New Delhi : संसद के 16 अप्रैल से शुरू होने वाले स्पेशल सेशन से पहले विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. ब्लॉक 15 अप्रैल को अहम बैठक करेगा। इस बैठक में महिला आरक्षण बिल में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा कर एक साझा रणनीति बनाई जाएगी। केंद्र सरकार ने 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस दौरान महिला आरक्षण बिल, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा जाता है, में बदलावों को पास करने की योजना है। यह बिल 2023 में संसद के दोनों सदनों से पास होकर कानून बन चुका है।
यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देता है। हालांकि, इसे 2029 से लागू किया जाना है, जब जनगणना और सीटों के परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
विपक्ष को जल्दबाजी पर आपत्ति
विपक्षी दलों ने इस स्पेशल सेशन के समय पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावों के बीच इस मुद्दे को आगे बढ़ाना राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकता है। खासकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में होने वाले चुनावों को देखते हुए विपक्ष को शक है कि सरकार इसका राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है।
विपक्ष का यह भी आरोप है कि सरकार ने महिला आरक्षण बिल और डिलिमिटेशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ऑल-पार्टी मीटिंग की मांग को नजरअंदाज किया। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान इस तरह के फैसले लेना आचार संहिता की भावना के खिलाफ है।
कांग्रेस और सहयोगी दलों की तैयारी
कांग्रेस ने 10 अप्रैल को अपनी कार्यसमिति की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की। बैठक में यह सवाल उठाया गया कि सरकार इस मामले में जल्दबाजी क्यों कर रही है। कुछ नेताओं का मानना है कि सरकार अन्य मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यह कदम उठा रही है।
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि स्पेशल सेशन से पहले इस मुद्दे पर विपक्ष का एकजुट होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस लंबे समय से महिला आरक्षण की समर्थक रही है।
अन्य दलों के भी सवाल
समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने आरोप लगाया कि सरकार पश्चिम बंगाल में राजनीतिक फायदा उठाने के लिए बिल में बदलाव करना चाहती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर कानून 2029 से लागू होना है, तो अभी इतनी जल्दी क्यों की जा रही है।
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने भी सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार बिना पर्याप्त चर्चा के बिल पास कराने की कोशिश कर रही है।
डिलिमिटेशन पर भी विवाद
डिलिमिटेशन को लेकर भी विपक्ष में चिंता है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। विपक्ष का कहना है कि इतने बड़े फैसले से पहले व्यापक चर्चा जरूरी है।

