New Delhi : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इज़राइल बनाम ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में हाल ही में लागू दो सप्ताह के संघर्षविराम का दुनिया भर में सावधानीपूर्वक स्वागत किया जा रहा है।
रमेश के अनुसार, यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान के शीर्ष नेतृत्व की टारगेटेड किलिंग के बाद शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि यह घटनाक्रम पीएम मोदी की इज़रायल यात्रा के तुरंत बाद शुरू हुआ, जिससे भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने गाज़ा और वेस्ट बैंक में इज़रायल की कार्रवाई पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी।
पूरी दुनिया पश्चिम एशिया में एक तरफ US और इज़राइल और दूसरी तरफ ईरान के बीच चल रहे इस संघर्ष में लागू हुए दो सप्ताह के संघर्षविराम का सावधानीपूर्वक स्वागत करेगी।
यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान के शासन के शीर्ष नेतृत्व की टारगेटेड किलिंग के साथ शुरू हुआ था। यह घटनाएं प्रधानमंत्री मोदी…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) April 8, 2026
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि युद्धविराम कराने में पाकिस्तान की भूमिका, भारत की वर्तमान कूटनीति के लिए एक झटका है। उनका कहना है कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की नीति उतनी सफल नहीं रही, जितनी पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के समय दिखाई दी थी, खासकर मुंबई हमलों के बाद।
रमेश ने “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 10 मई 2025 को इस ऑपरेशन को अचानक क्यों रोका गया, इस पर सरकार ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इसकी घोषणा सबसे पहले अमेरिका की ओर से की गई थी, जिसे लेकर भी सवाल उठते हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भले ही राहत की भावना है, लेकिन सरकार की विदेश नीति और कूटनीतिक रणनीति पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

