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गोंडा में राष्ट्र कथा का भव्य समापन, 100 गाड़ियों के काफिले संग पहुंचे बृजभूषण सिंह

Grand finale of Rashtra Katha in Gonda: BJP के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह ने अपने 69वें जन्मदिन के अवसर पर गोंडा (Gonda) में आयोजित राष्ट्र कथा महोत्सव में भव्य उपस्थिति दर्ज कराई.

यह राष्ट्र कथा 1 जनवरी से शुरू होकर 8 जनवरी, गुरुवार को संपन्न हुई. कार्यक्रम का उद्घाटन 42 महंतों ने किया था. समापन के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समर्थक और अतिथि मौजूद रहे.

100 गाड़ियों का काफिला, खुली कार में दिखे बृजभूषण सिंह

अपने जन्मदिन पर बृजभूषण सिंह 100 गाड़ियों के काफिले के साथ गोंडा स्थित नंदिनी निकेतन पहुंचे. वे खुली कार में हाथ हिलाते हुए यात्रा करते नजर आए. रास्ते भर जगह-जगह उनका भव्य स्वागत किया गया.

इस दौरान बुलडोजर से उन पर पुष्प वर्षा की गई, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही.

नंदिनी निकेतन (Nandini Niketan) पहुंचने के बाद उन्होंने नंदिनी मंदिर की परिक्रमा की. इसके बाद गौमाता का आशीर्वाद लेने के लिए दंडवत प्रणाम किया और भगवान का प्रसाद ग्रहण किया. धार्मिक रीति-रिवाजों के बाद वे सीधे राष्ट्र कथा के मंच पर पहुंचे.

मंच से बयान और बधाइयों की लंबी कतार

राष्ट्र कथा के मंच पर पहुंचने के बाद बृजभूषण सिंह ने ऐसा बयान दिया, जिसने सभी को चौंका दिया. उन्होंने कहा कि मंच पर केवल साधु-संत रहेंगे और अगर भगवान भी आएं तो उन्हें भी रोक दिया जाए. उनके इस कथन की पूरे कार्यक्रम में चर्चा होती रही.

इसी दौरान हरियाणा से आए एक भाई-बहन ने उन्हें जन्मदिन के उपहार के रूप में Jacket भेंट की, जिसे मंच पर ही पहनाया गया. अयोध्या से लगभग 2000 आचार्य और बड़ी संख्या में स्कूल के लड़के-लड़कियां भी उन्हें जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे.

5 लाख लोगों के लिए भंडारा, यूपी-बिहार के नेता शामिल

बृजभूषण सिंह के जन्मदिन के मौके पर करीब 5 लाख लोगों के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई. राष्ट्र कथा महोत्सव के मंच के पास लगभग 15 बीघा क्षेत्र में विशाल खाने का पंडाल बनाया गया था.

इस राष्ट्र कथा में अब तक बाहुबली धनंजय, ब्रजेश सिंह और भोजपुरी स्टार पवन सिंह (Bhojpuri star Pawan Singh) भी शामिल हो चुके हैं. अंतिम दिन उत्तर प्रदेश और बिहार के कई राजनेताओं ने कार्यक्रम में शिरकत की.

झारखंड हाईकोर्ट का सख्त कदम, सोशल मीडिया टिप्पणी पर अवमानना कार्यवाही शुरू

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Jharkhand High Court takes Strict Action: झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने हाल ही में एक अहम फैसला लेते हुए प्रमोद सिंह नाम के व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है.

यह आदेश अदालत की एकल पीठ के न्यायाधीश जस्टिस अरुण कुमार राय ने पारित किया है.

अदालत ने कहा है कि प्रमोद सिंह के कृत्य केवल Court के आदेशों की अनदेखी नहीं हैं, बल्कि इससे न्यायिक कामकाज में सीधा हस्तक्षेप हुआ है और न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंची है.

अदालत ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

हाईकोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर माना है कि प्रमोद सिंह का व्यवहार आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है. आमतौर पर ऐसी कार्यवाही तब की जाती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर अदालत का अपमान करता है या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करता है.

इसी आधार पर कोर्ट ने प्रमोद सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. Notice में उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना कानून के तहत सख्त कार्रवाई क्यों न की जाए.

सोशल मीडिया वीडियो बने विवाद की वजह

जानकारी के अनुसार, रामगढ़ जिले के रहने वाले प्रमोद सिंह पिछले कुछ समय से Social Media पर लगातार वीडियो पोस्ट कर रहे थे.

इन वीडियो में वे न्यायिक प्रक्रिया पर कठोर और आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे थे. उनकी इन टिप्पणियों को लेकर समाज के कई वर्गों में नाराजगी भी देखी गई.

अदालत ने खुद लिया संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वयं इस पर संज्ञान लिया. कोर्ट का मानना है कि इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियां न केवल लोगों में भ्रम पैदा कर सकती हैं, बल्कि न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करती हैं.

इसी कारण अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए अवमानना की प्रक्रिया शुरू की है.

न्यायालय की गरिमा बनाए रखने पर जोर

इस पूरे मामले में High Court ने साफ संकेत दिया है कि न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता.

अदालत का कहना है कि कानून का पालन सभी के लिए जरूरी है, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई सोशल मीडिया पर सक्रिय व्यक्ति.

रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका सख्त, भारत पर 500% टैरिफ का खतरा

India Faces the Threat of 500% Tariffs: वेनेजुएला के बाद अब अमेरिका की नजर भारत, चीन और ब्राजील पर टिकी हुई है।

इसकी वजह अमेरिका में एक ऐसा प्रस्तावित विधेयक है, जिसे पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है।

इस विधेयक के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक भारी Tariff लगाने का प्रावधान किया गया है।

संसद में वोटिंग बाकी, लेकिन संकेत कड़े

फिलहाल यह विधेयक कानून नहीं बना है। इसे अभी अमेरिकी संसद (US Parliament) की मंजूरी मिलना बाकी है। खबरों के मुताबिक अगले सप्ताह इस पर संसद में मतदान हो सकता है।

हालांकि, जिस तरह से इसे समर्थन मिल रहा है, उससे संबंधित देशों की चिंता बढ़ गई है।

भारत के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है

अगर यह विधेयक कानून बनता है, तो इसका सबसे बड़ा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी ज्यादा Tax दर के बाद भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में टिके रहना लगभग असंभव हो जाएगा।

यह इसलिए भी गंभीर है क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार माना जाता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी अमेरिकी रणनीति

जानकारों के अनुसार, 500 प्रतिशत टैरिफ का यह प्रस्ताव Russia-Ukraine War के बीच अमेरिका की सख्त नीति का हिस्सा है। अमेरिका चाहता है कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जाए, ताकि उसकी युद्ध क्षमता कमजोर हो सके।

लिंडसे ग्राहम का आरोप

अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने साफ शब्दों में कहा है कि जो देश रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध नीति को आर्थिक मदद दे रहे हैं।

भारत पर पहले से ही टैरिफ

बताया जा रहा है कि भारत पर फिलहाल लगभग 50 प्रतिशत तक Tariff लागू है। अब अमेरिका इसे सीधे बढ़ाकर 500 प्रतिशत करने पर विचार कर रहा है।

सोशल मीडिया पर बयान

सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उस विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिस पर वे लंबे समय से काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर पड़ सकता है।

I-PAC दफ्तर पर ED की रेड से मचा सियासी घमासान, मोदी सरकार पर बरसीं ममता बनर्जी

Mamata Banerjee Slams Modi Government : गुरुवार को Enforcement Directorate (ED) की दिल्ली टीम ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी यानी Indian Political Action Committee (I-PAC) के कोलकाता स्थित कार्यालय में छापेमारी की।

इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताया।

रेड की खबर मिलते ही I-PAC ऑफिस पहुंचीं ममता

जैसे ही छापेमारी (Raid) की सूचना मिली, ममता बनर्जी खुद I-PAC के कार्यालय पहुंच गईं।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियां उनकी पार्टी Trinamool Congress (TMC) से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज चुरा रही हैं। ममता ने कहा कि यह कार्रवाई लोकतंत्र के खिलाफ है और विपक्षी दलों को डराने की कोशिश है।

अमित शाह पर सीधा आरोप

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah पर निशाना साधते हुए उन्हें “नॉटी होम मिनिस्टर” कहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब गृहमंत्री के इशारे पर हो रहा है, जो देश की सुरक्षा संभालने में असफल रहे हैं। ममता का कहना था कि केंद्र उनकी पार्टी के उम्मीदवारों की सूची और चुनावी रणनीति जानना चाहता है।

दस्तावेज चोरी का आरोप

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि ईडी की टीम राजनीतिक दस्तावेज, Hard Disk और संवेदनशील डेटा ले गई है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी पार्टी की रणनीति और उम्मीदवारों की सूची जब्त करना ईडी का काम है। ममता ने कार्यालय में बची कुछ फाइलें अपने काफिले की एक गाड़ी में रखवाकर सुरक्षित भिजवाईं।

प्रधानमंत्री से अपील

प्रधानमंत्री Narendra Modi को चेताते हुए ममता ने कहा कि वे अपने गृह मंत्री को नियंत्रित करें।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एजेंसियों का इस्तेमाल कर बंगाल की राजनीतिक जानकारी, मतदाताओं का डेटा और पार्टी की योजनाएं लूटना चाहती है।

कहां-कहां हुई छापेमारी

जानकारी के मुताबिक, ED ने सेंट्रल कोलकाता में I-PAC के वरिष्ठ अधिकारी प्रतीक जैन के आवास और सॉल्ट लेक सेक्टर-5 स्थित गोदरेज वाटरसाइड बिल्डिंग में I-PAC के कार्यालय पर छापेमारी की। प्रतीक जैन ममता बनर्जी की चुनावी रणनीति टीम के अहम सदस्य माने जाते हैं।

इस पूरी घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और बढ़ने की संभावना है।

ओडिशा में मानव सेवा की नई मिसाल बना पूरनचंद फाउंडेशन

Pooranchand Foundation becomes a new example of Human service: शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में लगातार काम कर रहा पूरनचंद फाउंडेशन अब स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

झारखंड से शुरू हुई यह सामाजिक पहल अब ओडिशा (Odisha) तक पहुंच चुकी है, जहां फाउंडेशन की युवा टीम पूरी निष्ठा के साथ मानव सेवा में जुटी हुई है।

ग्रामीण इलाकों तक पहुंच रही स्वास्थ्य सेवा

इस स्वास्थ्य सेवा अभियान में पूरनचंद फाउंडेशन से जुड़े डॉ. संदीप का योगदान खास तौर पर सराहा जा रहा है।

डॉ. संदीप ओडिशा के दूर-दराज़ और पिछड़े गांवों में जाकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं (Health Facilities) उपलब्ध करा रहे हैं। वे अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद समय निकालकर जरूरतमंद ग्रामीणों की सेवा कर रहे हैं।

गांव-गांव जाकर लोगों की मदद

डॉ. संदीप गांव-गांव जाकर गरीब और वंचित परिवारों को प्राथमिक चिकित्सा, स्वास्थ्य परामर्श और जरूरी जानकारी दे रहे हैं। कई ऐसे गांव हैं, जहां नियमित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच पातीं। ऐसे इलाकों में उनका यह प्रयास लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है।

साथ ही वे ग्रामीणों को बीमारियों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में भी जागरूक कर रहे हैं।

समाज में सकारात्मक बदलाव की कोशिश

डॉ. संदीप का यह सेवा कार्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक सोच और बदलाव की नींव भी रख रहा है।

उनकी मेहनत और सेवा भावना पूरनचंद फाउंडेशन के उद्देश्यों को और मजबूती दे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अब स्वास्थ्य को लेकर अधिक सजग हो रहे हैं।

फाउंडेशन ने जताया गर्व

Puranchand Foundation के सचिव अभिजीत कुमार ने कहा कि डॉ. संदीप द्वारा ओडिशा में किया जा रहा सेवा कार्य पूरे संगठन के लिए गर्व की बात है।

उन्होंने कहा कि डॉ. संदीप की निस्वार्थ सेवा सभी के लिए प्रेरणा है और फाउंडेशन की टीम उनके योगदान के लिए आभारी है।

भविष्य में भी जारी रहेगा सेवा कार्य

फाउंडेशन की पूरी टीम ने यह संकल्प लिया है कि आने वाले समय में भी संस्था स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में लगातार काम करती रहेगी, ताकि समाज के जरूरतमंद वर्गों तक सहायता पहुंचाई जा सके।

कोलकाता में ED की रेड से सियासी घमासान, I-PAC और TMC ने उठाए सवाल

ED Raid in Kolkata: गुरुवार को कोलकाता की राजनीति उस समय गरमा गई, जब इंफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) की दिल्ली टीम ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के कोलकाता कार्यालय में छापेमारी की।

इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

I-PAC का हाईकोर्ट का रुख, रेड रोकने की मांग

बताया जा रहा है कि I-PAC, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी TMC से जुड़ी संस्था मानी जाती है, ने ED की इस रेड के खिलाफ तुरंत कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) का दरवाजा खटखटाया है।

I-PAC की ओर से अदालत में याचिका दायर कर छापेमारी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। I-PAC का कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की जा रही है।

ED की याचिका, राज्य अधिकारियों पर बाधा डालने का आरोप

वहीं दूसरी ओर ED ने भी इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। ED ने अपनी याचिका में कहा है कि पश्चिम बंगाल के कुछ अधिकारियों ने छापेमारी के दौरान एजेंसी के काम में बाधा डाली। यह याचिका जस्टिस शुभ्रा घोष के समक्ष रखी गई है।

कोयला तस्करी घोटाले से जुड़ी जांच का दावा

ED ने बयान जारी कर कहा है कि यह छापेमारी कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े करोड़ों रुपये के हवाला लेनदेन की जांच के तहत की गई है।

एजेंसी के अनुसार, जांच में सामने आया है कि कोयला तस्करी से कमाए गए अवैध पैसे हवाला ऑपरेटरों के जरिए I-PAC तक पहुंचाए गए। इसी कड़ी में यह कार्रवाई जरूरी थी।

ममता बनर्जी का तीखा हमला, प्रदर्शन का ऐलान

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ED की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और BJP पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP पैसा और ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है और अब सहनशीलता की सीमा पार हो चुकी है।

ममता बनर्जी ने ऐलान किया कि ED की कार्रवाई के विरोध में TMC शुक्रवार को पूरे राज्य में प्रदर्शन करेगी। कोलकाता में भी एक बड़ा मार्च निकाला जाएगा।

ED रेड के दौरान I-PAC दफ्तर पहुंचीं ममता

जैसे ही छापेमारी की खबर मिली, ममता बनर्जी खुद I-PAC के कार्यालय पहुंच गईं। उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों पर पार्टी के अहम दस्तावेज चुराने का आरोप लगाया। ममता ने कहा कि किसी राजनीतिक पार्टी की हार्ड डिस्क, उम्मीदवारों की सूची और रणनीति लेना ED का काम नहीं है।

अमित शाह और प्रधानमंत्री पर आरोप

ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को “नॉटी होम मिनिस्टर” कहा और आरोप लगाया कि यह सब उन्हीं के इशारे पर हो रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को अपने गृह मंत्री पर नियंत्रण रखना चाहिए। ममता ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल बंगाल की जानकारी, डेटा और रणनीति हासिल करने के लिए किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, ED की इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

कांके में नई OP शुरू, छात्रों और आम लोगों को मिलेगी ज्यादा सुरक्षा

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New OP started in Kanke : रांची पुलिस ने कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और अपराध पर नियंत्रण के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है। गुरुवार को कांके क्षेत्र में नवनिर्मित National Law University OP का विधिवत शुभारंभ किया गया।

इस ओपी का उद्घाटन ADG CID मनोज कौशिक और रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने किया। इस पहल से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की उम्मीद है।

छात्रों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

कांके क्षेत्र में स्थित National Law University में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस नए ओपी की स्थापना की गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस ओपी के शुरू होने से छात्रों को अब पहले से ज्यादा सुरक्षित माहौल मिलेगा। साथ ही, आसपास रहने वाले लोगों को भी इसका सीधा लाभ होगा।

इस OP के खुलने से इलाके में अपराध पर बेहतर तरीके से निगरानी रखी जा सकेगी। किसी भी आपात स्थिति में पुलिस की मदद अब जल्दी मिल पाएगी। पहले जहां लोगों को दूर थाने जाना पड़ता था, अब पास में ही पुलिस सहायता उपलब्ध होगी।

पुलिस प्रशासन का मानना है कि इससे पुलिस और आम जनता के बीच संपर्क और विश्वास बढ़ेगा। स्थानीय लोगों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे कांके क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल और मजबूत होगा।

झारखंड में फार्मेसी कॉलेजों पर सख्ती, 34 की मान्यता रद्द करने की तैयारी

Jharkhand Cracks Down on Pharmacy Colleges: झारखंड में Diploma in Pharmacy पाठ्यक्रम को लेकर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद राज्य सरकार ने 34 फार्मेसी कॉलेजों का लेटर ऑफ कंसेंट (LoC) रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इन कॉलेजों पर विभागीय नियमों और Pharmacy Council of India (PCI) के मानकों का उल्लंघन करने का आरोप है। सरकार का साफ कहना है कि नियमों के बिना किसी भी हाल में फार्मेसी की पढ़ाई नहीं चलने दी जाएगी।

बिना NOC और संसाधनों के चल रहे थे कॉलेज

स्वास्थ्य विभाग (Health Department) की जांच में यह बात सामने आई कि जिन 34 कॉलेजों पर कार्रवाई प्रस्तावित है, उन्होंने न तो राज्य सरकार से अनिवार्य NOC ली थी और न ही इसके लिए आवेदन किया था।

कई कॉलेजों के पास अपनी जमीन और भवन तक नहीं थे। इसके अलावा टीचिंग और नन-टीचिंग स्टाफ की भी भारी कमी पाई गई।

ऐसे में इन संस्थानों में डिप्लोमा इन फार्मेसी पाठ्यक्रम का संचालन पूरी तरह नियमों के खिलाफ माना गया है।

36 अन्य संस्थानों पर भी खतरा

जांच के दौरान 36 और फार्मेसी संस्थान भी चिन्हित किए गए हैं। इन कॉलेजों के पास जमीन और भवन तो हैं, लेकिन शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी है।

साथ ही इन्होंने भी डिप्लोमा इन फार्मेसी के लिए न तो NOC ली और न ही आवेदन किया। फिलहाल इन संस्थानों को “संचालन के लिए प्रयासरत” की श्रेणी में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी से स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब के बाद इनके लेटर ऑफ कंसेंट की समीक्षा कर आगे का फैसला लिया जाएगा।

परीक्षा समिति की भूमिका पर उठे सवाल

पूरे मामले में Diploma in Pharmacy परीक्षा समिति की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

यह पूछा जा रहा है कि समय पर कॉलेजों में भवन, शिक्षक और संसाधनों की जांच क्यों नहीं की गई। इस मामले में परीक्षा समिति के अध्यक्ष और सदस्य सचिव से भी स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट बनी आधार

अनियमितताओं की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के निर्देश पर पिछले साल अगस्त में तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई थी।

विभागीय उप सचिव रंजीत लोहरा की अध्यक्षता में गठित इस समिति में अवर सचिव धीरंजन प्रसाद शर्मा और प्रशांत पांडेय सदस्य थे।

समिति ने राज्य के कुल 71 फार्मेसी संस्थानों की जांच की। रिपोर्ट में कई कॉलेज सरकारी नियमों और पीसीआई मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब कार्रवाई की जा रही है।

2025-26 सत्र में नए नामांकन पर रोक की सिफारिश

जांच के बाद 34 संस्थानों का Letter of Consent रद्द करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

साथ ही पीसीआई, नई दिल्ली को पत्र भेजकर शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए इन कॉलेजों में नए नामांकन पर रोक लगाने की सिफारिश की जाएगी। चूंकि लेटर ऑफ कंसेंट परीक्षा समिति ने जारी किया था, इसलिए इसे रद्द करने की प्रक्रिया भी उसी के जरिए होगी।

छात्रों के पंजीकरण पर भी लग सकती है रोक

स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि जिन संस्थानों ने अब तक वैध एनओसी नहीं ली है, उनके छात्रों के आगामी परीक्षाओं के पंजीकरण पर रोक लग सकती है।

केवल लेटर ऑफ कंसेंट के आधार पर परीक्षा कराने की जो अंतरिम व्यवस्था थी, उसे 2025-26 सत्र से खत्म करने का प्रस्ताव है।

रांची-खूंटी के कॉलेज भी जांच के दायरे में

रांची और खूंटी जिले के 10 फार्मेसी कॉलेजों का लेटर ऑफ कंसेंट रद्द करने की तैयारी है, जबकि 36 कॉलेजों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

विभाग का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए की जा रही है। आगे और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

कड़ाके की ठंड से राहत नहीं: रांची में 9 और 10 जनवरी तक स्कूल बंद

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Schools in Ranchi closed till January 9 and 10 : रांची में लगातार बढ़ती ठंड और शीतलहर (Cold Wave) को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है.

बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए रांची जिले में चल रहे सभी सरकारी, गैर-सरकारी और निजी स्कूलों को दो दिन के लिए बंद कर दिया गया है.

यह आदेश KG से लेकर 12वीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों पर लागू होगा. नए आदेश के अनुसार 9 जनवरी 2026 (शुक्रवार) और 10 जनवरी 2026 (शनिवार) को स्कूलों में पढ़ाई नहीं होगी.

पहले भी मिल चुकी है ठंड की छुट्टी

गौरतलब है कि इससे पहले भी भीषण ठंड के कारण 6 जनवरी से 8 जनवरी तक सभी स्कूलों को बंद रखा गया था. लेकिन मौसम में कोई खास सुधार नहीं होने और तापमान लगातार गिरने की वजह से जिला प्रशासन ने ठंड की छुट्टी को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है.

सुबह और रात में ठंडी हवा और घने कोहरे के कारण बच्चों का स्कूल जाना जोखिम भरा माना जा रहा है.

आदेश में यह भी साफ किया गया है कि यदि इन दिनों के दौरान किसी स्कूल में परीक्षा तय है, तो उसका आयोजन स्कूल प्रबंधन अपने स्तर पर तय कर सकता है.

वहीं 10वीं और 12वीं कक्षा के संचालन को लेकर भी स्कूलों को अपने विवेक से निर्णय लेने की छूट दी गई है.

शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य

हालांकि छात्रों को छुट्टी दी गई है, लेकिन सरकारी और गैर-सरकारी अल्पसंख्यक विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों को तय समय पर स्कूल आना होगा.

उन्हें ई-विद्या वाहिनी पोर्टल (E-Vidya Vahini Portal) पर अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी और स्कूल से जुड़े गैर-शैक्षणिक कार्यों को पूरा करना होगा.

आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश

जिला प्रशासन ने सभी स्कूल प्रबंधन को इस आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है. साथ ही कहा गया है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और मौसम की स्थिति को देखते हुए आगे भी आवश्यक निर्णय लिए जा सकते हैं.

अवैध अफीम के खिलाफ सख्त हुई पुलिस, DGP ने दिए कड़े निर्देश

Police Become Strict Against illegal Opium: राज्य में अवैध अफीम (illicit Opium) की खेती और मादक पदार्थों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में एक अहम उच्च-स्तरीय बैठक हुई।

इस बैठक की अध्यक्षता तदाशा मिश्र ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य अफीम की अवैध खेती के विनष्टीकरण की समीक्षा और नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर रणनीति बनाना था।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े प्रभावित जिलों के SP

यह समीक्षा बैठक Video Conferencing के माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें अवैध अफीम की खेती से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।

इनमें रांची, चतरा, पलामू, चाईबासा, हजारीबाग, लातेहार, सरायकेला-खरसावां और खूंटी शामिल हैं। सभी जिलों से अब तक की गई कार्रवाई और मौजूदा स्थिति की जानकारी साझा की गई।

आंकड़ों और कार्रवाई की हुई विस्तृत समीक्षा

बैठक के दौरान वर्ष 2025 में किए गए अफीम विनष्टीकरण के आंकड़ों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही फसलीय वर्ष 2024-25 में नष्ट की गई भूमि के जीआर सत्यापन, दर्ज एनडीपीएस मामलों की ताजा स्थिति, बड़े तस्करों पर की गई कार्रवाई और PIT NDPS एक्ट के तहत भेजे गए प्रस्तावों की भी समीक्षा हुई।

जागरूकता अभियान और वैकल्पिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी विचार किया गया।

DGP के सख्त निर्देश, तकनीक और समुदाय पर जोर

समीक्षा के बाद DGP ने साफ कहा कि अवैध अफीम की खेती को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने निर्देश दिया कि NDPS मामलों में आपसी लिंक स्थापित किए जाएं, संयुक्त कार्रवाई की जाए और तकनीक व स्थानीय समुदाय की मदद ली जाए। साथ ही नशे के कारोबार से जुड़ी संपत्तियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।