New Delhi : आज पूरे देश में महावीर जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। भगवान महावीर की जयंती के अवसर पर मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखने को मिल रही है। लोग पूजा-अर्चना, अभिषेक और शोभायात्राओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
पंचांग के अनुसार तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह तिथि 30 मार्च सुबह 7:09 बजे से शुरू होकर 31 मार्च सुबह 6:55 बजे तक रही, इसलिए आज 31 मार्च को महावीर जयंती मनाई जा रही है।
राजसी जीवन छोड़ अपनाया तप का मार्ग
भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व में वैशाली के कुंडलग्राम में हुआ था। उनका बचपन का नाम वर्धमान था। राजघराने में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने 30 वर्ष की आयु में घर-परिवार का त्याग कर तपस्या का मार्ग चुना और आत्मज्ञान की खोज में लग गए। कई वर्षों की कठिन साधना के बाद उन्हें केवल ज्ञान (केवल्य ज्ञान) की प्राप्ति हुई। इसके बाद उन्होंने समाज को अहिंसा, सत्य और संयम का संदेश दिया। 72 वर्ष की आयु में उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया, लेकिन उनके विचार आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।
महावीर स्वामी की प्रमुख शिक्षाएं
भगवान महावीर की शिक्षाएं आज भी बेहद प्रासंगिक हैं –
अहिंसा: किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाना
सत्य: हमेशा सच का साथ देना
अस्तेय: बिना अनुमति किसी की वस्तु न लेना
ब्रह्मचर्य: इंद्रियों पर नियंत्रण रखना
अपरिग्रह: जरूरत से ज्यादा संग्रह न करना
पूजा, दान और सेवा का विशेष महत्व
इस दिन जैन समुदाय के लोग मंदिरों में विशेष पूजा करते हैं, भगवान महावीर की प्रतिमाओं का अभिषेक करते हैं और भव्य शोभायात्राएं निकालते हैं। साथ ही दान-पुण्य, भंडारा और जरूरतमंदों की सेवा भी की जाती है।
आज भी प्रासंगिक है संदेश
आज के समय में जब समाज में हिंसा और असहिष्णुता बढ़ रही है, तब भगवान महावीर का अहिंसा और शांति का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। उनका जीवन लोगों को सादगी और मानवता के साथ जीने की सीख देता है।

