ट्रंप की बढ़ी टेंशन, ईरान युद्ध का असर अमेरिका पर भारी, पेट्रोल से डिलीवरी तक सब महंगा

US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब दुनिया भर के साथ-साथ खुद अमेरिका पर भी दिखने लगा है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से ग्लोबल मार्केट में हलचल मची हुई है और तेल-गैस संकट गहराता जा रहा है।

ईरान युद्ध के चलते महंगाई बढ़ने लगी है, जिससे अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई हैं। इसके साथ ही ई-कॉमर्स डिलीवरी प्लेटफॉर्म, एयरलाइंस और पोस्टल सर्विस तक महंगी होने की तैयारी कर रही हैं। इससे आम लोगों पर खर्च का बोझ बढ़ने की आशंका है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ती है और इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ता है।

अमेरिका में चौतरफा महंगाई की मार

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ युद्ध का असर अब अमेरिकियों की जेब पर पड़ने लगा है। Amazon ने अपनी ई-कॉमर्स डिलीवरी पर फ्यूल सरचार्ज लगाने की घोषणा की है। वहीं कई एयरलाइंस ने बढ़ती ईंधन कीमतों की भरपाई के लिए चेक-इन बैगेज फीस बढ़ा दी है।

अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों की बात करें तो शुक्रवार को औसत कीमत बढ़कर 4.09 डॉलर प्रति गैलन हो गई। यह युद्ध शुरू होने से पहले की कीमत से करीब 1 डॉलर प्रति गैलन ज्यादा है। अगस्त 2022 के बाद पेट्रोल की कीमत का यह सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है।

American Automobile Association के मुताबिक, अमेरिका में डीजल की कीमत में भी बड़ा उछाल आया है। एक साल पहले डीजल 3.64 डॉलर प्रति गैलन था, जो अब बढ़कर 5.53 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गया है।

ट्रांसपोर्ट महंगा, रोजमर्रा की चीजें भी होंगी महंगी

डीजल का इस्तेमाल खेती, कंस्ट्रक्शन और ट्रांसपोर्ट समेत कई उद्योगों में होता है। ऐसे में डीजल महंगा होने से जरूरी सामान की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ जाती है।

ताजा असर यह है कि Amazon ने 17 अप्रैल से थर्ड-पार्टी सेलर्स पर 3.5 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया है।

इसके अलावा United States Postal Service ने भी पैकेज और एक्सप्रेस मेल डिलीवरी पर 8 प्रतिशत अस्थायी फ्यूल सरचार्ज लगाने पर विचार किया है। यदि मंजूरी मिलती है, तो यह सरचार्ज 26 अप्रैल से लागू होगा और 17 जनवरी 2027 तक जारी रह सकता है।

सप्लाई चेन पर भी संकट की आशंका

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो अमेरिका की सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है। न्यूयॉर्क की एनालिस्ट Rachel Ziemba ने कहा कि अमेरिका इस स्थिति से बच नहीं पाएगा क्योंकि यह वैश्विक बाजार है और असर हर जगह दिखेगा।

वहीं Federal Reserve Bank of Chicago के चेयरमैन Austan Goolsbee ने कहा कि ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से दूसरी चीजों की कीमतें भी बढ़ेंगी। इसका असर धीरे-धीरे उपभोक्ताओं पर दिखाई देगा और लोगों को अचानक महंगाई का झटका लग सकता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के लोग पहले से ही महंगाई और जरूरी चीजों की उपलब्धता को लेकर चिंतित हैं। अब यह चिंता और बढ़ने की संभावना है।

एशिया से यूरोप तक असर, तेल संकट गहराया

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। करोड़ों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एशियाई देशों को सबसे पहले खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई में कमी का सामना करना पड़ा। कई देशों को राशनिंग सिस्टम और ऊर्जा बचत उपाय लागू करने पड़े।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि अप्रैल के मध्य तक यूरोप में भी तेल की कमी गंभीर रूप ले सकती है। इससे वैश्विक महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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