Middle East War: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर एक और बड़ी चेतावनी दी है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने संकेत दिया है कि तेहरान अब अपनी रणनीतिक घेराबंदी को स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से आगे बढ़ाकर बाब अल-मंदेब तक ले जा सकता है।
अगर ऐसा होता है तो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। गलिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई सवाल उठाए हैं, जिससे दुनिया भर के देशों और बड़ी कंपनियों की चिंता बढ़ गई है।
ईरान के सवालों से बढ़ी वैश्विक चिंता
ईरानी स्पीकर ने रणनीतिक अंदाज में पूछा कि वैश्विक तेल, एलएनजी, गेहूं, चावल और उर्वरक शिपमेंट का कितना हिस्सा बाब अल-मंदेब से होकर गुजरता है। कौन से देश और कंपनियां इस मार्ग पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं।
विशेषज्ञ इन सवालों को ईरान की संभावित रणनीति का संकेत मान रहे हैं। उनका मानना है कि ईरान इस अहम समुद्री मार्ग पर दबाव बनाकर वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
होर्मुज के बाद अब बाब अल-मंदेब पर नजर
ईरान पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य में शत्रुतापूर्ण जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव बना रहा है। अब बाब अल-मंदेब को निशाना बनाने का संकेत यह दिखाता है कि ईरान दुनिया के अहम समुद्री चोकपॉइंट्स पर पकड़ मजबूत करना चाहता है।
क्यों अहम है बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य
बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है। यही रास्ता स्वेज नहर के जरिए यूरोप और एशिया के बीच व्यापार का मुख्य मार्ग बनता है। इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल, गैस और जरूरी खाद्य सामग्री दुनिया भर में पहुंचती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस रास्ते में बाधा आती है तो ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। साथ ही खाद्य सुरक्षा को लेकर भी बड़ा संकट पैदा हो सकता है।
तेल ही नहीं, खाद्य आपूर्ति भी हो सकती है प्रभावित
यह कदम सिर्फ तेल और गैस की सप्लाई तक सीमित नहीं रहेगा। गेहूं, चावल और उर्वरक जैसी जरूरी चीजों की वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है। इससे कई देशों में महंगाई बढ़ने और खाद्य संकट की स्थिति बन सकती है।
वैश्विक दबाव बनाने की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब वैश्विक व्यापारिक हितों को प्रभावित कर बड़े देशों पर दबाव बनाने की रणनीति अपना सकता है। अगर बाब अल-मंदेब भी तनाव की चपेट में आता है तो दुनिया भर में आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है और वैश्विक बाजारों में हड़कंप मच सकता है।

