होर्मुज में बिछी ईरानी माइन्स से कितना बड़ा खतरा? एक विस्फोट में डूब सकता है जहाज

Iran and US War: डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ऐलान किया है कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एंटी-माइन ऑपरेशन शुरू करेगा। यह इलाका दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। अमेरिका और इजरायल के बीच फरवरी के आखिर में शुरू हुए तनाव के बाद ईरान ने इस खाड़ी को जहाजों के लिए लगभग बंद कर दिया है। अब यहां समुद्र के भीतर बिछाई गई माइन्स पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन गई हैं।

छोटी नावों से बिछाई जा रही हैं माइन्स

ईरान ने बड़ी युद्धपोतों की बजाय छोटी नावों से माइन्स बिछाई हैं, क्योंकि उसके कई बड़े जहाज अमेरिकी और इजरायली हमलों में नष्ट हो चुके हैं। अभी यह साफ नहीं है कि कितनी माइन्स बिछाई गई हैं, लेकिन ईरान ने एक रास्ता खुला रखा है, जहां से टोल देकर कुछ जहाज गुजर सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान खुद भी अपनी बिछाई गई कई माइन्स का पूरा नक्शा नहीं ढूंढ पा रहा है, जिससे खतरा और बढ़ गया है।

ईरान के पास कौन-कौन सी माइन्स हैं

ईरान मुख्य रूप से दो तरह की सी-माइन्स का इस्तेमाल कर रहा है— महाम 3 और महाम 7। ये पुरानी माइन्स की तरह सिर्फ टकराने पर नहीं फटतीं, बल्कि इनमें मैग्नेटिक और एकॉस्टिक सेंसर लगे होते हैं। यानी जैसे ही कोई जहाज पास आता है, ये उसे महसूस कर लेती हैं और फिर विस्फोट कर देती हैं।

महाम 3 माइन कितनी घातक है

महाम 3 एक एंकर वाली माइन है, जिसका कुल वजन करीब 383 किलो है। इसमें लगभग 120 किलो विस्फोटक भरा होता है। यह 100 मीटर तक गहरे पानी में काम कर सकती है और बड़े जहाजों जैसे सुपरटैंकर, कार्गो शिप और डेस्ट्रॉयर को भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती है। पानी के अंदर होने वाला विस्फोट बेहद ताकतवर होता है, जिससे जहाज का ढांचा टूट सकता है और वह पूरी तरह बेकार हो सकता है।

महाम 7 उथले पानी में ज्यादा खतरनाक

महाम 7 एक बॉटम-रेस्टिंग माइन है, जिसका कुल वजन करीब 220 किलो है। यह खासतौर पर उथले पानी के लिए बनाई गई है। इसका आकार ऐसा होता है कि सोनार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाता। इसमें भी 100 से 150 किलो तक विस्फोटक होने की संभावना है। यह छोटे और मध्यम जहाजों जैसे पेट्रोल शिप, लैंडिंग क्राफ्ट और छोटे कार्गो जहाजों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

कुछ माइन्स से पूरा समुद्री रास्ता बंद

इन माइन्स की सबसे बड़ी ताकत यही है कि ये सस्ती होने के बावजूद बेहद असरदार हैं। सिर्फ कुछ माइन्स पूरे समुद्री रास्ते को बंद कर सकती हैं। कुछ माइन्स को इस तरह प्रोग्राम किया जाता है कि वे कई जहाज गुजरने के बाद फटें, जिससे खतरे का अंदाजा लगाना और मुश्किल हो जाता है।

अमेरिका इन्हें कैसे हटाएगा

माइन्स बिछाना आसान है, लेकिन उन्हें हटाना बहुत मुश्किल और खतरनाक काम होता है। अगर इंसानों वाले माइन्सवीपर जहाज भेजे जाएं, तो वे दुश्मन के हमलों का आसान निशाना बन सकते हैं। इसलिए अमेरिका बिना चालक वाले समुद्री माइन हंटिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर सकता है। इनमें नाइफफिश अंडरसी माइन हंटर, एमसीएम एंटी-माइन वेसल और MH-60S हेलीकॉप्टर से चलने वाला आर्चरफिश सिस्टम शामिल हैं। ये सिस्टम सोनार की मदद से माइन्स ढूंढते हैं और उन्हें नष्ट करते हैं।

अमेरिकी सैनिकों पर भी बड़ा खतरा

हालांकि ये अनक्रूड सिस्टम ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन इन्हें कंट्रोल करने के लिए अमेरिकी जहाजों और एयरक्राफ्ट को पास आना पड़ता है। अगर संघर्ष फिर बढ़ा, तो अमेरिकी सैनिक मिसाइल हमलों या ड्रोन स्वार्म का निशाना बन सकते हैं। यानी माइन्स हटाने की प्रक्रिया भी अपने आप में बेहद जोखिम भरी है।

अमेरिका ने शुरू कर दी तैयारी

11 अप्रैल को दो अमेरिकी डेस्ट्रॉयर— USS Frank E. Petersen और USS Michael Murphy— ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे माइन्स साफ करने की तैयारी बताया है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि ईरान इस पर कैसी प्रतिक्रिया देगा।

दुनिया की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर

दुनिया का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार पर निर्भर है और होर्मुज इसका सबसे अहम रास्ता है। ऐसे में यहां माइन्स बिछने से सिर्फ क्षेत्रीय तनाव नहीं बढ़ता, बल्कि तेल, गैस और व्यापार पर भी सीधा असर पड़ता है। यही वजह है कि होर्मुज में बढ़ता खतरा पूरी दुनिया के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है।

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