सऊदी-कतर नहीं, UAE पर ईरान की नजर, अमेरिका को भी दी कड़ी चेतावनी

US Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। अब तक यह टकराव ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच सीमित नजर आ रहा था, लेकिन अब खाड़ी देशों पर भी सीधा खतरा मंडराने लगा है। खासकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को लेकर ईरान ने कड़ा रुख अपना लिया है।

UAE की भूमिका पर ईरान को शक, लगाया गंभीर आरोप

तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, ईरान को अब भरोसा हो गया है कि UAE इस जंग में सिर्फ मूक दर्शक नहीं है, बल्कि सक्रिय भूमिका निभा रहा है। आरोप है कि UAE ने अमेरिका और इजरायल को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी। साथ ही कुछ एयर फैसिलिटी भी ऑपरेशन के लिए उपलब्ध कराई गईं।

इसी वजह से ईरान ने अब अपनी रणनीति बदलने के संकेत दिए हैं। अब तक ईरान खाड़ी देशों को सीधे निशाना बनाने से बच रहा था और केवल अमेरिकी सैन्य ठिकानों या इंटेलिजेंस बेस को टारगेट कर रहा था। लेकिन अब साफ कर दिया गया है कि अगर हालात और बिगड़े तो यह संयम खत्म हो जाएगा।

ग्राउंड इनवेजन हुआ तो सीधे हमला करेगा ईरान

ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर उसके खिलाफ किसी भी तरह का ग्राउंड इनवेजन होता है, खासकर उसके किसी द्वीप या जमीन पर कब्जे की कोशिश की जाती है, तो वह उस देश को सीधा दुश्मन मानेगा जहां से हमला होगा। ऐसे में जवाब भी उसी स्तर पर दिया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने संकेत दिया है कि अगर UAE के जरिए कोई जमीनी हमला शुरू होता है तो जवाब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकारी संस्थान, आर्थिक ढांचा, निवेश परियोजनाएं और राज्य से जुड़े व्यावसायिक हित भी निशाने पर आ सकते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट के द्वीपों पर कब्जे की तैयारी?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद ईरानी द्वीपों — खार्ग और केशम — पर कब्जा करने की संभावना पर विचार कर रहा है। ऐसे ऑपरेशन के लिए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी बेस का इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि UAE की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

ईरान का मानना है कि हाल के हमलों में UAE की जमीन या इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया गया। यहां तक कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम के जरिए टारगेटिंग में मदद देने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि UAE की तरफ से इन आरोपों पर अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ रही सैन्य हलचल

इस बीच रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की तैयारी चल रही है। इससे संकेत मिल रहा है कि जंग का अगला चरण और ज्यादा आक्रामक हो सकता है।

ईरान ने फिलहाल अपने हमलों को सीमित रखा है। लेकिन उसने साफ कर दिया है कि अगर उसके खिलाफ ग्राउंड इनवेजन होती है तो हालात तेजी से बदल जाएंगे और संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है।

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