Cases of illegal Buying and Selling : सेवायत भूमि की अवैध खरीद-बिक्री (illegal Buying and Selling) से जुड़े मामले में जेल में बंद हजारीबाग के लैंड ब्रोकर विजय प्रताप सिंह को झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) से कोई राहत नहीं मिली है।
हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। बुधवार को इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
ACB की दलीलों के आगे नहीं टिकी जमानत याचिका
बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में विजय प्रताप सिंह की बेल अर्जी पर विस्तार से सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आरोपी विजय प्रताप सिंह की ओर से उनके वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।
दोनों पक्षों की बातों को सुनने के बाद अदालत ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने विजय प्रताप सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी।
इस केस की सुनवाई High Court के न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में हुई।
कोर्ट ने साफ किया कि सेवायत भूमि जैसे संवेदनशील मामले में अवैध खरीद-बिक्री के आरोप गंभीर हैं और इसकी गहन जांच जरूरी है। इसलिए आरोपी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
एक दिन पहले ही मुख्य आरोपी की भी बेल हुई थी खारिज
गौरतलब है कि इस मामले में एक दिन पहले मंगलवार को भी हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया था।
कोर्ट ने इसी केस के मुख्य आरोपी विनय चौबे की जमानत अर्जी को भी खारिज कर दिया था। इससे साफ है कि अदालत इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है।
ACB ने इस घोटाले को लेकर कांड संख्या 9/2025 दर्ज की है। जांच एजेंसी का कहना है कि सेवायत भूमि की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री कर नियमों का उल्लंघन किया गया है।
ACB की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुमित गड़ोदिया ने कोर्ट में पक्ष रखा और जमानत का विरोध किया।
फिलहाल, High Court के इस फैसले के बाद विजय प्रताप सिंह को जेल में ही रहना होगा और मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी।

