Violent Protests in Iran: ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। देश के सर्वोच्च शासक Ayatollah Ali Khamenei को सत्ता से हटाने की मांग को लेकर 20 प्रांतों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है।
यह आंदोलन पिछले 14 दिनों से जारी है और अब हिंसक रूप ले चुका है।
रियाल की गिरावट से भड़का गुस्सा
यह विरोध 29 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ, जब ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत में भारी गिरावट आई। सबसे पहले व्यापारियों ने तेहरान में प्रदर्शन किया।
बाद में Tehran University के छात्र भी आंदोलन में शामिल हो गए। धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरे ईरान में फैल गया।
110 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन
मिली जानकारी के अनुसार देश के 110 से अधिक शहरों में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हो रहे हैं। अब तक 400 से ज्यादा जगहों पर लोग सड़कों पर उतर चुके हैं।
हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई इलाकों में प्रशासन का नियंत्रण कमजोर पड़ गया है।
सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान
हिंसक प्रदर्शन के दौरान अस्पतालों में तोड़फोड़ की गई है। 26 बैंकों में लूट की घटनाएं सामने आई हैं।
प्रदर्शनकारियों ने 25 मस्जिदों में आग लगा दी और 10 सरकारी इमारतों को जला दिया। इसके अलावा 24 से अधिक अपार्टमेंट को नुकसान पहुंचा है।
दमकल और बसों को भी नहीं छोड़ा
आगजनी की घटनाओं में 48 दमकल वाहनों और 42 बसों को जला दिया गया है। कई सड़कों पर आग लगाकर रास्ते बंद कर दिए गए। कॉलेज और University बंद कर दी गई हैं और देश के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं रोक दी गई हैं।
झड़पों में सैकड़ों की मौत
सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में सिर्फ तेहरान में 217 लोगों की मौत की खबर है। सेना के 14 जवान भी मारे गए हैं। पुलिस ने अब तक करीब 2300 लोगों को हिरासत में लिया है।
कई बड़े शहरों में हिंसा
शुक्रवार रात को हालात और ज्यादा खराब हो गए। तेहरान के अलावा मशहद, कोम, इस्फ़हान, मशिरियेह, कजविन, बुशहर और वज्द जैसे शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए।
मेयर ने नुकसान की पुष्टि की
तेहरान के मेयर अलीरेज़ा ज़कानी ने सरकारी टीवी पर बताया कि शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि दो Medical Center और 26 बैंक लूटे गए हैं।
साथ ही 25 मस्जिदों को आग के हवाले किया गया है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की मिलिशिया बसीज के हेडक्वार्टर पर भी हमला हुआ है।
आर्थिक आंदोलन बना सत्ता विरोध
शुरुआत में यह आंदोलन महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा की गिरावट के खिलाफ था, लेकिन अब यह सीधे सत्ता और धार्मिक नेतृत्व के विरोध में बदल चुका है।

