Iran and Israel war: 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस ऑपरेशन का नाम ‘रोरिंग लायन’ यानी दहाड़ता शेर रखा। वहीं इजरायली सेना ने इसे ‘शील्ड ऑफ जुडाह’ कहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई को ‘एपिक फ्यूरी’ नाम दिया। इससे पहले जून 2025 में इजरायल ने ईरान पर हुए हमले को ‘राइजिंग लायन’ कहा था।
आखिर शेर पर इतना जोर क्यों?
कई लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि इजरायल अपने सैन्य अभियानों के नाम में बार-बार शेर का जिक्र क्यों करता है। इसका जवाब यहूदी धर्म और बाइबिल की परंपराओं में छिपा है।
यहूदी संस्कृति में शेर को ताकत, बहादुरी और ईश्वर की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से शेर का प्रतीक इजरायल की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान में गहराई से जुड़ा हुआ है।
मध्य पूर्व में भी होते थे शेर
आज शेर ज्यादातर अफ्रीका में पाए जाते हैं, लेकिन इतिहास बताता है कि कभी मध्य पूर्व और भारत में भी शेर बड़ी संख्या में रहते थे।
पुरातत्व के अनुसार 9500 ईसा पूर्व से लेकर कांस्य और लौह युग तक पवित्र भूमि यानी आज के इजरायल, फिलिस्तीन और जॉर्डन के इलाके में एशियाई शेर मौजूद थे। जॉर्डन नदी की घाटी में शेरों की अच्छी खासी संख्या थी। बाद में क्रूसेड युद्धों के समय इनका लगभग सफाया हो गया।
बाइबिल में 150 से ज्यादा बार शेर का जिक्र
हिब्रू बाइबिल, जिसे ईसाई धर्म में ओल्ड टेस्टामेंट कहा जाता है, उसमें शेर का जिक्र 150 से ज्यादा बार मिलता है। कई जगह यह वास्तविक जानवर के रूप में आता है, तो कई जगह प्रतीक के तौर पर।
बाइबिल में शेर ताकत, गति और आक्रामकता का प्रतीक माना गया है। कई धार्मिक संदर्भों में ईश्वर की तुलना भी शेर से की जाती है, जो अपने लोगों की रक्षा करता है।
शेर का बच्चा’ और यहूदा की कहानी
बाइबिल में यहूदा, याकूब के 12 बेटों में से एक था। मरते समय याकूब ने यहूदा को अपना प्रमुख उत्तराधिकारी घोषित किया।
बाद में इसी वंश से यहूदा का राज्य बना। ‘ज्यूडिया’ और ‘यहूदी’ शब्द भी इसी नाम से निकले। समय के साथ शेर का प्रतीक यहूदा और पूरे यहूदी समुदाय की पहचान बन गया।
सैमसन और शेर की मशहूर कहानी
बाइबिल में सैमसन नाम का एक योद्धा भी मिलता है, जिसे अलौकिक ताकत वाला माना जाता था। कहानी के अनुसार एक बार अंगूर के बाग में जाते समय उस पर एक शेर ने हमला कर दिया।
सैमसन ने अपनी ताकत से उस शेर को नंगे हाथों से मार दिया। यह घटना उसकी बहादुरी का पहला बड़ा प्रमाण मानी जाती है। प्राचीन कथाओं में नायक का शेर से लड़ना शक्ति का प्रतीक माना जाता था।
राजा डेविड और ‘यहूदा का शेर’
राजा डेविड भी यहूदा के वंश से थे। कहा जाता है कि उन्होंने बचपन में ही शेर और भालू का सामना किया था। बाद में वही इजरायल के राजा बने और यरूशलेम को राजधानी बनाया। डेविड को अक्सर ‘यहूदा का शेर’ कहा जाता है। यह प्रतीक उनके साहस, ताकत और ईश्वर से मिलने वाली शक्ति को दर्शाता है।
आज भी इजरायल की पहचान में शामिल है शेर
इसी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की वजह से शेर आज भी इजरायल की सांस्कृतिक और सैन्य पहचान का अहम हिस्सा बना हुआ है। इसलिए इजरायल अपने कई सैन्य अभियानों के नाम में शेर के प्रतीक का इस्तेमाल करता है।

