Koderma : झारखंड के कोडरमा जिले के छतरबर वन्यजीव क्षेत्र में अवैध माइका खनन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे जंगल और वन्यजीवों के अस्तित्व पर गंभीर संकट पैदा हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार आरआईटी (रामगोविंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) से करीब दो किलोमीटर अंदर से शुरू होकर लगभग आठ किलोमीटर तक फैले जंगल में खनन माफियाओं ने 50 से अधिक छोटे-बड़े अवैध खदान बना लिए हैं। यह क्षेत्र वन्यजीव आश्रयणी के रूप में अधिसूचित है, जहां किसी भी तरह की गैर-वनीय गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है।
इसके बावजूद यहां दिन-रात खनन और विस्फोट किए जा रहे हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। लगातार हो रहे विस्फोट और जंगलों की कटाई से वन्यजीवों, खासकर हाथियों के लिए यह इलाका असुरक्षित होता जा रहा है। बताया जा रहा है कि जो क्षेत्र पहले जंगली हाथियों का स्थायी ठिकाना था, अब वे वहां से पलायन कर रहे हैं। हाथी अब कोडरमा और रजौली इलाके में पहुंचकर उत्पात मचा रहे हैं। हाल ही में 26 फरवरी को जयंती माइंस के पास विस्फोटक की चपेट में आने से हाथियों का झुंड भी बिखर गया था।
सूत्रों के मुताबिक, छतरबर से लेकर बिहार सीमा तक जयंती, बुढ़िया, लकरमंदवा, खैरा, तुमरईया, बंडा और ललकी जैसे कई खदानों के साथ-साथ दर्जनों नए अवैध खदान तैयार कर लिए गए हैं। इन खदानों से निकाले गए माइका को छतरबर, पुतो, बेकोबार, डुमरीडीहा रोड और मोरियावां स्थित गोदामों तक पहुंचाया जा रहा है। इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए झारखंड उच्च न्यायालय ने कोडरमा-रजौली मार्ग (एनएच-20) के एलाइनमेंट को भी वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बदलने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद अवैध खनन पर रोक नहीं लग पा रही है।

