RU’s Poor Condition: झारखंड के विश्वविद्यालयों की स्थिति पहले से ही चिंता का विषय रही है, लेकिन रांची विश्वविद्यालय (RU) की मौजूदा हालत और भी गंभीर होती जा रही है। राज्य का यह प्रमुख और पुराना विश्वविद्यालय इन दिनों अपने सबसे खराब दौर से गुजरता नजर आ रहा है। प्रशासनिक तंत्र लगभग निष्क्रिय दिखाई दे रहा है, जिससे उच्च शिक्षा (Higher Education) की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और छात्रों से जुड़े कई अहम मुद्दे लंबित हैं।
सीनेट और सिंडिकेट की बैठकें लंबे समय से नहीं
विश्वविद्यालय में सीनेट और सिंडिकेट की बैठकें लंबे समय से आयोजित नहीं हुई हैं। ये दोनों निकाय विश्वविद्यालय के संचालन और नीतिगत फैसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। Senate को उच्च शिक्षा का सर्वोच्च सदन कहा जाता है, जिसमें जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद और छात्र प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसके बावजूद वर्षों से इसकी बैठक नहीं होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
UGC नियमों का नहीं हो रहा पालन
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के अनुसार Syndicate की बैठक हर महीने होनी चाहिए, लेकिन रांची विश्वविद्यालय में पिछले आठ महीनों से एक भी बैठक नहीं हुई है। इससे विश्वविद्यालय की निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, क्योंकि विभिन्न समितियों के फैसलों को अंतिम मंजूरी सिंडिकेट से ही मिलती है।
पूर्व कुलपतियों ने जताई चिंता
इस मुद्दे पर डॉ एसएन मुंडा (पूर्व कुलपति, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय) ने चिंता जताते हुए कहा कि सिंडिकेट की बैठक नहीं होना छात्रों और विश्वविद्यालय दोनों के हित में नुकसानदायक है।
वहीं डॉ फिरोज अहमद (पूर्व कुलपति, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय) ने भी इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण निकायों की बैठक नहीं होना किसी भी विश्वविद्यालय के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
प्रशासनिक ढिलाई से अटके फैसले
सिंडिकेट की बैठक नहीं होने से कई महत्वपूर्ण निर्णय लंबित पड़े हैं। लगातार बैठकों का टलना प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है। यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।

