपीजी संकट के असर को कम करने के लिए सरकार ने कुछ त्वरित कदम उठाए हैं। रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि एलपीजी का उत्पादन अधिकतम किया जाए।
साथ ही GAIL और ONGC को भी गैस उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा गया है। सरकार ने साफ किया है कि अतिरिक्त उत्पादन का इस्तेमाल प्राथमिकता के तौर पर घरेलू एलपीजी सप्लाई के लिए किया जाएगा।

