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मिडिल ईस्ट में ‘तेल की जंग’ से बढ़कर ‘पानी की जंग’ का खतरा, निशाने पर आए वाटर प्लांट

New Delhi: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को अब तक तेल के लिए महायुद्ध माना जा रहा था, लेकिन अब आशंका जताई जा रही है कि यह संघर्ष पानी के लिए युद्ध का रूप भी ले सकता है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि सैन्य ठिकानों और तेल सुविधाओं के बाद अब समुद्री पानी को पीने लायक बनाने वाले वाटर डिसेलिनेशन प्लांट भी हमलों के निशाने पर आ गए हैं।
हालांकि भारत, चीन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश तेल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन खाड़ी देशों के सामने पानी का गंभीर संकट पैदा होने का खतरा मंडरा रहा है।

वाटर प्लांट पर हमलों से बढ़ी चिंता

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान में एक वाटर प्लांट पर हमला हुआ, जिसके बाद बहरीन के एक डिसेलिनेशन प्लांट पर ड्रोन हमला किया गया। ये प्लांट समुद्र के खारे पानी को शुद्ध कर पीने योग्य बनाने का काम करते हैं और खाड़ी देशों की बड़ी आबादी की प्यास बुझाते हैं।

ईरान ने दावा किया है कि उसके एक वाटर प्लांट को निशाना बनाया गया है। जिस प्लांट पर हमला हुआ वह होर्मुज स्ट्रेट के पास केशम द्वीप पर स्थित है। इस हमले के बाद बड़े इलाके में पानी की सप्लाई प्रभावित हो गई।

बहरीन के प्लांट पर ड्रोन हमला

इसी तरह बहरीन के एक वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट पर भी ड्रोन हमला हुआ था। यह प्लांट वहां की आबादी को पीने का पानी उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में पानी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

खाड़ी देशों की लाइफलाइन हैं डिसेलिनेशन प्लांट

मिडिल ईस्ट के अधिकांश देश रेगिस्तानी हैं, जहां प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोत बेहद सीमित हैं। यहां जीवन का सबसे बड़ा आधार तेल नहीं बल्कि समुद्र का पानी है, जिसे डिसेलिनेशन तकनीक से पीने योग्य बनाया जाता है।

डिसेलिनेशन प्लांट समुद्र के खारे पानी से नमक और अन्य अशुद्धियां हटाकर उसे शुद्ध पेयजल में बदलते हैं। खाड़ी देशों में पानी की सप्लाई काफी हद तक इन्हीं प्लांट्स पर निर्भर है।

दुनिया के 60% डिसेलिनेशन प्लांट खाड़ी में

दुनिया भर की कुल डिसेलिनेशन क्षमता का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों में है। फारस की खाड़ी के आसपास 400 से ज्यादा वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट मौजूद हैं, जिन पर युद्ध के दौरान खतरा बढ़ गया है।

अगर इन प्लांट्स को निशाना बनाया गया तो सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में करोड़ों लोग पानी के लिए तरस सकते हैं। कतर और बहरीन जैसे छोटे देश भी इस संकट से अछूते नहीं रहेंगे।

ड्रोन और मिसाइल हमले का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विशाल प्लांट ड्रोन, मिसाइल या रॉकेट हमलों के लिए संवेदनशील हो सकते हैं। ईरान समर्थित हुती और अन्य विद्रोही गुट पहले भी सऊदी अरब के तेल ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर ड्रोन हमले कर चुके हैं।

इसके अलावा समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगें पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिनसे समुद्र का पानी प्लांट तक पहुंचता है। आधुनिक डिसेलिनेशन प्लांट पूरी तरह कंप्यूटर और सेंसर आधारित SCADA सिस्टम पर चलते हैं, जिन्हें साइबर हमलों के जरिए भी निशाना बनाया जा सकता है।

हमले के गंभीर परिणाम

अगर खाड़ी देशों के किसी बड़े वाटर प्लांट पर हमला होता है, तो इसके असर कुछ ही घंटों में दिखाई देने लगेंगे। कतर, कुवैत और यूएई जैसे देशों में रणनीतिक जल भंडार सीमित होते हैं, जो केवल कुछ दिनों तक ही पानी की आपूर्ति बनाए रख सकते हैं।

प्लांट बंद होते ही शहरों में पानी की भारी किल्लत पैदा हो सकती है। मिडिल ईस्ट के कई प्लांट बिजली उत्पादन से भी जुड़े हैं, इसलिए इन पर हमले से बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। बिना पानी के रियाद, दुबई और अबू धाबी जैसे बड़े शहरों में सामान्य जीवन चलाना मुश्किल हो जाएगा।

पहले भी सामने आ चुका है जल युद्ध का खतरा

इतिहास में भी ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं। 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान इराक ने कुवैत के एक वाटर प्लांट को नुकसान पहुंचाया था, जिससे वहां पर्यावरण और जल संकट की स्थिति पैदा हो गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब और इजरायल के तटीय इलाकों में स्थित कई डिसेलिनेशन प्लांट विद्रोही संगठनों की संभावित टारगेट लिस्ट में शामिल हैं।

सुरक्षा के लिए मिसाइल डिफेंस तैनात

इस खतरे को देखते हुए सऊदी अरब समेत कई देशों ने अपने वाटर डिसेलिनेशन प्लांट के आसपास पैट्रियट और आयरन डोम जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं।
इसके अलावा कई देश अब बड़े भूमिगत जल भंडार तैयार कर रहे हैं, ताकि युद्ध जैसी स्थिति में भी कई हफ्तों तक पानी की आपूर्ति जारी रखी जा सके। साथ ही एक बड़े प्लांट की जगह कई छोटे-छोटे प्लांट लगाने की रणनीति अपनाई जा रही है, जिससे किसी एक प्लांट पर हमला होने पर पूरी सप्लाई प्रभावित न हो।

बेलगावी में ‘हनीट्रैप’ स्टाइल ठगी का खुलासा, सोशल मीडिया पर करती थी दोस्ती, फिर…

बेलगावी: कर्नाटक के बेलगावी में पुलिस ने एक ऐसे हनीट्रैप स्टाइल ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें एक महिला सोशल मीडिया के जरिए अमीर पुरुषों को जाल में फंसाकर उनसे पैसे और कीमती सामान लूट लेती थी। तिलकवाड़ी पुलिस स्टेशन की टीम ने इस मामले में 33 वर्षीय महिला दीपा अवतागी को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार आरोपी महिला बागलकोट जिले के महालिंगपुर की रहने वाली है और खुद को फैशन डिजाइनर बताती थी। जांच में सामने आया है कि वह इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए अमीर और प्रभावशाली लोगों से दोस्ती कर उन्हें अपने जाल में फंसाती थी।

सोशल मीडिया से शुरू होता था जाल

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि दीपा अवतागी पहले सोशल मीडिया पर पुरुषों से बातचीत शुरू करती थी। वह खुद को बेहद दोस्ताना और भरोसेमंद अंदाज में पेश करती थी।
धीरे-धीरे बातचीत इतनी बढ़ जाती कि सामने वाला व्यक्ति उससे मिलने के लिए तैयार हो जाता था। इसके बाद वह किसी लॉज या होटल में मिलने का प्रस्ताव देती थी।

लॉज में बुलाकर करती थी चोरी

जब पीड़ित उससे मिलने लॉज पहुंचते थे, तो वह सामान्य बातचीत कर भरोसा और मजबूत करती थी। इसके बाद वह किसी बहाने से उन्हें नहाने या फ्रेश होने के लिए बाथरूम में भेज देती थी।

जैसे ही व्यक्ति बाथरूम में जाता, वह कमरे में रखे नकद पैसे, सोना, बैग और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो जाती थी। पुलिस के मुताबिक कुछ मामलों में वह पीड़ितों की कार तक लेकर भाग गई।

बाद में करती थी ब्लैकमेलिंग

मामला यहीं खत्म नहीं होता था। पुलिस जांच में सामने आया है कि सामान लेकर फरार होने के बाद दीपा पीड़ितों को फोन कर उनसे और पैसे मांगती थी।

वह कहती थी कि पैसे देने पर वह उनकी कार और सामान वापस कर देगी। बदनामी के डर से कई लोग उसकी मांग मान लेते थे, इसी वजह से लंबे समय तक यह ठगी सामने नहीं आ सकी।

मना करने पर देती थी पुलिस केस की धमकी

अगर कोई पीड़ित पैसे देने से इनकार करता था, तो वह कथित तौर पर उसे पुलिस केस में फंसाने की धमकी देती थी। वह कहती थी कि शिकायत दर्ज कराकर उसकी सामाजिक छवि खराब कर देगी।
इसी डर के कारण कई लोग पुलिस तक पहुंचने से भी हिचकते रहे।

पुलिस ने ऐसे किया खुलासा

एक शिकायत मिलने के बाद तिलकवाड़ी पुलिस ने मामले की गुप्त जांच शुरू की। तकनीकी सुरागों और जांच के आधार पर पुलिस ने दीपा अवतागी को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में उसके कई कारनामों का खुलासा हुआ है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।

साथी आरोपी फरार

पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले में दीपा अकेली नहीं थी। जांच में उसके एक सहयोगी का नाम भी सामने आया है।

बताया जा रहा है कि शिवानंद माटापति नाम का एक व्यक्ति भी इस गिरोह में शामिल है, जो बेलगावी जिले के हुक्केरी का रहने वाला है। फिलहाल वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा।

मोबाइल की स्क्रीन खुद-ब-खुद क्यों हो जाती है बंद? जानिए इसके पीछे के 2 बड़े कारण

Mobile Screen Time: आज के स्मार्टफोन में स्क्रीन का अपने आप बंद हो जाना एक आम अनुभव है। कई यूजर्स इसे फोन की खराबी समझ लेते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह मोबाइल की डिजाइन का ही हिस्सा होता है। दरअसल इसके पीछे मुख्य रूप से दो कारण होते हैं-स्क्रीन टाइमआउट और प्रॉक्सिमिटी सेंसर। ये दोनों फीचर्स बैटरी बचाने और यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए बनाए गए हैं।

स्क्रीन टाइमआउट क्या होता है

स्क्रीन टाइमआउट एक बिल्ट-इन सेटिंग है जो लगभग हर एंड्रॉइड और iOS फोन में मौजूद होती है। जब यूजर कुछ सेकंड या मिनट तक स्क्रीन को टच नहीं करता है, तो फोन अपने आप स्क्रीन को ऑफ कर देता है।

इसका मुख्य उद्देश्य बैटरी की बचत करना होता है। दरअसल मोबाइल की स्क्रीन सबसे ज्यादा पावर इस्तेमाल करती है। अगर स्क्रीन लगातार ऑन रहे तो बैटरी बहुत जल्दी खत्म हो सकती है। इसी वजह से कंपनियां डिफॉल्ट रूप से स्क्रीन टाइमआउट 15 सेकंड, 30 सेकंड या 1 मिनट पर सेट करती हैं।

स्क्रीन जल्दी बंद हो रही है तो ऐसे बदलें सेटिंग

अगर आपको लगता है कि फोन की स्क्रीन बहुत जल्दी बंद हो रही है, तो इसे आसानी से बदला जा सकता है। इसके लिए फोन की Settings में जाकर Display या Screen & Brightness सेक्शन में Screen Timeout या Sleep का विकल्प चुनना होता है। यहां से स्क्रीन बंद होने का समय 2 मिनट, 5 मिनट या 10 मिनट तक बढ़ाया जा सकता है।

पावर सेविंग मोड में जल्दी ऑफ होती है स्क्रीन

कई स्मार्टफोन में जब पावर सेविंग मोड ऑन होता है, तो स्क्रीन टाइमआउट का समय अपने आप कम हो जाता है। इसका मकसद बैटरी की खपत को कम करना होता है। इससे फोन ज्यादा समय तक चलता है और डिवाइस के गर्म होने की समस्या भी कम हो जाती है।

प्रॉक्सिमिटी सेंसर कैसे काम करता है

मोबाइल की स्क्रीन बंद होने का दूसरा बड़ा कारण प्रॉक्सिमिटी सेंसर होता है। यह छोटा सा सेंसर फोन के ऊपरी हिस्से में, फ्रंट कैमरे और स्पीकर के पास लगा होता है।

जब कोई व्यक्ति कॉल के दौरान फोन को अपने कान से लगाता है, तो यह सेंसर चेहरे या कान की नजदीकी को पहचान लेता है और स्क्रीन तुरंत बंद हो जाती है।

इससे क्या फायदा होता है

इस फीचर से कॉल के दौरान गलती से गाल या कान से म्यूट, होल्ड या डिस्कनेक्ट जैसे बटन दबने का खतरा नहीं रहता। इसके अलावा कॉल के दौरान स्क्रीन बंद रहने से बैटरी की भी बचत होती है। जैसे ही फोन को कान से हटाया जाता है, स्क्रीन दोबारा ऑन हो जाती है।

कब हो सकती है परेशानी

कभी-कभी प्रॉक्सिमिटी सेंसर के पास गंदगी जमा हो जाने, मोटा स्क्रीन प्रोटेक्टर लगाने या फोन कवर के कारण यह सेंसर ठीक से काम नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में स्क्रीन बार-बार बिना वजह बंद या चालू हो सकती है। ऐसे में सेंसर के आसपास की जगह को साफ करना या फोन का कवर हटाकर जांच करना मददगार साबित हो सकता है।

ज्यादातर मामलों में यह समस्या नहीं, फीचर है

मोबाइल की स्क्रीन का अपने आप बंद होना आमतौर पर कोई खराबी नहीं बल्कि एक स्मार्ट फीचर है। यह बैटरी लाइफ बढ़ाता है, अनचाहे टच से बचाता है और फोन को सुरक्षित रखता है।

अगर स्क्रीन Timeout बढ़ाने या सेंसर चेक करने के बाद भी समस्या बनी रहती है, तो इसके पीछे ओवरहीटिंग, बैटरी या सॉफ्टवेयर से जुड़ी कोई गड़बड़ी हो सकती है। ऐसे में फोन को सर्विस सेंटर पर दिखाना बेहतर विकल्प होता है।

लहसुन-प्याज पर रिसर्च की मांग वाली PIL पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, वकील को लगाई फटकार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लहसुन और प्याज पर रिसर्च कराने की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता वकील को कड़ी फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाओं की प्रकृति और ड्राफ्टिंग पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि क्या ऐसी याचिकाएं आधी रात को ड्राफ्ट की जाती हैं।

दरअसल, याचिका में अदालत से एक कमेटी गठित कर यह शोध कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी कि प्याज और लहसुन में कोई ‘तामसिक’ या नकारात्मक तत्व होते हैं या नहीं।

जैन समुदाय की भावनाओं का हवाला

याचिका में कहा गया था कि जैन समुदाय प्याज, लहसुन और जड़ वाली सब्जियों को तामसिक भोजन मानकर उनसे परहेज करता है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि यह मुद्दा सामाजिक रूप से भी सामने आता रहा है और हाल ही में गुजरात हाईकोर्ट में एक तलाक का मामला भी भोजन में प्याज होने को लेकर सामने आया था।

इस पर अदालत ने सवाल किया कि आखिर इस तरह की याचिका दायर कर जैन समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की जरूरत क्यों है।

तीन अन्य याचिकाएं भी खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने इसी वकील की ओर से दायर तीन अन्य जनहित याचिकाओं पर भी सुनवाई से इनकार कर दिया। इनमें शराब और तंबाकू उत्पादों में कथित हानिकारक सामग्री को नियंत्रित करने के निर्देश की मांग, संपत्तियों का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित कराने की मांग और शास्त्रीय भाषाओं की घोषणा को लेकर दिशानिर्देश बनाने की मांग शामिल थी।

अदालत बोली– नॉन एप्लिकेशन ऑफ माइंड का उदाहरण

पीठ ने सभी याचिकाओं को अस्पष्ट और तुच्छ बताते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि इन याचिकाओं की ड्राफ्टिंग बेहद खराब है और इनमें मांगी गई राहत भी स्पष्ट नहीं है, जिससे अदालत का कीमती समय बर्बाद होता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह याचिका “नॉन एप्लिकेशन ऑफ माइंड” का उदाहरण है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अगर याचिकाकर्ता खुद वकील नहीं होते, तो इस तरह की याचिका पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता था।

भविष्य में लग सकता है भारी जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि इस तरह की तुच्छ और अस्पष्ट याचिकाएं अदालत पर अनावश्यक बोझ डालती हैं। अदालत ने साफ कहा कि भविष्य में अगर इस तरह की याचिकाएं दायर की गईं, तो उन पर असाधारण जुर्माना लगाया जा सकता है।

मुस्लिम महिलाओं के विरासत अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा– UCC भी हो सकता है समाधान

Supreme Court: मुस्लिम महिलाओं को पुरुषों के बराबर संपत्ति में हिस्सेदारी देने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि देश की सभी महिलाओं को समान उत्तराधिकार अधिकार देने का एक तरीका समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करना भी हो सकता है।

हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नीतिगत और विधायी क्षेत्र का विषय है, जिस पर अंतिम फैसला संसद और सरकार को ही लेना होगा।

मुस्लिम महिलाओं को बराबर विरासत अधिकार देने की मांग

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच कर रही थी। यह याचिका मुस्लिम पर्सनल लॉ के उन प्रावधानों को चुनौती देती है, जिनमें महिलाओं को पुरुषों के बराबर विरासत अधिकार नहीं मिलता।

सुनवाई के दौरान बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण से सवाल किया कि क्या अदालत पर्सनल लॉ की संवैधानिक वैधता की जांच कर सकती है। जस्टिस बागची ने एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उसमें माना गया था कि पर्सनल लॉ को संविधान की कसौटी पर नहीं परखा जा सकता।

शरीयत नियम हटे तो बन सकता है कानूनी शून्य

बेंच ने यह भी पूछा कि यदि अदालत शरीयत के उत्तराधिकार नियमों को रद्द कर दे, तो क्या इससे कानूनी शून्य (लीगल वैक्यूम) पैदा नहीं हो जाएगा। क्योंकि मुस्लिम उत्तराधिकार को नियंत्रित करने वाला कोई अलग वैधानिक कानून मौजूद नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश ने चिंता जताते हुए कहा कि सुधार की जल्दबाज़ी में ऐसा न हो कि मुस्लिम महिलाएं मौजूदा अधिकारों से भी वंचित हो जाएं।

प्रशांत भूषण ने दिया यह तर्क

वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि अगर शरीयत के प्रावधान हटते हैं, तो भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 लागू किया जा सकता है। अदालत यह घोषणा कर सकती है कि मुस्लिम महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर विरासत अधिकार मिलें।

उन्होंने यह भी कहा कि विरासत का अधिकार एक सिविल राइट है और इसे धार्मिक स्वतंत्रता के तहत “आवश्यक धार्मिक प्रथा” नहीं माना जा सकता। भूषण ने अपने तर्क के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल तलाक फैसले का भी हवाला दिया।

समान अधिकार का एक रास्ता UCC भी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि देश की सभी महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) जैसे व्यापक विधायी उपाय पर भी विचार किया जा सकता है।

जस्टिस बागची ने कहा कि डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स के तहत UCC लागू करना विधायिका का विषय है और इस पर निर्णय संसद को लेना चाहिए।

1937 के शरीयत एक्ट में बदलाव की मांग

दरअसल सुप्रीम कोर्ट महिलाओं के एक समूह की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एक्ट, 1937 में बदलाव की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे मुस्लिम महिलाओं को विरासत और उत्तराधिकार में बराबरी का अधिकार मिल सकेगा।

फिलहाल मुस्लिम महिलाओं को अपने माता-पिता की संपत्ति में पुरुषों की तुलना में कम हिस्सा मिलता है।

याचिका संशोधित करने के लिए मिला समय

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि यदि 1937 का एक्ट हटा दिया जाता है तो कानूनी खालीपन पैदा हो सकता है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने यह भी कहा कि इस मामले में दखल देने से हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) के उत्तराधिकार नियमों पर भी असर पड़ सकता है।

अदालत ने याचिकाकर्ता को चार सप्ताह का समय दिया है ताकि वह याचिका में संशोधन कर यह स्पष्ट करे कि शरीयत एक्ट में दखल दिए बिना मुस्लिम महिलाओं को बराबर विरासत अधिकार किस तरह दिए जा सकते हैं। यह याचिका पोलोमी पाविनी शुक्ला और आयशा जावेद की ओर से दाखिल की गई है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हंगामा, युवक ने जज से लगाई न्याय या इच्छा मृत्यु की गुहार

Madhya Pradesh High Court: मध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) में मंगलवार को उस समय हंगामा मच गया, जब एक शख्स अपनी पत्नी के गर्भपात के बाद मृत भ्रूण को लेकर सीधे कोर्ट रूम में पहुंच गया। बताया जा रहा है कि उसने जज की डाइस पर भ्रूण रख दिया और कहा कि या तो उसे न्याय दिया जाए या फिर उसे इच्छा मृत्यु (मरने की अनुमति) दी जाए। इस घटना से कोर्ट परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

200 करोड़ के घोटाले का लगाया आरोप

जानकारी के मुताबिक, रीवा के रहने वाले दयाशंकर पांडे पहले जबलपुर में स्थित शुभ मोटर्स में अकाउंटेंट के तौर पर काम करते थे।दयाशंकर का दावा है कि नौकरी के दौरान उन्हें शोरूम में करीब 200 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले की जानकारी मिली थी। उनका कहना है कि जब उन्होंने इस मामले में आवाज उठाई, तो उनके और उनके परिवार पर हमले होने लगे।

हमले के बाद पत्नी का हुआ मिसकैरेज

दयाशंकर का आरोप है कि हाल ही में हुए एक हमले के दौरान उनकी पत्नी के साथ मारपीट की गई, जिससे उनका मिसकैरेज हो गया। उन्होंने कोर्ट में कहा कि वे मृत भ्रूण को सबूत के तौर पर लेकर आए हैं, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।

चुनाव भी लड़ चुके हैं दयाशंकर

दयाशंकर पांडे का कहना है कि वे राजनीति में भी सक्रिय हैं और साल 2024 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।

उनका दावा है कि पिछले दो साल में उन पर चार बार जानलेवा हमले हो चुके हैं। कई बार पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की मांग करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।

पुलिस ने थाने ले जाकर समझाया

घटना के बाद हाईकोर्ट की सुरक्षा टीम और ओमती पुलिस थाना की पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई।

पुलिस के मुताबिक, दयाशंकर पांडे और उनकी पत्नी को थाने ले जाकर समझाइश दी गई है। साथ ही हाईकोर्ट परिसर में इस तरह से भ्रूण ले जाने को सुरक्षा में बड़ी चूक के रूप में भी देखा जा रहा है।

अब 25 दिन से पहले नहीं होगी दूसरी बुकिंग, LPG संकट से जूझ रहे होटल-रेस्टोरेंट

LPG crisis: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट का असर अब भारत की रसोई और कारोबार पर भी दिखने लगा है। तेल और ऊर्जा की किल्लत के कारण देश में कमर्शियल LPG की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। कई शहरों में हालात ऐसे हो गए हैं कि होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

तेल कंपनियों की ओर से कमर्शियल LPG की सप्लाई पर फिलहाल रोक लगाए जाने से फूड इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में गैस की किल्लत के चलते 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट प्रभावित बताए जा रहे हैं।

अब दो LPG सिलेंडरों की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन

जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने नया नियम लागू किया है। अब दो LPG सिलेंडरों की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतराल रखना अनिवार्य होगा।

साथ ही होटल, रेस्टोरेंट और फूड इंडस्ट्री की समस्याओं के समाधान के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक विशेष समिति भी गठित की है, जो जरूरत के अनुसार अलग-अलग सेक्टर को LPG उपलब्ध कराने की समीक्षा करेगी।

झारखंड में भी दिखा असर

मिडिल ईस्ट में बने हालात का असर झारखंड में भी देखने को मिला। रांची में धुर्वा स्थित गैस एजेंसी पर सिलेंडर लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग गईं। कई लोग कार, बाइक और बैटरी रिक्शा से खुद एजेंसी पहुंचकर सिलेंडर ले जाते नजर आए।

हालांकि गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है। होली के कारण सप्लाई चेन कुछ दिनों के लिए बाधित हो गई थी, लेकिन अब रोजाना सिलेंडर की सप्लाई आने लगेगी।

अब 25 दिन से पहले नहीं होगी दूसरी बुकिंग, LPG संकट से जूझ रहे होटल-रेस्टोरेंट

पुडुचेरी में 750 होटलों पर बंद होने का खतरा

पुडुचेरी में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई लगभग ठप हो गई है। इसके चलते करीब 750 होटल बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। कई बड़े होटलों ने अपने मेनू में कटौती कर दी है और ग्राहकों को सीमित व्यंजन ही परोसे जा रहे हैं।

कुछ होटलों में दोपहर के भोजन में केवल ‘कूटू’ या ‘पोरियाल’ जैसे साधारण व्यंजन ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

पुडुचेरी होटल ओनर्स एसोसिएशन के मुताबिक यहां के 99 प्रतिशत रेस्टोरेंट पूरी तरह गैस सिलेंडरों पर निर्भर हैं और खाना बनाने का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो अधिकांश होटल बंद हो सकते हैं।

चेन्नई और मुंबई में भी बढ़ी परेशानी

चेन्नई में भी गैस सिलेंडर की कमी के कारण कई होटलों ने अपने मेनू में व्यंजनों की संख्या घटा दी है। चेन्नई होटल एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष एम. रवि के मुताबिक होटलों के पास सिर्फ दो दिनों के लिए ही गैस सिलेंडर बचे हैं।

वहीं मुंबई में होटल एसोसिएशन ‘आहार’ के अनुसार गैस सप्लाई बाधित होने के कारण अब तक करीब 20 प्रतिशत होटल बंद हो चुके हैं। यदि हालात नहीं सुधरे तो अगले दो दिनों में 50 प्रतिशत होटल बंद होने की आशंका है।

लखनऊ और तिरुपुर में भी गहराया संकट

लखनऊ में भी कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई में देरी से होटल और रेस्टोरेंट संचालक परेशान हैं। पहले जहां सिलेंडर बुकिंग के अगले दिन मिल जाता था, अब पांच से सात दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।

तमिलनाडु के तिरुपुर में भी गैस की भारी कमी है। यहां रोजाना करीब 1500 सिलेंडरों की जरूरत होती है, लेकिन कमी के कारण कई रेस्टोरेंट सिर्फ दो दिन तक ही चल पाने की स्थिति में हैं। कई जगहों पर सिर्फ टमाटर चावल या खिचड़ी जैसे सीमित भोजन ही परोसे जा रहे हैं।

लाखों लोगों की भोजन व्यवस्था पर असर

तिरुपुर में रोजाना करीब दो लाख लोग रेस्टोरेंट के भोजन पर निर्भर हैं, जिनमें लगभग 50 हजार लोग पूरी तरह होटलों के खाने के भरोसे रहते हैं। ऐसे में गैस संकट से यहां बड़ा सामाजिक और आर्थिक संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है।

महंगी हुई गैस, सरकार ने लागू किया ECA

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत में LPG की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। घरेलू गैस सिलेंडर करीब 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर लगभग 115 रुपये महंगा हो गया है। स्थिति को देखते हुए सरकार ने LPG पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) लागू कर दिया है।

रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश

पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। मंत्रालय के मुताबिक अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग मुख्य रूप से घरेलू LPG की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा।

गिरिडीह में बिहार STF की बड़ी कार्रवाई, दो नक्सली आरोपी गिरफ्तार

Giridih : गिरिडीह में बिहार STF और बेंगाबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नक्सली मामले के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी काफी समय से फरार चल रहे थे और नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे हैं। गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपियों को बाद में बिहार पुलिस अपने साथ ले गई।

बेंगाबाद इलाके से हुई गिरफ्तारी

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में पहला नाम पंकज यादव का है। वह बिहार के जमुई जिले के चरकापत्थर थाना क्षेत्र के चिलकाखार गांव का रहने वाला है और दरोगी यादव का पुत्र है। दूसरा आरोपी पवन सिंह है, जो कोडरमा जिले के सतगांवा थाना क्षेत्र के तांतीभागलपुर गांव का निवासी है और सुदामा सिंह का बेटा है। दोनों को गिरिडीह जिले के बेंगाबाद थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई पटना STF और बेंगाबाद पुलिस ने मिलकर की।

सूचना मिलने के बाद बनी संयुक्त टीम

बताया जाता है कि बिहार के पटना स्थित एसटीएफ को सूचना मिली थी कि दोनों आरोपी बेंगाबाद थाना इलाके में छिपकर रह रहे हैं। इसके बाद STF की टीम तुरंत गिरिडीह पहुंची और मामले की जानकारी गिरिडीह के एसपी डॉ. बिमल कुमार को दी गई। SP ने सदर SDPO जीतवाहन उरांव को निर्देश दिया कि बिहार पुलिस की कार्रवाई में पूरा सहयोग किया जाए। इसके बाद बेंगाबाद थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस और STF ने संयुक्त रूप से छापेमारी शुरू की।

घेराबंदी कर मंझलाटोल गांव से पकड़े गए

पुलिस को सूचना मिली थी कि दोनों आरोपी बेंगाबाद थाना क्षेत्र के गोलगो पंचायत के मंझलाटोल गांव में छिपे हुए हैं। इसके बाद STF की टीम इंस्पेक्टर अयोध्या प्रसाद के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। स्थानीय पुलिस की मदद से पूरे गांव की घेराबंदी की गई और कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

कई थानों में दर्ज हैं नक्सली मामले

पुलिस के मुताबिक दोनों के खिलाफ बिहार के जमुई जिले के चरकापत्थर थाना में कांड संख्या 143/25 दर्ज है, जो नक्सली घटना से जुड़ा हुआ है। बिहार पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपी भाकपा माओवादी संगठन के सक्रिय सदस्य हैं। इतना ही नहीं, इनके खिलाफ बिहार के जमुई, चकाई, चरकापत्थर और चंद्रदीप थाना के अलावा झारखंड के गिरिडीह जिले के तिसरी ब्लॉक और कोडरमा जिले के सतगांवा थाना में भी नक्सली गतिविधियों से जुड़े मामले दर्ज हैं।

बेल पर बाहर आए नक्सली को मारी थी गोली

पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी उस घटना में भी शामिल थे जिसमें चरकापत्थर थाना क्षेत्र में बेल पर बाहर आए नक्सली लखन यादव को गोली मार दी गई थी। इस घटना के बाद से दोनों फरार चल रहे थे और पुलिस उनकी तलाश कर रही थी।

पूछताछ के बाद कई जगहों पर छापेमारी

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ की गई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उनसे मिली जानकारी के आधार पर कई और ठिकानों पर भी छापेमारी की गई है।

SDPO ने क्या कहा

इस मामले में सदर एसडीपीओ जीतवाहन उरांव ने बताया कि बिहार एसटीएफ की टीम गिरिडीह आई थी। बेंगाबाद थाना पुलिस के सहयोग से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बिहार पुलिस ने बताया है कि दोनों के खिलाफ नक्सली कांड दर्ज है और उन्हें अपने साथ बिहार ले जाया गया है।

झारखंड में आयकर विभाग की कार्रवाई, रांची और झुमरी तिलैया में सर्वे

Ranchi/Koderma : आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा ने झारखंड में टैक्स चोरी की सूचना के आधार पर दो अलग-अलग व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर सर्वे शुरू किया है। विभाग की टीम आज यानी रविवार को राजधानी रांची और कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया में पहुंची और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों जगहों पर कारोबारियों द्वारा अपनी वास्तविक आमदनी छिपाने और आयकर की चोरी करने की शिकायत मिली थी।

अरगोड़ा चौक के शराब दुकान में आयकर टीम की जांच

रांची के अरगोड़ा चौक स्थित साहू वाइन नामक शराब दुकान में आयकर विभाग की टीम सुबह से ही सर्वे कर रही है। इस दुकान के मालिक का नाम वीरेन साहू बताया जा रहा है। अधिकारियों की टीम दुकान के कागजात, बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड और लेन-देन की जानकारी खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि रांची की आयकर टीम ही यहां सर्वे की कार्रवाई कर रही है। टीम यह जांच कर रही है कि दुकान की वास्तविक आमदनी और आयकर रिटर्न में दिखाए गए आंकड़ों में कोई अंतर तो नहीं है।

झुमरी तिलैया में कन्हैया कंफेक्शनरी पर भी सर्वे

उधर कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया में स्थित कन्हैया कंफेक्शनरी में भी आयकर विभाग की टीम ने सर्वे शुरू किया है। इस मिठाई दुकान के मालिक का नाम अरुण प्रसाद बताया गया है। यहां सर्वे की जिम्मेदारी धनबाद की आयकर टीम को दी गई है। टीम दुकान के स्टॉक, कैश बुक और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।

आयकर चोरी की सूचना के बाद हुई कार्रवाई

सूत्रों के मुताबिक आयकर विभाग को सूचना मिली थी कि इन दोनों प्रतिष्ठानों द्वारा अपनी वास्तविक आय छिपाकर टैक्स की चोरी की जा रही है। इसी आधार पर विभाग ने सर्वे की कार्रवाई शुरू की है। फिलहाल दोनों जगहों पर जांच जारी है और अधिकारी कागजात खंगाल रहे हैं।

धनबाद में गैस सिलेंडर ब्लास्ट से मची अफरा-तफरी, घर और गोदाम में लगी भीषण आग, दो लोग झुलसे

Dhanbad : धनबाद के झरिया थाना क्षेत्र के बस्ताकोला स्थित माइंस रेस्क्यू स्टेशन के पास आज यानी रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक घर में गैस सिलेंडर फटने से भीषण आग लग गई। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के लोगों में दहशत फैल गई और लोग घबराकर अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। आग तेजी से फैलती हुई पूरे घर को अपनी चपेट में लेती चली गई।

तेज धमाके के साथ लगी आग

स्थानीय लोगों के अनुसार दोपहर के समय अचानक जोरदार धमाका हुआ। आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के घरों में रहने वाले लोग सहम गए। जब लोग बाहर निकले तो देखा कि एक घर से आग की लपटें निकल रही हैं। देखते ही देखते आग ने पूरे मकान को घेर लिया और नीचे तल्ले में बने सोफा गोदाम तक पहुंच गई। आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि कुछ ही मिनटों में हालात बेकाबू हो गए।

मकान मालिक समेत दो लोग झुलसे

इस हादसे में मकान मालिक राजू अग्रवाल गंभीर रूप से झुलस गए। वहीं एक अन्य व्यक्ति के भी आग की चपेट में आने से झुलसने की खबर है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद करते हुए दोनों जख्मियों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा। बताया जा रहा है कि राजू अग्रवाल की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मवेशी भी आग की चपेट में आया

आग की लपटें इतनी तेज थीं कि घर के पास बंधा एक मवेशी भी इसकी चपेट में आ गया और वह भी झुलस गया। आसपास के लोगों ने काफी कोशिश की, लेकिन आग की तीव्रता के कारण तुरंत बचाव करना मुश्किल हो गया।

पास में गैस एजेंसी होने से बढ़ी दहशत

घटना स्थल के ठीक पास इंडियन रसोई गैस की एजेंसी और उसका गोदाम भी मौजूद है। यही वजह रही कि इलाके के लोगों में और ज्यादा डर का माहौल बन गया। लोगों को आशंका थी कि अगर आग वहां तक पहुंच जाती तो बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। इस डर के कारण इलाके में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

माइंस रेस्क्यू टीम और दमकल ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही माइंस रेस्क्यू टीम के सदस्य और स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और आग बुझाने की कोशिश शुरू कर दी। वहीं थोड़ी ही देर में दमकल विभाग की करीब छह गाड़ियां भी मौके पर पहुंच गईं। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

जांच में जुटी पुलिस और प्रशासन

काफी देर तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आग को नियंत्रित कर लिया गया। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम पूरे मामले की जांच में जुट गई है। शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि गैस सिलेंडर ब्लास्ट के कारण ही यह हादसा हुआ, हालांकि पूरे मामले की जांच की जा रही है।