Supreme Court: “मेरी उम्र 58 साल है, मेरे बच्चों के भी बच्चे हो गए। अब मुझसे कहा जा रहा है कि आप TET की परीक्षा पास करो, वरना नौकरी से हटाया जाएगा। आप बताइए क्या ये ठीक है?”
बिजनौर से दिल्ली के रामलीला मैदान विरोध करने पहुंचीं शिक्षिका अनीता देवी मीडिया से यह सवाल पूछ रही थीं। उनके बगल में खड़ी नीलम की उम्र 50 साल है। किसी की उम्र 55 साल है। सालों से सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले इन शिक्षकों के सामने अब नई चुनौती खड़ी हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब इन शिक्षकों को TET परीक्षा पास करने का दबाव दिया जा रहा है। इसी के विरोध में शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में हजारों सरकारी शिक्षक पहुंचे। अनीता देवी जैसी देशभर के 20 लाख से ज्यादा सरकारी शिक्षकों पर नौकरी का संकट मंडरा रहा है।
क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने TET परीक्षा को अनिवार्य कर दिया है। पूरे भारत में करीब 20 लाख और उत्तर प्रदेश में लगभग 2 लाख ऐसे शिक्षक हैं जो 2011 से पहले भर्ती हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इन शिक्षकों को दो साल के भीतर TET पास करना होगा। ऐसा नहीं करने पर उनकी नौकरी पर खतरा हो सकता है।
इसी फैसले के विरोध में शनिवार को देशभर के शिक्षक Teachers Federation Of India के बैनर तले रामलीला मैदान में इकट्ठा हुए। शिक्षकों का कहना है कि खेल के बीच में नियम बदलना ठीक नहीं है।
TET परीक्षा से क्यों घबराए शिक्षक
जो शिक्षक सालों से बच्चों की परीक्षाएं लेते आए हैं, अब खुद परीक्षा देने को लेकर चिंतित हैं। Teachers Federation Of India के राष्ट्रीय सचिव संजीव शर्मा का कहना है कि कई साल तक पढ़ाने के बाद अब उनसे परीक्षा देने को कहा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह वैसा ही है जैसे किसी पुराने डॉक्टर से कहा जाए कि अब आप NEET परीक्षा पास करो। क्या ऐसा कहीं होता है।
उनका कहना है कि सरकार को TET परीक्षा की जगह पुराने शिक्षकों को नए तरीके से प्रशिक्षित करना चाहिए।
इस रैली में पहुंचे सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि शिक्षा मंत्री से मिलकर इस समस्या से अवगत कराया गया है। प्रधानमंत्री से भी मांग की जाएगी ताकि इसका समाधान निकाला जा सके।
कब शुरू हुआ विवाद
एक सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि शिक्षा का अधिकार लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को दो साल के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा।
Teachers Federation Of India के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा का कहना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की बात नहीं सुनी।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से देश के करीब 20 लाख शिक्षकों का भविष्य संकट में आ गया है। उनकी मांग है कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट दी जाए।
शिक्षकों ने सरकार से इस मामले में अध्यादेश लाने की भी मांग की है।
