Assam Elections: केरल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है। केरल की 140 सीटों, असम की 126 सीटों और पुडुचेरी की 30 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं।
केरल में लेफ्ट और असम में भारतीय जनता पार्टी सत्ता की हैट्रिक लगाने की कोशिश में है। वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों राज्यों में 10 साल के राजनीतिक वनवास को खत्म करने की कोशिश कर रही है। अब सबकी नजर मतदाताओं के फैसले पर टिकी है कि सत्ता किसके हाथ जाती है।
केरल में लेफ्ट बनाम कांग्रेस, बीजेपी बना रही त्रिकोणीय मुकाबला
केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच सीधा मुकाबला है। हालांकि बीजेपी इस चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही है।
पिनराई विजयन के नेतृत्व में लेफ्ट अपने गढ़ को बचाने की कोशिश में है। वहीं कांग्रेस 10 साल बाद सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
140 सीटों पर 883 उम्मीदवार मैदान में
केरल की 140 विधानसभा सीटों पर 883 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। करीब 2.71 करोड़ मतदाता इनकी किस्मत का फैसला करेंगे। इनमें 1.39 करोड़ महिला मतदाता और 1.32 करोड़ पुरुष मतदाता शामिल हैं।
2021 में पिनराई विजयन ने 40 साल से चले आ रहे सत्ता परिवर्तन के ट्रेंड को तोड़कर इतिहास रचा था। अब लेफ्ट सरकार विकास योजनाओं के दम पर लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने का दावा कर रही है।
वहीं कांग्रेस गांधी परिवार के सहारे वापसी की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है।
केरल में क्या है चुनावी समीकरण
केरल में 10 साल से लेफ्ट सरकार है। ऐसे में एंटी-इनकम्बेंसी का मुद्दा भी अहम माना जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि हालिया निकाय चुनाव और लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर वह वापसी कर सकती है।
वहीं बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ा है। हालांकि अब तक पार्टी सत्ता से दूर रही है। केरल में मुस्लिम और ईसाई वोटर भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
असम में बीजेपी की हैट्रिक या कांग्रेस की वापसी
असम में मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और कांग्रेस के बीच है। हालांकि बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही है।
हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी चुनाव लड़ रही है। वहीं कांग्रेस ने तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई को आगे कर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है।
126 सीटों पर 722 उम्मीदवार
असम की 126 सीटों पर 722 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। करीब 2.50 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे।
663 पुरुष और 59 महिला उम्मीदवार मैदान में हैं।
बीजेपी 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं कांग्रेस 99 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुकी है।
इसके अलावा एआईयूडीएफ, टीएमसी, लेफ्ट पार्टियां और कई क्षेत्रीय दल भी चुनावी मैदान में हैं।
परिसीमन के बाद पहली बार चुनाव
असम में परिसीमन के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं। परिसीमन के कारण मुस्लिम बहुल सीटों की संख्या 29 से घटकर 22 रह गई है।
इस बार महिला वोटर और चाय बागान मजदूरों को लुभाने की होड़ मची हुई है। माना जा रहा है कि चाय बागान मजदूर 36 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
ध्रुवीकरण और घुसपैठ बने बड़े मुद्दे
बीजेपी ध्रुवीकरण के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। वहीं कांग्रेस मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार और अल्पसंख्यकों के मुद्दे को उठा रही है।
असम में घुसपैठ का मुद्दा भी चुनाव में प्रमुख बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि अहोम समुदाय के वोट कई सीटों पर निर्णायक हो सकते हैं। इस बार विपक्षी दलों की एकजुटता से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
नतीजों पर टिकी सियासी नजर
केरल में लेफ्ट की हैट्रिक या कांग्रेस की वापसी। असम में बीजेपी की जीत या कांग्रेस का वनवास खत्म। इन दोनों सवालों का जवाब अब मतपेटियों में बंद है। चुनाव नतीजे तय करेंगे कि किस राज्य में किसकी सरकार बनेगी और किसका सियासी भविष्य मजबूत होगा।

