Iran US War: अमेरिका द्वारा ईरानी तेल पर प्रतिबंध में ढील दिए जाने के बाद भारत ईरान से तेल खरीदने की तैयारी कर रहा था। इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की ओर आ रहा ईरानी कच्चे तेल से भरा एक जहाज अचानक बीच समंदर से चीन की ओर मुड़ गया। यह जहाज पिछले 7 सालों में ईरान से भारत के लिए आने वाली सबसे बड़ी तेल खेप लेकर आ रहा था। पीटीआई की रिपोर्ट में जहाज ट्रैकिंग फर्म केप्लर के हवाले से बताया गया है कि पिंग शुन नाम का अफ्रामैक्स जहाज पहले भारत की ओर बढ़ रहा था। लेकिन अब यह चीन के डोंगयिंग बंदरगाह की ओर जाने का संकेत दे रहा है।
भारत आने का दिया था संकेत, फिर अचानक यू-टर्न
रिपोर्ट के मुताबिक इस सप्ताह की शुरुआत में जहाज ने भारत के पश्चिमी तट पर स्थित वडीनार बंदरगाह पहुंचने का संकेत दिया था। लेकिन बाद में जहाज ने दक्षिण की ओर यू-टर्न ले लिया। हालांकि अभी यह अंतिम फैसला नहीं माना जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जहाज कभी भी फिर से अपना रास्ता बदल सकता है।
4 अप्रैल को भारत पहुंचने की थी उम्मीद
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार यह टैंकर ईरान के खार्ग द्वीप से करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर चला था। इसे गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंचना था।
उम्मीद थी कि लगभग एक महीने की यात्रा पूरी कर यह जहाज 4 अप्रैल तक भारत पहुंच जाएगा। लेकिन अब इसके रास्ता बदलने की खबर सामने आई है।
आखिर क्यों मुड़ा जहाज
अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि भारत की ओर आ रहा यह जहाज अचानक चीन की ओर क्यों मुड़ गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जहाज अभी भी अपना रास्ता बदल सकता है।
अमेरिका ने ईरानी तेल खरीदने के लिए एक महीने तक प्रतिबंधों में ढील दी है। ऐसे में तेल खरीद को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।
2019 से भारत ने बंद कर दी थी ईरानी तेल खरीद
भारत ने मई 2019 से ईरान से कच्चे तेल की खरीद बंद कर दी थी। उस समय अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण भारत ने ईरान से तेल आयात रोक दिया था।
अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समुद्र में मौजूद ईरानी मालवाहक जहाजों पर अस्थायी रूप से जुर्माना माफ कर दिया है। हालांकि भुगतान, माल ढुलाई और बीमा से जुड़े मुद्दों की वजह से लेन-देन अभी भी आसान नहीं है।
अमेरिका ने समुद्र में मौजूद ईरानी जहाजों से तेल खरीदने की अस्थायी मंजूरी दी है।
खार्ग द्वीप पर बड़े एक्शन की चेतावनी
ईरान का खार्ग द्वीप बेहद रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है। यहां से ईरान का लगभग 90 फीसदी तेल निर्यात मैनेज किया जाता है।
हाल ही में ट्रंप ने इस सुविधा की आलोचना की है और चेतावनी दी है कि अगर तनाव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बातचीत सफल नहीं होती, तो बड़ा एक्शन लिया जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने भारत, चीन और वैश्विक तेल बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है।

