Income Tax rules 2025 : आयकर विभाग ने बैंक ग्राहकों को राहत देते हुए ब्याज आय पर टैक्स कटौती (TDS) को लेकर नया स्पष्टीकरण जारी किया है। नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत अब सभी बैंक सरकारी, निजी और सहकारी एक ही नियम का पालन करेंगे।
इस फैसले से बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों के बीच बना भ्रम खत्म होगा।
क्या है नई TDS सीमा?
आयकर विभाग ने ब्याज पर TDS काटने की सीमा तय कर दी है:
* सामान्य नागरिक: सालाना ब्याज ₹50,000 से ज्यादा होने पर ही TDS कटेगा।
* वरिष्ठ नागरिक (60 वर्ष से ऊपर): ₹1,00,000 से ज्यादा ब्याज पर TDS लगेगा।
क्यों जरूरी था यह स्पष्टीकरण?
नए कानून की धारा 402 में “बैंकिंग कंपनी” की परिभाषा को लेकर भ्रम की स्थिति थी। पहले अलग-अलग बैंकों के लिए अलग नियम माने जाते थे। अब विभाग ने साफ कर दिया है कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत आने वाले सभी बैंक एक ही श्रेणी में माने जाएंगे।
इसका मतलब है कि बड़े सरकारी बैंक जैसे SBI और छोटे सहकारी बैंक – दोनों पर समान नियम लागू होंगे।
ग्राहकों को क्या फायदा?
अब बैंक मनमर्जी से TDS नहीं काट सकेंगे। यदि आपकी ब्याज आय तय सीमा से कम है, तो कोई भी बैंक टैक्स नहीं काटेगा। इससे छोटे निवेशकों और बचत करने वालों को सीधा लाभ मिलेगा।
TDS से बचने के तरीके विशेषज्ञों के अनुसार :
* अगर आपकी कुल आय टैक्स छूट सीमा से कम है, तो बैंक में फॉर्म 15G (सामान्य नागरिक) या फॉर्म 15H (वरिष्ठ नागरिक) जमा करें।
* बैंक खाते में PAN कार्ड अपडेट जरूर रखें। PAN न होने पर बैंक 10% की जगह 20% TDS काट सकता है।

