West Bengal Election: ममता बनर्जी के लिए 2026 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अब तक का सबसे मुश्किल मुकाबला माना जा रहा है। 2011 में लेफ्ट सरकार को हटाना चुनौतीपूर्ण था। 2021 का चुनाव भी कठिन था, जिसमें ममता बनर्जी को नंदीग्राम में हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस बार हालात पहले से ज्यादा मुश्किल बताए जा रहे हैं। इस बार चुनाव आयोग की सख्ती, SIR प्रक्रिया, प्रशासनिक फेरबदल और विपक्ष की नई रणनीति ने मुकाबले को और कठिन बना दिया है।
भवानीपुर से नामांकन, शुभेंदु अधिकारी से सीधी टक्कर
ममता बनर्जी 8 अप्रैल को भवानीपुर विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल करने जा रही हैं।
इस सीट पर उनका मुकाबला शुभेंदु अधिकारी से है।
पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में होगा।
पहला चरण — 23 अप्रैल।
दूसरा चरण — 29 अप्रैल।
मतगणना — 4 मई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव ममता बनर्जी की लोकप्रियता पर जनमत संग्रह जैसा बन गया है।
SIR प्रक्रिया से चुनावी समीकरण बदले
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है।
चुनाव आयोग के अनुसार
- 60 लाख से ज्यादा नाम जांच के दायरे में आए
- 32.68 लाख नाम दोबारा जोड़े गए
- 27.16 लाख नाम हटाए गए
कुल मिलाकर 90.66 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए, जो कुल मतदाताओं का करीब 11.85 प्रतिशत है।
सबसे ज्यादा असर सीमावर्ती जिलों में पड़ा है
- मालदा
- मुर्शिदाबाद
- उत्तर दिनाजपुर
- नदिया
- उत्तर 24 परगना
- दक्षिण 24 परगना
इन जिलों की कई सीटों पर पहले तृणमूल कांग्रेस मजबूत रही है।
चुनाव आयोग ने बदल दिया पूरा प्रशासन
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक बदलाव किए हैं।
- डीजीपी बदले गए
- मुख्य सचिव बदले गए
- जिला प्रशासन में फेरबदल
- पुलिस अधिकारियों का तबादला
बताया जा रहा है कि सिर्फ उन्हीं अधिकारियों को रखा गया है, जिन पर चुनाव आयोग को भरोसा है।
मालदा हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
- सुप्रीम कोर्ट ने मालदा हिंसा मामले में राज्य प्रशासन को फटकार लगाई है।
- सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी है।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह प्रशासन की गंभीर विफलता है।
RG कर केस भी बना चुनावी मुद्दा
भारतीय जनता पार्टी और सीपीएम ने आरजी कर मामले से जुड़े चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा है।
- रत्ना देबनाथ — बीजेपी उम्मीदवार
- कलातन दासगुप्ता — सीपीएम उम्मीदवार
- मीनाक्षी मुखर्जी — सीपीएम उम्मीदवार
बीजेपी ने महिला सुरक्षा को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है।
ममता बनर्जी ने लगाया साजिश का आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया के जरिए अल्पसंख्यक और मतुआ समुदाय को निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाना लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। ममता बनर्जी ने दावा किया कि उनकी लड़ाई की वजह से करीब 32 लाख लोगों के नाम दोबारा जोड़े गए।
ममता बनर्जी के लिए जनमत संग्रह जैसा चुनाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर तमाम चुनौतियों के बावजूद तृणमूल कांग्रेस चुनाव जीत जाती है, तो ममता बनर्जी की राजनीतिक ताकत और मजबूत मानी जाएगी।
इस चुनाव को ममता बनर्जी के नेतृत्व पर जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा है।
