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झारखंड में क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम होगा और मजबूत, 4.63 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर

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Jharkhand’s Criminal Justice System to be Strengthened: झारखंड सरकार ने राज्य की आपराधिक न्याय वितरण प्रणाली को और बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है।

सरकार ने इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 को लागू करने के लिए 4.63 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि को मंजूरी दी है।

यह राशि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत की गई है। इस फैसले से राज्य में कानून-व्यवस्था से जुड़े कामों में तेजी और पारदर्शिता आने की उम्मीद है।

आधुनिक तकनीक से होगा सिस्टम का विकास

स्वीकृत की गई यह राशि मुख्य रूप से परियोजना के लिए जरूरी Hardware उपकरणों की खरीद में खर्च की जाएगी।

इन उपकरणों की मदद से पुलिस, न्यायालय और अन्य संबंधित विभाग आधुनिक तकनीक से जुड़ सकेंगे। सरकार का मानना है कि तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग से कामकाज अधिक आसान और प्रभावी हो सकेगा।

पांच प्रमुख स्तंभों के बीच बनेगा मजबूत तालमेल

इस पहल का मुख्य उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े पांच अहम स्तंभों—पुलिस, फॉरेंसिक लैब, न्यायालय, लोक अभियोजक और जेल—के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

अभी इन विभागों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में कई बार दिक्कतें आती हैं, जिन्हें इस नई व्यवस्था के जरिए दूर किया जाएगा।

सुरक्षित डेटा साझा करने की मिलेगी सुविधा

ICJS 2.0 के लागू होने से सभी संबंधित एजेंसियां एक सुरक्षित Digital Platform के माध्यम से जरूरी आंकड़ों को आपस में साझा कर सकेंगी।

इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि गलतियों की संभावना भी कम होगी। साथ ही राज्य और देश के संसाधनों का सही और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

न्याय प्रक्रिया होगी तेज और प्रभावी

सरकार का लक्ष्य है कि इस नई व्यवस्था के जरिए जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को तेज किया जाए।

इससे आम लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा और आपराधिक मामलों के निपटारे में भी सुधार होगा। यह कदम झारखंड को एक आधुनिक और तकनीक-सक्षम राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रांची में रियल एस्टेट की आड़ में काले धन का खेल उजागर

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Black Money Racket : राजधानी के रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। डॉ. नंद कुमार बेड़ा के हालिया बयानों ने जेल में बंद निलंबित IAS अधिकारी Vinay Chaubey और Real Estate कारोबारी शिपिज त्रिवेदी के बीच कथित गठजोड़ को उजागर किया है।

यह मामला सिर्फ घूस या भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि काले धन को सफेद करने की एक सुनियोजित व्यवस्था की ओर इशारा करता है।

रियल एस्टेट बना काले धन को छिपाने का जरिया

डॉ. नंद कुमार बेड़ा के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में बेनामी संपत्ति बनाने का एक खास तरीका अपनाया जाता था।

जमीन या फ्लैट किसी और के नाम पर खरीदे जाते थे, लेकिन असली नियंत्रण Syndicate से जुड़े लोगों के पास ही रहता था। कागजों में मालिक कोई और होता था, जबकि असली मालिक हमेशा पर्दे के पीछे रहता था।

कम कीमत दिखाकर रजिस्ट्री, कैश में होता था खेल

खुलासे में यह भी सामने आया कि रजिस्ट्री के समय संपत्ति की कीमत जानबूझकर बाजार मूल्य से काफी कम दिखाई जाती थी। बाकी रकम नकद में दी जाती थी।

इससे एक ओर सरकार को राजस्व का नुकसान होता था, वहीं दूसरी ओर काले धन को खपाने का रास्ता साफ हो जाता था।

तीसरे खाते में भुगतान, ताकि सबूत न मिले

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि भुगतान उस व्यक्ति के खाते में नहीं किया जाता था, जिसके नाम पर संपत्ति होती थी। पैसा किसी तीसरे व्यक्ति के खाते में भेजा जाता था, ताकि लेनदेन का कोई साफ ट्रेल न बचे और जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके।

25 लाख नकद और इमारत में निवेश का खुलासा

डॉ. बेड़ा ने यह भी स्वीकार किया कि शिपिज त्रिवेदी ने उन्हें सीधे 25 लाख रुपये नकद दिए थे। यह लेनदेन बिना किसी बैंक रिकॉर्ड या चेक के हुआ था।

यही राशि M/s Tarasan Properties & Developers की इमारत के निर्माण में लगाई गई। इस तरह अवैध नकदी को निर्माण कार्य में लगाकर उसे निवेश का रूप दे दिया गया।

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जांच के घेरे में बड़े नाम

इस पूरे मामले ने रांची के Real Estate Sector पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि शिपिज त्रिवेदी इस नेटवर्क की अहम कड़ी थे, जबकि विनय चौबे जैसे प्रभावशाली लोग इसके लाभार्थी।

अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि सरकारी पद और रसूख का इस्तेमाल कर कितनी ऐसी संपत्तियां बनाई गईं, जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मिली बड़ी राहत, झारखंड सरकार ने दी 22.86 लाख की मदद

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Surrendered Naxalites Get Major Relief: झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति (Surrender and Rehabilitation Policy) का असर साफ दिखाई दे रहा है।

इसी नीति से प्रेरित होकर और पुलिस के लगातार दबाव के कारण लातेहार जिले में कुल 11 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। अब इन सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को झारखंड सरकार की ओर से कुल 22.86 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।

इस संबंध में गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग (Disaster Management Department) ने आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया है।

पुनर्वास के लिए दी गई आर्थिक सहायता

जानकारी के अनुसार, ये सभी नक्सली लातेहार पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुके हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में कुख्यात नक्सली लवलेश गंझू का नाम भी शामिल है।

लवलेश गंझू को सबसे अधिक 6 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। सरकार की ओर से दी गई यह राशि पुनर्वास अनुदान, पहले से घोषित इनाम, हथियार जमा करने के बदले नकद राशि, मकान किराया और बच्चों की शिक्षा से जुड़े खर्चों के लिए दी गई है।

इसका उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वालों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें नई जिंदगी शुरू करने में मदद करना है।

किस नक्सली को कितनी राशि मिली

सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार, अखिलेश यादव को 5.75 लाख रुपये दिए गए हैं। वहीं मोजिंदर गंझु को 2 लाख रुपये, ब्रह्मदेव गंझु को 1.32 लाख रुपये और रघुनाथ सिंह को 1.28 लाख रुपये की सहायता मिली है। अनिल उरांव को भी 1.28 लाख रुपये दिए गए हैं।

इसके अलावा संजय प्रजापति को 1.21 लाख रुपये, बैजनाथ सिंह, दशरथ उरांव, सतेंद्र उरांव और मोहन परहिया को 1-1 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई है।

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लातेहार बना आत्मसमर्पण में सबसे आगे

यह भी उल्लेखनीय है कि साल 2025 में पूरे झारखंड में सबसे अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण लातेहार जिले में किया है।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में लातेहार (Latehar) में कुल 23 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जो यह दिखाता है कि सरकार की नीति और पुलिस की कार्रवाई असरदार साबित हो रही है।

सरकार का मानना है कि आने वाले समय में और भी नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाएंगे।

धनबाद रिंग रोड मुआवजा घोटाला, ACB की बड़ी कार्रवाई 17 आरोपी गिरफ्तार

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Dhanbad Ring Road Compensation Scam: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) रांची ने धनबाद रिंग रोड निर्माण से जुड़े भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले (Acquisition Compensation Scam) में बड़ी कार्रवाई की है।

इस मामले में ACB ने पूर्व जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सहित कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार लोगों में राजस्व विभाग के अधिकारी, बिचौलिये और एक अधिवक्ता भी शामिल हैं। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच के बाद की गई है।

क्या है पूरा मामला

यह घोटाला धनबाद में राज्य सरकार द्वारा रिंग रोड निर्माण के लिए की गई जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया से जुड़ा है।

आरोप है कि कुछ अधिकारियों और बिचौलियों ने मिलकर साजिश रची और फर्जी दावों के जरिए मुआवजा वितरण में भारी अनियमितताएं कीं। इसका उद्देश्य असली रैयतों के हक की मुआवजा राशि हड़पना और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाना था।

पुराने कांड से जुड़ा है मामला

इस संबंध में ACB ने धनबाद प्रमंडल के निगरानी थाना कांड संख्या 32/16 (दिनांक 21 अप्रैल 2016) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। यह केस तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी धनबाद और अन्य अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हुआ था।

यह मामला ACB धनबाद प्रमंडल में दर्ज दो अन्य संबंधित कांड संख्या 30/16 और 31/16 से भी जुड़ा हुआ है। गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपी इन मामलों में भी नामजद या अप्राथमिकी अभियुक्त हैं।

किन-किन लोगों की हुई गिरफ्तारी

गिरफ्तार आरोपियों में उदय कांत पाठक (तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी, धनबाद), मिथलेश कुमार (तत्कालीन कानूनगो), सुमेश्वर शर्मा, अनुपमा कुमारी उर्फ अनुपम कुमारी (सहायक लिपिक), शंकर प्रसाद दुबे, आलोक बरियार उर्फ जैकी लाला, सुशील प्रसाद (अधिवक्ता), विशाल कुमार (तत्कालीन अंचल अधिकारी, धनबाद), रविन्द्र कुमार, कुमारी रत्नाकर उर्फ रत्नाकर देवी, दिलीप गोप, बप्पी राय चौधरी उर्फ गोपी राय चौधरी, रामकृपाल गोस्वामी (तत्कालीन चेयरमैन, लखियाबाद-तेतुलिया पैक्स), अशोक कुमार महथा, उमेश महतो, अनिल कुमार उर्फ अनिल सिन्हा और काली प्रसाद सिंह शामिल हैं।

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जांच अभी जारी

ACB अधिकारियों के अनुसार, यह मामला काफी गंभीर है और इसमें सरकारी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये के मुआवजे (Compensation) की हेराफेरी की गई।

एजेंसी का कहना है कि आगे की जांच में और भी खुलासे हो सकते हैं। गिरफ्तार सभी आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए न्यायालय में पेश किया जा रहा है।

बेतिया में घरेलू हिंसा का बड़ा मामला, घर से मिला अवैध हथियार

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Major Case of Domestic Violence in Bettiah : बेतिया जिले से घरेलू हिंसा और अवैध हथियार (illegal Weapons) रखने का एक गंभीर मामला सामने आया है।

एक महिला की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसके पति को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी ली, जहां बिस्तर के नीचे से एक देसी कट्टा बरामद किया गया।

आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

डायल 112 पर पत्नी ने मांगी मदद

यह घटना मुफस्सिल थाना (Mufussil Police Station) क्षेत्र के महनागनी गांव की है। यहां रहने वाली सुनीता देवी ने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस से मदद मांगी।

महिला ने बताया कि उसका पति रमेश पासवान आए दिन उसके साथ मारपीट करता है। उसने यह भी जानकारी दी कि उसके पति ने घर में अवैध हथियार छिपा कर रखा है।

हथियार की मौजूदगी के कारण महिला हमेशा डर के माहौल में रह रही थी और किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी रहती थी।

सूचना मिलते ही पुलिस ने की छापेमारी

महिला की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मुफस्सिल थाना पुलिस ने तुरंत सदर SDPO विवेक दीप को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस की एक विशेष टीम बनाई गई। टीम ने आरोपी के घर पर छापेमारी (Raid) की।

तलाशी के दौरान महिला द्वारा बताए गए स्थान पर, यानी बिस्तर के नीचे से गोल्डन रंग का देसी कट्टा बरामद किया गया।

आरोपी को मौके से किया गया गिरफ्तार

पुलिस ने मौके से ही आरोपी रमेश पासवान को गिरफ्तार कर लिया। वह स्वर्गीय शंकर पासवान का पुत्र है।

पूछताछ के दौरान आरोपी हथियार रखने से जुड़ा कोई वैध लाइसेंस या सही जवाब नहीं दे सका। इसके बाद उसे थाने लाया गया और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।

पीड़िता ने बताई अपनी पीड़ा

सुनीता देवी ने पुलिस को बताया कि उसका पति लंबे समय से उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता आ रहा था।

घरेलू विवाद के दौरान कई बार स्थिति इतनी बिगड़ जाती थी कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस होने लगता था। घर में हथियार होने की जानकारी से उसका डर और बढ़ गया, इसलिए उसने पुलिस से सहायता लेने का फैसला किया।

पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई

मुफस्सिल थानाध्यक्ष सम्राट सिंह ने बताया कि पत्नी की सूचना पर तुरंत कार्रवाई की गई।

तलाशी में अवैध देसी कट्टा बरामद हुआ है और आरोपी के पास कोई लाइसेंस नहीं पाया गया। आरोपी के खिलाफ Arms X के तहत मामला दर्ज किया गया है।

साथ ही घरेलू हिंसा के आरोपों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि हथियार कहां से लाया गया और क्या आरोपी किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल रहा है।

सीतामढ़ी के स्कूलों में नई व्यवस्था, पढ़ाई के साथ अब सुरक्षा और स्वच्छता की जिम्मेदारी भी शिक्षकों पर

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New system in Sitamarhi Schools : Sitamarhi जिले के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा, अनुशासन और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

जिला शिक्षा विभाग (Education Department) ने मध्याह्न भोजन के बाद स्कूल परिसर में भटकते कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए नई व्यवस्था लागू की है।

इसके तहत शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिल सके।

मध्याह्न भोजन के बाद कड़ी निगरानी का निर्देश

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना-सह-मध्याह्न भोजन योजना) मनीष कुमार ने बताया कि अब किसी भी स्कूल में भोजन के बाद एक भी दाना खुला नहीं छोड़ा जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि कुत्तों को जूठा खिलाने की आदत पर पूरी तरह रोक लगेगी। शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे मध्याह्न भोजन के बाद स्कूल परिसर में भटकते कुत्तों की आवाजाही पर नजर रखें।

उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता विभाग (Sanitation Department) की पहली प्राथमिकता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लागू हुई नई SOP

Supreme Court of India के आदेश के आलोक में नई मानक कार्यप्रणाली (SOP) जारी की गई है।

इसके अनुसार प्रधानाध्यापक और शिक्षक अब शैक्षणिक कार्यों के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था भी संभालेंगे। खासतौर पर भोजन के बाद स्कूल परिसर में किसी भी तरह की गंदगी या अव्यवस्था नहीं रहने दी जाएगी।

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15–20 मिनट में अनिवार्य सफाई

नई SOP के तहत यह तय किया गया है कि भोजन समाप्त होने के 15 से 20 मिनट के भीतर कक्षा, बरामदा, भोजनालय, हाथ धोने की जगह और रसोई क्षेत्र की पूरी तरह सफाई कराई जाएगी।

खुले में कचरा या जूठा छोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इससे स्कूल का वातावरण साफ रहेगा और बीमारियों का खतरा भी कम होगा।

कुत्तों को भोजन देना पूरी तरह प्रतिबंधित

DPO ने बताया कि स्कूल परिसर में भटकते कुत्तों को खाना देना अब पूरी तरह मना है। इसके लिए स्कूल के प्रवेश द्वार पर चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य किया गया है।

साथ ही मध्याह्न भोजन किचन के चारों ओर जाली या दरवाजे लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कुत्ते किसी भी स्थिति में रसोई तक न पहुंच सकें।

शिक्षा विभाग (Education Department) का मानना है कि इन कदमों से स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता दोनों सुनिश्चित होंगी।

मोदी–ट्रंप फोन कॉल न होने से अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील, अमेरिकी वाणिज्य सचिव का बड़ा खुलासा

US Commerce Secretary’s big Revelation: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित Trade Deal को लेकर अमेरिका के वाणिज्य सचिव Howard Latnik ने अहम बयान दिया है।

उन्होंने कहा कि यह समझौता किसी नीतिगत मतभेद के कारण नहीं रुका, बल्कि इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे फोन पर बात नहीं की।

उनके अनुसार, यदि यह फोन कॉल हो जाती, तो भारत-अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप दिया जा सकता था।

नीतियों की नहीं, संपर्क की कमी बनी वजह

Howard Latnik ने एक Interview में बताया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर लगभग सभी शर्तें तय हो चुकी थीं।

उन्होंने साफ कहा कि डील के रुकने की वजह किसी तरह की नीतिगत असहमति नहीं थी। दोनों देश व्यापारिक मुद्दों पर सहमत थे और समझौता बस अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा था।

“बस एक फोन कॉल की जरूरत थी”

लटनिक के मुताबिक, इस ट्रेड डील को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति Trump से फोन पर बात करनी थी। उन्होंने कहा, “यह ट्रंप की डील थी। बस एक फोन कॉल की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इस बातचीत को लेकर असहज महसूस कर रहे थे और यही वजह रही कि फोन कॉल नहीं हो सकी।

अन्य देशों से पहले भारत से डील की उम्मीद

अमेरिकी वाणिज्य सचिव ने बताया कि अमेरिका ने Indonesia, Philippines और वियतनाम जैसे देशों के साथ ट्रेड डील कर ली है। पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि भारत के साथ समझौता इन देशों से भी पहले हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

ट्रंप की नाराजगी और टैरिफ का असर

लटनिक के बयान के बाद यह बात सामने आई है कि फोन कॉल न होने से राष्ट्रपति ट्रंप नाराज हो गए।

जानकारों का मानना है कि इससे उनका अहं आहत हुआ और इसका खामियाजा भारत को भारी टैरिफ के रूप में भुगतना पड़ा।

फिलहाल भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया है और ट्रंप आगे और ज्यादा टैरिफ लगाने की बात भी कह चुके हैं।

2030 तक 500 अरब डॉलर का था लक्ष्य

लटनिक ने कहा कि जिन शर्तों पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील लगभग तय थी, अब अमेरिका उनसे पीछे हट चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह डील हो जाती, तो भारत को टैरिफ में बड़ी राहत मिलती।

इस प्रस्तावित समझौते के तहत 2030 तक भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया था। फिलहाल दोनों देशों के बीच करीब 191 अरब डॉलर का व्यापार होता है।

कोलकाता में ED रेड के बाद सियासी घमासान, TMC और केंद्र आमने-सामने

Political turmoil in Kolkata after ED raid : कोलकाता में गुरुवार को Political Consultancy और Election Management Company I-PAC के कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) द्वारा की गई रेड के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।

इस कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने इसे केंद्र की राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।

दिल्ली में प्रदर्शन, सांसदों को हिरासत में लिया गया

इस घटना के बाद शुक्रवार को दिल्ली में TMC सांसदों ने गृह मंत्री Amit Shah के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सांसदों को वहां से हटा कर हिरासत में ले लिया।

इस कदम के बाद सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है। TMC नेताओं का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष को डराने की कोशिश की जा रही है।

हाईकोर्ट में आमने-सामने ED और TMC

इस पूरे मामले को लेकर ED और TMC दोनों ने Calcutta High Court में एक-दूसरे के खिलाफ याचिकाएं दाखिल की हैं। ED ने अपनी याचिका में बंगाल पुलिस और मुख्यमंत्री पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया है।

वहीं TMC ने अदालत से ED की कार्रवाई को गैर-कानूनी घोषित करने और पार्टी से जब्त किए गए सभी गोपनीय दस्तावेज तुरंत लौटाने की मांग की है।

आज सुनवाई से इनकार, 14 जनवरी को होगी सुनवाई

सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश Justice Sujay Pal ने ED की उस मांग पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें आज ही अर्जेंट सुनवाई की अपील की गई थी।

राज्य सरकार की ओर से वकील अर्का नाग और ED की ओर से वकील धीरज त्रिवेदी ने बताया कि इस संबंध में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को ईमेल भी भेजा गया था।

बाद में दोनों पक्षों के साथ बैठक कर यह तय किया गया कि मामले की सुनवाई अब 14 जनवरी को ही होगी।

कोर्टरूम में भीड़, अफरा-तफरी का माहौल

आज जब कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी थी, तब कोर्टरूम में भारी भीड़ जमा हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

स्थिति को संभालने के लिए जस्टिस Justice Shubhra Ghosh ने केस से जुड़े लोगों को छोड़कर बाकी सभी से बाहर जाने की अपील की। लेकिन अनुरोध के बावजूद भीड़ कम नहीं हुई और तनाव बढ़ता गया।

हालात बिगड़ते देख जज बिना सुनवाई किए कोर्टरूम छोड़कर चली गईं। इसके बाद High Court ने मामले की सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए टाल दी।

ईरान में भड़के विरोध प्रदर्शन, रेजा पहलवी का अमेरिका दौरा चर्चा में, ट्रंप–खामेनेई के तीखे बयान

Trump-Khamenei Sharp Statements : ईरान में बीते कई दिनों से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

इसी बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस Reza Pahlavi को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, वे अगले सप्ताह अमेरिका जा सकते हैं और वहां अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के Florida स्थित निजी आवास Mar-a-Lago का दौरा कर सकते हैं।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस दौरान उनकी ट्रंप से मुलाकात होगी या नहीं।

जेरूसलम प्रेयर ब्रेकफास्ट में शामिल हो सकते हैं रेजा पहलवी

Media Reports के अनुसार, रेजा पहलवी मार-ए-लागो में आयोजित Jerusalem Prayer Breakfast कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं। यह दौरा ऐसे समय पर प्रस्तावित है जब ईरान में इस्लामिक शासन के खिलाफ आंदोलन तेज हो रहा है।

इसी कारण इस यात्रा को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है और पूरी दुनिया की नजर इस पर टिकी हुई है।

ट्रंप का खुला समर्थन, ईरानी शासन को फिर दी कड़ी चेतावनी

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान में सड़कों पर उतर आए लोगों का समर्थन किया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर ईरान की सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।

Trump ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में कड़ा जवाब दिया जाएगा। इससे पहले भी वे ईरानी नेतृत्व को चेतावनी दे चुके हैं।

ईरान की राजधानी Tehran सहित कई प्रांतीय शहरों में हालात बिगड़े हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भीड़ और तनाव का माहौल साफ दिखाई दे रहा है।

एक छोटी सी आदत, जो स्मार्टफोन की बैटरी और परफॉर्मेंस दोनों को पहुंचा सकती है नुकसान

प्रदर्शनों को विदेशी साजिश बताकर खामेनेई ने समर्थकों से एकजुट रहने की अपील

इन घटनाओं के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei ने देश को संबोधित किया। उन्होंने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि घमंड में रहने वाले शासकों का अंत निश्चित होता है।

उन्होंने फिरौन, निमरूद, रजा शाह और मोहम्मद रजा शाह का उदाहरण देते हुए कहा कि ट्रंप का भी पतन होगा।

खामेनेई ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग विदेशी नेताओं को खुश करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि islamic Republic किसी दबाव में नहीं झुकेगा और अपने समर्थकों से एकजुट रहने की अपील की।

ED रेड के बाद सियासी टकराव तेज, ममता के नेतृत्व में कोलकाता में विरोध मार्च

Mamata Led Protest March in Kolkata: चुनावी रणनीति से जुड़ी संस्था I-PAC के चीफ प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी (Raid) के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। गुरुवार को हुई इस कार्रवाई के बाद कई बड़े घटनाक्रम सामने आए।

शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के आवास के बाहर प्रदर्शन किया।

वहीं, कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई फिलहाल टल गई।

ED और TMC आमने-सामने, कोर्ट में याचिकाएं

इस पूरे मामले में ED और TMC दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। ED ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि बंगाल पुलिस और मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने जांच में रुकावट डाली।

दूसरी ओर, TMC ने कोर्ट से ED की कार्रवाई को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग की है। पार्टी ने यह भी कहा है कि उसके सभी गोपनीय दस्तावेज तुरंत वापस किए जाएं।

ममता बनर्जी के नेतृत्व में कोलकाता में मार्च

शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में कोलकाता में I-PAC कार्यालय पर ED की छापेमारी के विरोध में बड़ा मार्च निकाला गया।

इस मार्च में TMC के वरिष्ठ नेता, मंत्री, सांसद, विधायक और बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए। मार्च की शुरुआत 8B बस स्टैंड इलाके से हुई और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए।

“राजनीतिक बदले की भावना से हो रही कार्रवाई” – ममता

मार्च के दौरान ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बदले की भावना से केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे हमलों की आदत हो चुकी है। ममता ने यह भी कहा कि गुरुवार का दिन उनके लिए “पुनर्जन्म” जैसा था और उन्होंने जो किया, वह सही था।

गौरतलब है कि गुरुवार को ED की रेड के दौरान ममता मौके पर पहुंची थीं और कुछ कागजात अपने साथ ले गई थीं। इसी बात को लेकर ED ने Calcutta High Court में याचिका दायर की है।

गोपनीय दस्तावेजों को लेकर ED पर आरोप

ममता बनर्जी ने ED पर यह भी आरोप लगाया कि एजेंसी पार्टी के अंदरूनी दस्तावेज, Hard Disk और संगठन से जुड़ा गोपनीय डेटा जब्त करना चाहती थी, जिनका किसी वित्तीय जांच से कोई संबंध नहीं था।

दिल्ली प्रदर्शन पर भी जताई नाराजगी

इससे पहले दिल्ली में गृह मंत्रालय के बाहर TMC सांसदों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को लेकर ममता ने अमित शाह पर निशाना साधा था।

उन्होंने इसे शर्मनाक, अस्वीकार्य और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। कुल मिलाकर, ED रेड के बाद केंद्र और राज्य के बीच टकराव और गहरा गया है।