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भुवनेश्वर में गुप्त ऑपरेशन, अवैध रूप से रह रहीं दो बांग्लादेशी महिलाएं हिरासत में

Covert Operation in Bhubaneswar : भुवनेश्वर में पुलिस ने एक अहम गुप्त अभियान (Secret Operation) के तहत दो बांग्लादेशी महिलाओं को हिरासत में लिया है।

यह कार्रवाई 8 और 9 जनवरी को की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन पूरी तरह खुफिया जानकारी पर आधारित था और बिना किसी शोर-शराबे के अंजाम दिया गया।

लखनऊ मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिला खास इनपुट

इस पूरे मामले की शुरुआत लखनऊ स्थित मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) से मिली विशिष्ट सूचना से हुई।

इनपुट में बताया गया था कि कुछ बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से भुवनेश्वर में रह रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय पुलिस को सतर्क किया गया।

महिला पुलिस स्टेशन की त्वरित कार्रवाई

खुफिया जानकारी मिलते ही भुवनेश्वर के महिला पुलिस स्टेशन की टीम ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। जांच और निगरानी के बाद दोनों महिलाओं को शहर के अलग-अलग इलाकों से पकड़ा गया।

गिरफ्तारी के समय किसी तरह का विरोध नहीं हुआ।

कोई वैध पासपोर्ट या वीजा नहीं

पुलिस जांच में यह साफ हुआ कि हिरासत में ली गई दोनों महिलाओं के पास भारत में रहने के लिए कोई Valid Passport या वीजा नहीं था।

इसके बावजूद वे लंबे समय से यहां रह रही थीं, जो भारतीय कानून का उल्लंघन है।

फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल

जांच के दौरान एक और गंभीर बात सामने आई। दोनों महिलाएं भारतीय नामों से बने फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर रही थीं।

इन नकली दस्तावेजों के जरिए वे भुवनेश्वर और ओडिशा के अन्य हिस्सों में अपनी पहचान छिपाकर रह रही थीं।

अन्य गलत गतिविधियों में शामिल होने की आशंका

सूत्रों के मुताबिक, ये महिलाएं कुछ अवैध और गलत गतिविधियों में भी शामिल थीं। हालांकि, रिपोर्ट में उनकी गतिविधियों का पूरा विवरण साझा नहीं किया गया है।

पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस पहलू पर गहराई से जांच कर रही हैं।

ओडिशा पुलिस को मिली एक और सफलता

यह कार्रवाई Odisha Police और खुफिया एजेंसियों के लगातार प्रयासों का नतीजा मानी जा रही है। राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के लिए ऐसे अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।

स्टेट होल्डिंग सेंटर भेजा गया

कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों महिलाओं को कटक जिले के अथगढ़ स्थित स्टेट होल्डिंग सेंटर, अथगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई संबंधित एजेंसियों द्वारा की जाएगी।

I-PAC पर ED रेड मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, ममता सरकार ने दायर किया कैविएट

ED raid on I-PAC Reaches Supreme Court : कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC पर हुई ईडी रेड का मामला अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच गया है।

इस पूरे मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है।

कैविएट के जरिए ममता सरकार ने यह मांग की है कि अगर प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस केस में सुप्रीम कोर्ट में कोई याचिका दायर करती है, तो तृणमूल कांग्रेस (TMC) का पक्ष सुने बिना अदालत कोई आदेश न दे।

क्या है कैविएट और क्यों किया गया दायर

Caveat एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत कोई पक्ष पहले ही अदालत को बता देता है कि यदि उसके खिलाफ कोई मामला आए, तो उसकी बात सुने बिना कोई फैसला न किया जाए।

ममता सरकार ने यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया है, क्योंकि इस मामले में ED पहले से ही आक्रामक रुख अपनाए हुए है।

ED ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

जैसा कि पहले से अनुमान लगाया जा रहा था, ED ने इस मामले को लेकर अब Supreme Court का रुख किया है। इससे पहले ईडी ने Kolkata High Court में याचिका दायर की थी, जिस पर 14 जनवरी को सुनवाई होनी है।

सुनवाई में देरी को देखते हुए ED ने अब अनुच्छेद-32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

हाई कोर्ट में पहले से आमने-सामने हैं ED और TMC

इस I-PAC रेड मामले में ED और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही पहले से कोलकाता हाई कोर्ट में एक-दूसरे के खिलाफ याचिकाएं दाखिल कर चुके हैं।

ED ने अपनी याचिका में बंगाल पुलिस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया है।

वहीं TMC ने कोर्ट से ईडी की कार्रवाई को गैर-कानूनी घोषित करने और पार्टी के गोपनीय दस्तावेज तुरंत वापस करने की मांग की है।

ED के खिलाफ सड़कों पर उतरीं ममता बनर्जी

इस मामले को लेकर ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने जादवपुर से हाजरा क्रॉसिंग तक मार्च निकाला।

ममता ने आरोप लगाया कि ED भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक औजार के रूप में काम कर रही है।

I-PAC दफ्तर पर ED की रेड से मचा सियासी घमासान, मोदी सरकार पर बरसीं ममता बनर्जी

“मैंने कोई गैर-कानूनी काम नहीं किया”

विरोध मार्च के बाद हुई रैली में Mamata Banerjee ने कहा कि उन्होंने रेड वाली जगह पर तृणमूल कांग्रेस की Chairperson के रूप में दखल दिया था, न कि मुख्यमंत्री के तौर पर।

उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने कुछ भी गैर-कानूनी नहीं किया है और ED पर पार्टी की अंदरूनी रणनीति चुराने का आरोप भी लगाया।

मनरेगा में बदलाव के खिलाफ कांग्रेस का 45 दिन का आंदोलन शुरू

Congress Begins 45-day Agitation Against Changes in MNREGA : मनरेगा योजना में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किए गए बदलावों के विरोध में कांग्रेस ने शनिवार से 45 दिनों तक चलने वाला देशव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया है।

इस आंदोलन को गैर-BJP शासित राज्यों का भी समर्थन मिल रहा है। कर्नाटक, तेलंगाना और पंजाब पहले ही नए जी राम जी कानून के खिलाफ अपने-अपने विधानसभा (Assembly) में प्रस्ताव पारित कर चुके हैं।

वहीं तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल ने भी खुलकर इस फैसले का विरोध किया है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह बदलाव राज्यों और ग्रामीण मजदूरों दोनों के हितों के खिलाफ है।

गैर-भाजपा शासित राज्यों की आपत्तियां

इन राज्यों का मुख्य विरोध इस बात को लेकर है कि मनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम क्यों हटाया गया। विपक्ष का कहना है कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि योजना की मूल भावना से भी छेड़छाड़ है।

उनका आरोप है कि नई योजना को मांग आधारित की जगह आपूर्ति आधारित ढांचे में लागू किया जा रहा है, जिससे गरीब ग्रामीणों के रोजगार अधिकार कमजोर होंगे।

राज्यों का यह भी कहना है कि नए कानून से उन पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और केंद्र सरकार का पूरा नियंत्रण हो जाएगा।

विपक्षी दलों के अनुसार, यह कदम राज्यों की स्वायत्तता पर सीधा हमला है। कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि अगर कर्नाटक में जी राम जी कानून लागू होता है, तो अगले पांच सालों में राज्य सरकार को करीब 20,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) इस कानून को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने योजना का नाम बदलने को बंगाल और बंगालियों की अस्मिता का अपमान बताया है।

पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने और योजना को केंद्र के नियंत्रण में देने से राज्य के खजाने पर भारी दबाव पड़ेगा।

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अब योजनाओं का खर्च राज्यों पर डाल रही है और नाम बदलकर पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले रही है।

वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने भी जी राम जी बिल का विरोध करते हुए इसे महात्मा गांधी का अपमान बताया और कहा कि इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

SBI  रिसर्च का अलग दावा

इस बीच SBI रिसर्च ने एक अलग रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर वीबी जी राम जी एक्ट लागू होता है तो राज्यों को करीब 17,000 करोड़ रुपये का फायदा हो सकता है। यह अनुमान पिछले सात वर्षों के मनरेगा आवंटन की तुलना के आधार पर लगाया गया है।

रिसर्च में कहा गया है कि नए ढांचे में केंद्र और राज्यों के बीच धन का बंटवारा मानक आकलन के आधार पर होगा, जिससे समानता और कार्यक्षमता बढ़ेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक यह मॉडल राज्यों को वित्तीय सहायता देने के साथ-साथ रोजगार की गारंटी को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, आज रात ओंकार मंत्र और ड्रोन शो

PM Modi arrives to attend Somnath Swabhiman Parv: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 10 जनवरी की शाम गुजरात के सोमनाथ पहुंचे।

वे यहां सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (Somnath Swabhiman Parv) के तहत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने आए हैं।

प्रधानमंत्री रात करीब आठ बजे सोमनाथ मंदिर में होने वाले ओंकार मंत्र के दिव्य उच्चारण कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद मंदिर परिसर में आयोजित ड्रोन शो भी देखेंगे।

7 से 11 जनवरी तक चल रहा है सोमनाथ स्वाभिमान पर्व

सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) में ओंकार मंत्र का जप केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारतीय सनातन परंपरा में ध्यान, साधना और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक भी माना जाता है।

इसी भावना के साथ बुधवार, 7 जनवरी से रविवार, 11 जनवरी तक सोमनाथ में कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ पहुंचने से एक दिन पहले शुक्रवार, 9 जनवरी को Social media platform x(पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की थी।

इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हमारी आध्यात्मिक परंपरा का एक मजबूत प्रतीक है, जिसे पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

11 जनवरी को शौर्य यात्रा और सार्वजनिक कार्यक्रम

प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि शनिवार रात करीब आठ बजे उन्हें सोमनाथ मंदिर में ओंकार मंत्र के दिव्य उच्चारण में भाग लेने का सौभाग्य मिलेगा।

इसके अलावा उन्होंने लिखा कि अगले दिन, यानी 11 जनवरी की सुबह लगभग 9:45 बजे, वे भारत माता के वीर सपूतों को समर्पित शौर्य यात्रा में शामिल होंगे।

इसके बाद वे मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे और फिर एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे।

हजार साल पुराने बलिदान की स्मृति में आयोजन

प्रधानमंत्री कार्यालय प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से शुक्रवार को जारी बयान में कहा गया कि यह पर्व उन भारतीय नागरिकों की याद में आयोजित किया जा रहा है, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।

यह आयोजन महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए हमले के एक हजार वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया जा रहा है। यह पर्व इतिहास, आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक बनकर उभरा है।

धरतीपुत्र जस्टिस एल.पी.एन. शाहदेव की पुण्यतिथि पर रांची में श्रद्धांजलि सभा

Justice LPN Shahdeo Death Anniversary : झारखंड अलग राज्य आंदोलन के प्रमुख योद्धा और धरतीपुत्र जस्टिस एल.पी.एन. शाहदेव की पुण्यतिथि (Death Anniversary) के अवसर पर शनिवार को रांची के शाहदेव चौक स्थित उनकी प्रतिमा के सामने श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में BJP के कई वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल हुए और जस्टिस शाहदेव के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया।

नेताओं ने माल्यार्पण कर किया नमन

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में BJP प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जस्टिस शाहदेव के चित्र पर माल्यार्पण किया।

इस मौके पर BJP के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष व सांसद आदित्य साहू, पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ सहित कई भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

आंदोलन को नई दिशा देने वाले नेता थे जस्टिस शाहदेव

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) ने कहा कि जस्टिस एल.पी.एन. शाहदेव ने अपना पूरा जीवन झारखंड की मिट्टी और यहां के लोगों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने अलग झारखंड राज्य की मांग को एक मजबूत दिशा दी और आदिवासी तथा मूलवासी समाज के लिए इसे एक बड़े जनआंदोलन का रूप दिया।

मरांडी ने बताया कि न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्ति के बाद भी जस्टिस शाहदेव आंदोलन में पूरी ताकत से जुटे रहे और गिरफ्तारी देने से भी पीछे नहीं हटे।

युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं उनका संघर्ष

Babulal Marandi ने आगे कहा कि जस्टिस शाहदेव का जीवन संघर्ष, त्याग और सिद्धांतों का उदाहरण है।

झारखंड के युवाओं को उनके विचारों और संघर्षों से सीख लेनी चाहिए, ताकि वे राज्य निर्माण के उद्देश्य और उसकी मूल भावना को समझ सकें।

वहीं, BJP के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष व सांसद आदित्य साहू ने कहा कि जस्टिस शाहदेव एक विकसित और आत्मनिर्भर झारखंड का सपना देखते थे।

उनका योगदान केवल आंदोलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने झारखंडी पहचान और अस्मिता को मजबूत किया।

ऐतिहासिक योगदान को किया गया याद

कार्यक्रम के दौरान मौजूद अन्य नेताओं ने भी जस्टिस एल.पी.एन. शाहदेव के संघर्षों और योगदान को याद किया।

उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य के निर्माण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है और आने वाली पीढ़ियां उन्हें हमेशा सम्मान और स्मरण के साथ याद रखेंगी।

छात्रवृत्ति को लेकर सड़कों पर उतरे छात्र, NSUI ने निकाला जन आक्रोश मार्च

NSUI Organised a Public Protest March : झारखंड में छात्र-छात्राओं को पिछले लगभग दो वर्षों से छात्रवृत्ति नहीं मिलने का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है।

पढ़ाई के साथ आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे छात्र अब खुलकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। इसी कड़ी में छात्र संगठन NSUI ने केंद्र सरकार के खिलाफ जन आक्रोश मार्च का आयोजन किया।

मोरहाबादी मैदान से लोक भवन तक मार्च

यह जन आक्रोश मार्च मोरहाबादी मैदान (Morabadi Ground) से शुरू होकर लोक भवन तक पहुंचा। मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए।

छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और जल्द छात्रवृत्ति जारी करने की मांग की। पूरे रास्ते छात्रों में गुस्सा और नाराजगी साफ नजर आई।

केंद्र सरकार पर फंड नहीं देने का आरोप

छात्र संगठनों का कहना है कि छात्रवृत्ति की राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देती हैं। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा करीब 60 प्रतिशत होता है।

आरोप है कि केंद्र सरकार यह राशि झारखंड को नहीं भेज रही है। इसी वजह से राज्य सरकार भी छात्रवृत्ति की रकम छात्रों को नहीं दे पा रही है।

राजनीतिक भेदभाव का लगाया आरोप

NSUI नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

उनका कहना है कि राज्य में केंद्र की पार्टी की सरकार नहीं है, इसलिए Fund रोककर भेदभाव किया जा रहा है। इस मार्च में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और विधायक बंधु तिर्की भी शामिल हुए।

नेताओं ने छात्रों का बढ़ाया हौसला

केशव महतो कमलेश ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य को उसका हक का पैसा नहीं दे रही है। इसी कारण वे छात्रों के साथ लोक भवन के घेराव में शामिल हुए हैं।

वहीं, बंधु तिर्की ने कहा कि वर्ष 2022 से छात्रों को छात्रवृत्ति (Scholarship) नहीं मिली है। जब तक केंद्र से राशि नहीं आती, तब तक ट्रेजरी कोड के अनुसार राज्य सरकार भी भुगतान नहीं कर सकती।

राज्यपाल से मिलने की तैयारी

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के साथ NSUI के प्रतिनिधि राज्यपाल के सामने अपनी बात रखने वाले हैं। नेताओं का कहना है कि SC-ST छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है और इसे उजागर किया जाएगा।

इससे पहले अल्पसंख्यक मंत्री चमरा लिंडा ने समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। ऐसे में छात्र संगठनों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।

गणतंत्र दिवस 2026 की तैयारियां शुरू, उपायुक्त ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

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Preparations for Republic Day 2026 Begin : रांची में गणतंत्र दिवस समारोह–2026 को भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

इस संबंध में 10 जनवरी 2026 को उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

यह बैठक समाहरणालय स्थित सभागार में हुई, जिसमें जिले के सभी वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

मोरहाबादी मैदान की तैयारियों पर विशेष ध्यान

बैठक के दौरान उपायुक्त ने मोरहाबादी मैदान (Morabadi Ground) में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की।

उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि तय समय-सीमा के भीतर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी तरह की परेशानी न हो।

समारोह स्थल पर होंगी ये सुविधाएं

उपायुक्त ने बताया कि आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए समारोह स्थल पर दोनों ओर वाटरप्रूफ पंडाल लगाए जाएंगे।

इसके साथ ही कुर्सियां, दर्शक गैलरी, मंच, साउंड सिस्टम, बैरिकेडिंग और मैदान को समतल करने का काम भी किया जाएगा। VVIP के बैठने की अलग व्यवस्था होगी।

परेड में भाग लेने वाले कैडेटों के लिए अल्पाहार और मंच व मैदान में पुष्प सज्जा की भी व्यवस्था की जाएगी।

बिजली, पानी और सफाई की पूरी तैयारी

समारोह के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए जनरेटर लगाए जाएंगे। साथ ही पेयजल, अस्थायी शौचालय और वीआईपी टॉयलेट की उचित व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।

नगर निगम को समारोह स्थल और उसके आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

सुरक्षा, ट्रैफिक और स्वास्थ्य सेवाएं

पुलिस विभाग को पार्किंग, Traffic नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल कैंप और एंबुलेंस की व्यवस्था रहेगी।

इसके अलावा अग्निशमन विभाग को भी पूरी तरह सतर्क रहने को कहा गया है।

झांकियां बनेंगी समारोह का आकर्षण

इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य आकर्षण विभिन्न विभागों की झांकियां होंगी। इन झांकियों के माध्यम से झारखंड सरकार की योजनाओं, नीतियों, राज्य की कला, संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

12 विभागों की झांकियां होंगी शामिल

इस बार कुल 12 विभागों की झांकियां प्रदर्शित की जाएंगी।

इनमें वन पर्यावरण, ग्रामीण विकास, गृह, स्कूली शिक्षा, कृषि, सूचना एवं जनसंपर्क, पर्यटन व संस्कृति, स्वास्थ्य, खादी ग्रामोद्योग, परिवहन, महिला एवं बाल विकास और उच्च तकनीकी शिक्षा विभाग शामिल हैं।

परेड और रिहर्सल का कार्यक्रम

गणतंत्र दिवस समारोह में करीब 15 प्लाटून और 3 बैंड भाग लेंगे। परेड का अभ्यास 18 जनवरी से 23 जनवरी तक किया जाएगा, जबकि 24 जनवरी को अंतिम रिहर्सल होगी।

अंत में उपायुक्त ने सभी अधिकारियों से आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा, ताकि रांची में गणतंत्र दिवस समारोह 2026 को सफल, सुरक्षित और यादगार बनाया जा सके।

रांची में अंतर्राज्यीय बाइक चोर गिरोह का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार, 8 बाइक बरामद

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Inter-State Bike Theft Gang Busted in Ranchi: राजधानी रांची में Police ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बाइक चोरी और अवैध गतिविधियों में शामिल एक अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है।

यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई।

सूचना मिलते ही जगन्नाथपुर थाना (Jagannathpur Police Station) पुलिस ने तेजी दिखाते हुए छापेमारी की और तीन शातिर बाइक चोरों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर कुल 8 चोरी की मोटरसाइकिलें भी बरामद की हैं।

गुप्त सूचना पर त्वरित कार्रवाई

पुलिस को जानकारी मिली थी कि सागतालाब के पास कुछ लोग इकट्ठा होकर सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे हैं और वहां अड्डेबाजी चल रही है।

इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए Jagannathpur Police की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस को देखते ही वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन टीम ने घेराबंदी कर तीनों संदिग्धों को पकड़ लिया।

नशे के अड्डे से गिरफ्तारी

पकड़े गए तीनों युवक मौके पर नशापान करते हुए पाए गए। जब पुलिस ने उनसे सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने बाइक चोरी में शामिल होने की बात कबूल कर ली।

पूछताछ के दौरान उनकी निशानदेही पर अलग-अलग जगहों से कुल 8 चोरी की Motorcyclesबरामद की गईं। बरामद की गई बाइकें रांची और आसपास के इलाकों से चोरी की गई थीं।

ये हैं गिरफ्तार आरोपी

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राज उर्फ विजय सिंह, संतोष उर्फ करण ठाकुर और विनित उर्फ प्रिंस पासवान के रूप में हुई है। तीनों लंबे समय से बाइक चोरी और अवैध गतिविधियों में संलिप्त बताए जा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह चोरी की बाइकों को दूसरे राज्यों में बेचने की भी योजना बनाता था।

आगे की कार्रवाई जारी

पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।

पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों को भी पकड़ लिया जाएगा।

इस कार्रवाई से रांची शहर में Bike चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

UAPA हटाया गया, अब IPC/BNS में चलेगा मामला – सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

UAPA Removed: रांची से जुड़े एक अहम आपराधिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत ने विनोद पांडे के खिलाफ UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत मुकदमा चलाने की राज्य सरकार की अनुमति को रद्द कर दिया है।

Supreme Court के आदेश के बाद अब ATS रांची द्वारा दर्ज केस नंबर 1/2022 में आरोपियों के खिलाफ सिर्फ IPC/BNS की धाराओं में ही सुनवाई होगी।

विनोद पांडे की अपील पर आया फैसला

यह फैसला विनोद पांडे की ओर से दायर अपील याचिका पर सुनवाई के बाद आया।

Supreme Court ने साफ कहा कि UAPA जैसे सख्त कानून के तहत मुकदमा चलाने के लिए ठोस और नए तथ्यों का होना जरूरी है, जो इस मामले में नहीं पाए गए।

ATS रांची ने क्या लगाया था आरोप

गौरतलब है कि एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (ATS) रांची ने अमन श्रीवास्तव, उसके परिवार और गैंग के खिलाफ केस दर्ज किया था।

इस मामले में यह आरोप लगाया गया था कि विनोद पांडे, अमन श्रीवास्तव गैंग (Aman Srivastava Gang) का सदस्य है और वह रंगदारी वसूलने व लोगों में दहशत फैलाने का काम करता है।

छापेमारी में भारी रकम की बरामदगी

ATS की छापेमारी के दौरान विनोद पांडे के पास से 5.42 लाख रुपये और सिद्धार्थ साहू के पास से 28.55 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे।

इसी केस में अमन श्रीवास्तव समेत कुल 19 लोगों के खिलाफ UAPA के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इन सभी को UAPA से राहत मिली है।

तीन बार भेजा गया था UAPA का प्रस्ताव

जानकारी के अनुसार, उपायुक्त की ओर से विनोद पांडे और अन्य आरोपियों पर UAPA लगाने के लिए राज्य सरकार को तीन बार प्रस्ताव भेजा गया था।

पहले दो प्रस्तावों को सरकार ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उनमें पर्याप्त और ठोस तथ्य नहीं हैं।

तीसरे प्रस्ताव पर उठे सवाल

तीसरी बार भी जब प्रस्ताव भेजा गया, उसमें कोई नया या मजबूत तथ्य नहीं जोड़ा गया था।

इसके बावजूद राज्य सरकार ने UAPA की धारा 16, 17, 18, 20 और 21 के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी। इसी आदेश को विनोद पांडे ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने की।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि तीसरी बार भेजे गए प्रस्ताव में क्या कोई नया तथ्य था। सरकार के वकील ने माना कि ऐसा कोई नया तथ्य नहीं था।

अंतिम फैसला क्या रहा

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद Supreme Court ने कहा कि बिना नए और ठोस आधार के UAPA लगाने की अनुमति देना कानूनन सही नहीं है।

इसलिए राज्य सरकार का आदेश रद्द किया जाता है। अब इस केस में आरोपियों पर सिर्फ IPC/BNS के तहत ही मुकदमा चलेगा।

सोशल मीडिया बना झारखंड के अपराधियों का नया हथियार, पुलिस को भी मिल रही मदद

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New Weapon of Criminals in Jharkhand : झारखंड में आपराधिक घटनाओं (Criminal Incidents) के तरीके में एक नया और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है।

अब अपराधी किसी वारदात को अंजाम देने के बाद चुप नहीं रहते, बल्कि तुरंत Social Media पर उसकी ज़िम्मेदारी लेने लगते हैं।

इससे वे लोगों में डर और दहशत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसी कारण कई बार पुलिस के लिए जांच आसान भी हो जा रही है।

सोशल मीडिया पर कबूलनामा बना नया ट्रेंड

हाल के दिनों में देखा गया है कि गोलीबारी या अन्य संगीन घटनाओं के बाद अपराधी फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर पर्चा, बयान या पोस्ट डालकर साफ तौर पर कहते हैं कि घटना उन्होंने या उनके गिरोह ने की है। इससे आम लोगों में डर का माहौल बनता है और अपराधियों का नाम तेजी से फैलता है।

हाल की घटनाएं जिनमें ली गई ज़िम्मेदारी

इस नए ट्रेंड के कई उदाहरण सामने आए हैं।

9 जनवरी, चतरा: राजधर Siding के पास हुई गोलीबारी की ज़िम्मेदारी राहुल सिंह गिरोह ने ली।

6 जनवरी, रामगढ़ (कुजू): कोयला व्यवसायी डब्बू सिंह के घर पर फायरिंग की ज़िम्मेदारी राहुल दुबे गैंग ने पर्चा छोड़कर ली।

3 जनवरी, रामगढ़: ओवर ब्रिज निर्माण कार्य के ऑफिस में हुई गोलीबारी का दावा भी राहुल सिंह गिरोह ने किया।

30 दिसंबर 2025, हजारीबाग (उरीमारी): फायरिंग की ज़िम्मेदारी राहुल दुबे गैंग ने ली।

24 दिसंबर 2025, सयाल उरीमारी: इस गोलीकांड की जिम्मेदारी भी राहुल दुबे गैंग ने ही ली।

अमन साव से शुरू हुआ डर फैलाने का तरीका

झारखंड में Social Media के ज़रिए अपराध फैलाने की शुरुआत अमन साव (अब मृत) ने की थी। वह फेसबुक पर हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें डालता था और घटनाओं की ज़िम्मेदारी लेता था।

इससे उसका नाम तेजी से फैला और उसने अपना आपराधिक नेटवर्क खड़ा किया। अब प्रिंस खान, राहुल दुबे और राहुल सिंह जैसे अपराधी उसी रास्ते पर चल रहे हैं।

पुलिस के लिए फायदेमंद भी, चुनौती भी

सोशल मीडिया पर अपराध स्वीकार करना पुलिस के लिए दोहरी स्थिति पैदा कर रहा है। एक तरफ, जिम्मेदारी लेने से जांच की दिशा साफ हो जाती है और अपराधियों तक जल्दी पहुंचा जा सकता है। इसी वजह से कई मामलों में गिरफ्तारी भी तेज़ हुई है।

दूसरी तरफ, खुलेआम हथियार (Weapon) दिखाना और अपराध का दावा करना कानून-व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा भावना के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।

ऐसे में पुलिस और प्रशासन के सामने इस Trend पर रोक लगाने की बड़ी जिम्मेदारी है।