Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हमले से जुड़े मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
Chief Justice Surya Kant, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि नौकरशाही का भरोसा कम हो रहा है और सरकारी कामकाज में राजनीति का असर बढ़ता दिख रहा है।
Supreme Court ने निर्देश दिया कि इस मामले में राज्य पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 26 आरोपियों से NIA पूछताछ करेगी, चाहे वे न्यायिक हिरासत में ही क्यों न हों।
अदालत ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नरियाला को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि घटना वाले दिन उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन नहीं उठाया, जो प्रशासन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। कोर्ट ने उन्हें मुख्य न्यायाधीश से माफी मांगने का निर्देश दिया।
Supreme Court ने अपने आदेश में कहा कि मालदा की घटना पहले से योजना बनाकर की गई थी। इस दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक घेरकर रखा गया।
जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को SIR प्रक्रिया के तहत 60 लाख से अधिक आपत्तियों की जांच के लिए लगाया गया था। ये आपत्तियां उन लोगों की थीं, जिनके नाम Voter List से हटा दिए गए थे।
गौरतलब है कि मालदा में SIR के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन धीरे-धीरे पूरे उत्तर बंगाल में फैल गया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई, जिसमें एक पुलिस वाहन चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े।
बताया जा रहा है कि सुजापुर इलाके में यह स्थिति और गंभीर हो गई थी, जहां SIR से जुड़े काम में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया था। इनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं।

