Ranchi : बिरसा मुंडा हवाई अड्डा इन दिनों दोहरी समस्या का सामना कर रहा है। एक तरफ बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के कारण एयरपोर्ट की जमीन लगातार कम हो रही है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार के मोनेटाइजेशन प्लान में शामिल न होने से इसके विकास की गति भी धीमी पड़ गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एयरपोर्ट की कुल 1,520 एकड़ जमीन में से लगभग 858 एकड़ पर अवैध कब्जा हो चुका है। इससे एयरपोर्ट प्रबंधन के पास अब केवल करीब 514 एकड़ जमीन ही बची है। यह जमीन 1941-43 और 1963-64 के बीच अधिग्रहित की गई थी।
सुरक्षा और विस्तार पर असर
एयरपोर्ट पर बढ़ते हवाई यातायात के बीच विस्तार की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। लेकिन अतिक्रमण के कारण विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। एयरपोर्ट के आसपास अनियोजित निर्माण और बस्तियां सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा बन रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कार्रवाई की मांग कर चुकी हैं।
बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल, फिर भी पिछड़ रहा
क्षेत्रफल के आधार पर रांची एयरपोर्ट देश के शीर्ष 10 बड़े एयरपोर्ट्स में सातवें स्थान पर आता है। इस सूची में राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा जैसे आधुनिक एयरपोर्ट शामिल हैं। इन एयरपोर्ट्स के तेजी से विकास के बीच रांची एयरपोर्ट का सिकुड़ना चिंता का विषय बन गया है।
14 साल से अटका जमीन अधिग्रहण
एयरपोर्ट विस्तार के लिए 2012-13 से 303 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक यह पूरी नहीं हो सकी है। इस मामले में 35 से ज्यादा बैठकें हो चुकी हैं। पुराने नक्शों के आधार पर जमीन का सर्वे किया जा रहा है। राज्य सरकार से इस जमीन को 30 साल की लीज पर देने का प्रस्ताव है, लेकिन चिन्हित क्षेत्र में मंदिर समेत करीब 150 घरों का अतिक्रमण है।
कई योजनाएं अधूरी
जमीन की कमी के कारण एयरपोर्ट की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं रुकी हुई हैं। इनमें आइसोलेशन बे, कैट-2 लाइट सिस्टम, पैरेलल टैक्सी ट्रैक, टर्मिनल विस्तार, ग्रीनफील्ड डेवलपमेंट और कार्गो कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।
यात्रियों की संख्या बढ़ी
रांची एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां से रोज करीब 8,000 यात्री सफर कर रहे हैं। कई एयरलाइंस ने नई उड़ानों के लिए प्रस्ताव भी दिए हैं। एयरपोर्ट को पर्यावरण से जुड़ा आईएसओ प्रमाणन भी मिल चुका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संभावना बढ़ी है।
भविष्य की योजनाएं
यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें सिक्योरिटी चेक काउंटर को 3 से बढ़ाकर 8 करना, दो डिपार्चर एरिया बनाना, एयरलाइन काउंटर 16 से बढ़ाकर 38 करना और नए प्रवेश-निकास गेट बनाना शामिल है।
क्या कहते हैं अधिकारी
पूर्व निदेशक एवी कृष्णा का कहना है कि यदि अतिक्रमण हटाने और जमीन हस्तांतरण पर जल्द फैसला नहीं हुआ, तो रांची की हवाई कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है। वहीं, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि विस्तार के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है और जिला प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखानी होगी।

