Jharkhand TET: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 की नई नियमावली को लेकर विवाद शुरू हो गया है। इस बार नियमावली से भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को हटा दिया गया है। ये वही भाषाएं हैं, जो राज्य के कई हिस्सों में बड़ी संख्या में बोली जाती हैं।
पहले भी हुआ था विरोध
जब इस नियमावली का Draft जारी किया गया था, तब भी इन भाषाओं को हटाने पर जमकर विरोध हुआ था। मामला सड़क से लेकर सदन तक पहुंच गया था। उस समय सरकार ने यह कहकर मामला शांत कराया था कि यह सिर्फ प्रारूप है और अंतिम नियमावली में सुधार किया जाएगा। लेकिन अब जारी फाइनल नियमावली में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।
शिक्षक संगठनों में नाराजगी
नियमावली सामने आने के बाद शिक्षक संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। संगठनों ने इसे क्षेत्रीय भाषाओं के साथ अन्याय बताते हुए आंदोलन करने का Announcement कर दिया है। उनका कहना है कि स्थानीय भाषाओं को नजरअंदाज करना राज्य की सांस्कृतिक पहचान के खिलाफ है।
कई जिलों में बोली जाती हैं ये भाषाएं
झारखंड के पलामू प्रमंडल के कई जिलों में बड़ी संख्या में लोग भोजपुरी और मगही बोलते हैं। वहीं बोकारो, धनबाद और रांची जैसे शहरों में भी भोजपुरी भाषियों की अच्छी खासी आबादी है। इसके अलावा संथाल परगना समेत कई इलाकों में अंगिका बोलने वालों की संख्या भी कम नहीं है।
विवाद बढ़ने के आसार
ऐसे में इन भाषाओं को नियमावली से बाहर करने का फैसला आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। माना जा रहा है कि इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी विरोध तेज हो सकता है। अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है।

